राजस्थान के जयपुर में माननीयों के फ्लैट्स में होने वाली पेयजल सप्लाई की सच्चाई सामने आने के बाद अब जल महकमे में हलचल तेज हो गई है. अधीक्षण अभियंता ने खामियों को लेकर उच्च अफसरों को रिपोर्ट दी. माना जा रहा है कि मॉनिटरिंग में लापरवाही बरतने वाले इंजीनियर्स पर गाज गिर सकती है.
एक बार फिर से ज़ी मीडिया की खबर का दमदार असर हुआ है. 160 विधायकों के सरकारी फ्लैट्स में पेयजल सप्लाई से मामले में जलदाय विभाग ने जांच कराई है. अधीक्षण अभियंता केशव श्रीवास्तव ने ज्योति नगर स्थित क्लियर वाटर की मौजूदा स्थिति की जांच कर रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य अभियंता अजय को सौंप दी है. जांच में जलाशय में मिट्टी जमा होने और जालियां टूटी होने जैसी खामियां सामने आई हैं.
ज़ी मीडिया ने जलाशय की बदहाल स्थिति उजागर की थी. मौके पर टूटी मिली थीं, जबकि जलाशय में मिट्टी जमा दिखाई दी थी. इसी से 160 विधायकों के आवासीय फ्लैट्स और विधानसभा क्षेत्र में पेयजल सप्लाई होने के कारण पानी की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल उठे थे. जांच में ये भी सामने आया था कि क्लोरीन का ही खत्म हो गया.
मामला सामने आने के बाद जलदाय विभाग में हलचल तेज हो गई है. अधिकारियों ने जलाशय की स्थिति की जांच की है. वहीं खबर के बाद दूसरे की स्थिति सुधारने के लिए भी इंजीनियर सक्रिय हुए हैं. इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि जब वीआईपी क्षेत्र के जलाशय में ऐसी खामियां मिली हैं, तो अन्य इलाकों में पेयजल भंडारण व्यवस्था की स्थिति क्या होगी.
ज़ी मीडिया में जलाशय की सफाई से रिकॉर्ड का मुद्दा भी सामने आया था. रिकॉर्ड में करीब पांच महीने पहले सफाई का उल्लेख था. इसके बावजूद जलाशय में मिट्टी जमा मिली. ऐसे में सफाई की गुणवत्ता, नियमित निगरानी और ठेकेदार के कामकाज की जांच जरूरी हो गई है. उस समय जलदाय विभाग के एईएन मीणा ने पानी के सैंपल लेने और टूटी जालियां लगवाने की बात कही थी. उन्होंने खामियां मिलने पर सुधार के लिए कहा था.
अब अधीक्षण अभियंता की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी पर सवाल और अहम हो गए हैं. हालांकि, पानी की गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष के लिए सैंपल जांच की रिपोर्ट और विभाग की आगे की कार्रवाई का इंतजार रहेगा.