क्या होता है Mule Account? कैसे बैंक खाते बनते हैं साइबर ठगों का हथियार, जयपुर में खुला साइबर ठगी के नेटवर्क का राज
Rajasthan Cyber Fraud: राजस्थान पुलिस के 'म्यूल हंटर' अभियान के तहत माणकचौक थाना पुलिस ने साइबर ठगी की रकम खपाने के आरोप में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, आरोपी के म्यूल अकाउंट के खिलाफ राजस्थान, बिहार और गुजरात समेत चार राज्यों में साइबर शिकायतें दर्ज हैं.
Rajasthan Cyber Fraud: राजस्थान में साइबर ठगों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान 'म्यूल हंटर' के तहत माणकचौक थाना पुलिस ने कार्रवाई की है. पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम को खपाने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी तक पहुंचने के लिए पुलिस ने बैंक ट्रांजैक्शन से लेकर मोबाइल लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट तक को खंगाला. आरोपी के इस खाते के खिलाफ चार राज्यों में साइबर शिकायतें हैं. पुलिस को आशंका है कि आरोपी और उसके गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हो सकता है.
ठगी की रकम खपाने के लिए किराए पर बैंक खाते ले रहे ठग
साइबर ठग लोगों से ठगी की रकम को खपाने के लिए किराए पर बैंक खाते ले रहे हैं. लोग भी कमीशन के लालच में अपने खाते साइबर ठगों को उपलब्ध करा रहे हैं. यही वजह है कि इस तरह के बैंक अकाउंट को ठगों ने अपना हथियार बना लिया है. राजस्थान पुलिस के 'म्यूल हंटर' अभियान के तहत माणकचौक थाना पुलिस ने एक ऐसे म्यूल अकाउंट का पता लगाया, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए किया जा रहा था.
साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए संदिग्ध बैंक खातों पर निगरानी
डीसीपी उत्तर करण शर्मा ने बताया कि साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए संदिग्ध बैंक खातों पर निगरानी रखी जा रही है. इसी कड़ी में जौहरी बाजार की PNB बैंक शाखा में एक बैंक खाता संदिग्ध लगा. यह खाता साइबर ठगी में म्यूल अकाउंट की तरफ प्रयुक्त हो रहा था. राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल I4C पर जांच की गई, तो इस खाते के खिलाफ राजस्थान, बिहार और गुजरात से जुड़ी 4 साइबर शिकायतें सामने आईं. इनमें धोखाधड़ी की विवादित राशि सीधे इस खाते में जमा कराई गई और उसे कैश में बदलकर या दूसरे खातों में ट्रांसफर कर इस्तेमाल किया गया.
बैंक खाते से खुली डिजिटल कड़ी
पुलिस ने संदिग्ध बैंक खाते का स्टेटमेंट और KYC दस्तावेज जुटाए. इसके बाद बैंक ट्रांजैक्शन का राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों से मिलान किया गया. जांच में शिकायतों और खाते के ट्रांजैक्शन के बीच संबंध सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की.
दस्तावेज और मोबाइल नंबर बदला
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कार्रवाई से बचने के लिए अपने KYC रिकॉर्ड में दर्ज पता और मोबाइल नंबर बदल दिए थे. पुराने मोबाइल नंबर बंद कर दिए गए. पुराने रिकॉर्ड में दर्ज नंबरों को निष्क्रिय कर दिया था, लेकिन डिजिटल दुनिया में आरोपी अपने पीछे कई निशान छोड़ चुका था.
48 घंटे का तकनीकी सर्विलांस
पुलिस टीम ने नए डिजिटल फुटप्रिंट, नेटवर्क गतिविधियों और टावर लोकेशन का विश्लेषण किया. तकनीकी इनपुट के आधार पर आरोपी के नए मोबाइल नंबर और रियल टाइम लोकेशन को ट्रेस किया गया. इसके बाद करीब 48 घंटे तक लगातार तकनीकी सर्विलांस करते हुए आरोपी को दबोच लिया.
पूछताछ में ठगी का खुलासा
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने गिरोह के साथ मिलकर साइबर ठगी करने की बात स्वीकार की है. आरोप है कि गिरोह लोगों की निजी जानकारी जुटाकर फर्जी कॉल, SMS, OTP और फिशिंग लिंक के जरिए उन्हें झांसे में लेता था. इसके बाद पीड़ितों के बैंक खातों से रकम म्यूल खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी.
ठगी की रकम कैश में बदलकर खर्च करने का आरोप
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से आई रकम को तत्काल कैश में बदला जाता था या दूसरे खातों में ट्रांसफर किया जाता था. आरोपी पर इस रकम को ऐशो-आराम और मौज-मस्ती में खर्च करने का भी आरोप है. गिरोह पुलिस से बचने के लिए लगातार SIM कार्ड बदलता था.
नेटवर्क की तलाश जारी
फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ जारी है. पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में साइबर ठगी के अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और दूसरे मामलों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है. माणकचौक थाना पुलिस की कार्रवाई में एक आरोपी गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन पुलिस की जांच अब म्यूल अकाउंट से जुड़े पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है. यानी आने वाले दिनों में साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं.
क्या होता है म्यूल अकाउंट
म्यूल अकाउंट ऐसा खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर ठग ठगी से मिले पैसे को पाने, दूसरे खातों में भेजने या निकालने के लिए करते हैं. साइबर ठग अक्सर किसी व्यक्ति को कमीशन या पैसे का लालच देकर उसका बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने के लिए लेते हैं. कई मामलों में खाताधारक को यह पता होता है कि उसके खाते का इस्तेमाल संदिग्ध लेनदेन के लिए हो रहा है, जबकि कुछ मामलों में उसे पूरी जानकारी नहीं होती. अगर खाताधारक के खाते में साइबर ठगी की रकम आती है, तो वो खाता भी जांच के दायरे में आ सकता है. भले ही खाताधारक खुद पीड़ित से ठगी न की हो.