SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

जयपुर में विधायकों के फ्लैट्स की पेयजल सप्लाई में खामियां: अधीक्षण अभियंता ने सौंपी रिपोर्ट

जयपुर में 160 विधायकों के सरकारी फ्लैट्स में पेयजल सप्लाई करने वाले ज्योति नगर स्थित क्लियर वाटर जलाशय की जांच में मिट्टी जमा होने और जालियां टूटी मिलने जैसी खामियां सामने आई हैं. इस मामले में जलदाय विभाग ने जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है.

Reported By Ashish Chauhan Written By Aman Singh
Published: Oct 18, 2026, 03:51 PM IST | Updated: Oct 18, 2026, 04:05 PM IST
Image Credit: AI Image
Join

राजस्थान के जयपुर में माननीयों के फ्लैट्स में होने वाली पेयजल सप्लाई की सच्चाई सामने आने के बाद अब जल महकमे में हलचल तेज हो गई है. अधीक्षण अभियंता ने खामियों को लेकर उच्च अफसरों को रिपोर्ट दी. माना जा रहा है कि मॉनिटरिंग में लापरवाही बरतने वाले इंजीनियर्स पर गाज गिर सकती है.

 जांच के लिए पहुंचे अधीक्षण अभियंता

एक बार फिर से ज़ी मीडिया की खबर का दमदार असर हुआ है. 160 विधायकों के सरकारी फ्लैट्स में पेयजल सप्लाई से मामले में जलदाय विभाग ने जांच कराई है. अधीक्षण अभियंता केशव श्रीवास्तव ने ज्योति नगर स्थित क्लियर वाटर की मौजूदा स्थिति की जांच कर रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य अभियंता अजय को सौंप दी है. जांच में जलाशय में मिट्टी जमा होने और जालियां टूटी होने जैसी खामियां सामने आई हैं.

यह भी पढ़ें- राजस्थान में जल जीवन मिशन पर वित्तीय संकट: 2600 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट अटकी, 90 प्रतिशत योजनाएं प्रभावित

ज़ी मीडिया ने जलाशय की बदहाल स्थिति उजागर की थी. मौके पर टूटी मिली थीं, जबकि जलाशय में मिट्टी जमा दिखाई दी थी. इसी से 160 विधायकों के आवासीय फ्लैट्स और विधानसभा क्षेत्र में पेयजल सप्लाई होने के कारण पानी की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल उठे थे. जांच में ये भी सामने आया था कि क्लोरीन का ही खत्म हो गया.

खबर के बाद विभाग में हलचल

मामला सामने आने के बाद जलदाय विभाग में हलचल तेज हो गई है. अधिकारियों ने जलाशय की स्थिति की जांच की है. वहीं खबर के बाद दूसरे की स्थिति सुधारने के लिए भी इंजीनियर सक्रिय हुए हैं. इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि जब वीआईपी क्षेत्र के जलाशय में ऐसी खामियां मिली हैं, तो अन्य इलाकों में पेयजल भंडारण व्यवस्था की स्थिति क्या होगी.

यह भी पढ़ें- जल जीवन मिशन घोटाले में महेश जोशी को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, ये 8 आरोपी अभी भी जेल में बंद

पांच महीने पहले सफाई फिर कैसे जमा हुई मिट्टी ?

ज़ी मीडिया में जलाशय की सफाई से रिकॉर्ड का मुद्दा भी सामने आया था. रिकॉर्ड में करीब पांच महीने पहले सफाई का उल्लेख था. इसके बावजूद जलाशय में मिट्टी जमा मिली. ऐसे में सफाई की गुणवत्ता, नियमित निगरानी और ठेकेदार के कामकाज की जांच जरूरी हो गई है. उस समय जलदाय विभाग के एईएन मीणा ने पानी के सैंपल लेने और टूटी जालियां लगवाने की बात कही थी. उन्होंने खामियां मिलने पर सुधार के लिए कहा था.

पानी के सैंपल का इतंजार

अब अधीक्षण अभियंता की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी पर सवाल और अहम हो गए हैं. हालांकि, पानी की गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष के लिए सैंपल जांच की रिपोर्ट और विभाग की आगे की कार्रवाई का इंतजार रहेगा.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

आशीष चौहान
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES