सिर्फ 2 दिन का समय और राजस्थान का सबसे शानदार सफर! बादलों के बीच बसा यह किला कर देगा हैरान
Kumbhalgarh Tourist Places: राजस्थान का कुंभलगढ़ इतिहास, प्रकृति और शांति का खूबसूरत मेल है. यहां 36 KM लंबी किले की दीवार, वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी, मोलेला की टेराकोटा कला और पारंपरिक राजस्थानी खाना पर्यटकों को खास अनुभव देता है.
Kumbhalgarh Tourist Places: अगर आप राजस्थान घूमने का प्लान बना रहे हैं और जयपुर या उदयपुर जैसी चर्चित जगहों से कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो कुंभलगढ़ आपकी ट्रैवल लिस्ट में शामिल हो सकता है. अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा कुंभलगढ़ इतिहास, प्रकृति और शांति का सुंदर मेल है. यहां आपको शानदार किला, पुराने मंदिर, हरियाली से भरी वादियां और वन्यजीव देखने को मिलते हैं. कुंभलगढ़ की खास बात यह है कि यहां घूमते समय आपको राजस्थान की संस्कृति को करीब से समझने का मौका भी मिलता है. अगर आप वीकेंड पर दो दिन का शांत और यादगार ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो कुंभलगढ़ एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
कुंभलगढ़ किला जरूर देखें
कुंभलगढ़ का सबसे बड़ा आकर्षण यहां मौजूद प्रसिद्ध कुंभलगढ़ किला है. 15वीं शताब्दी में मेवाड़ के शासक राणा कुंभा ने इस किले का निर्माण करवाया था. किले की विशाल दीवार करीब 36 किलोमीटर लंबी है. इसे चीन की दीवार के बाद दुनिया की सबसे लंबी लगातार दीवारों में गिना जाता है. किले के अंदर कई पुराने मंदिर और ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं. यहां घूमते समय आपको पुराने समय की वास्तुकला और इतिहास की झलक देखने को मिलती है. इसके अलावा किले से आसपास फैली अरावली की पहाड़ियों का खूबसूरत नजारा भी दिखाई देता है. इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए कुंभलगढ़ किला खास जगह हो सकता है.
कुंभलगढ़ वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी की सैर
अगर आपको जंगल, हरियाली और वन्यजीव पसंद हैं, तो कुंभलगढ़ वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी भी घूम सकते हैं. किले के आसपास फैला यह इलाका पहाड़ी इलाकों और हरियाली से घिरा हुआ है. यहां जीप सफारी, ट्रेकिंग और घुड़सवारी के जरिए आसपास के क्षेत्र को देखने का मौका मिलता है. सफारी या घूमने के दौरान सांभर, नीलगाय, चिंकारा और चौसिंगा जैसे जानवर देखने को मिल सकते हैं. प्रकृति के करीब समय बिताने वालों के लिए यह जगह ट्रिप को और खास बना सकती है.
मोलेला गांव में देखें टेराकोटा कला
कुंभलगढ़ से कुछ दूरी पर स्थित मोलेला गांव अपनी खास टेराकोटा कला के लिए जाना जाता है. यहां के स्थानीय कारीगर मिट्टी से देवी-देवताओं और लोककथाओं से जुड़ी अलग-अलग आकृतियां तैयार करते हैं. अगर आपको कला, हस्तशिल्प और राजस्थान की स्थानीय संस्कृति को समझने में दिलचस्पी है, तो मोलेला गांव जाना आपके सफर का अच्छा हिस्सा बन सकता है. यहां आपको स्थानीय कारीगरों के काम को करीब से देखने का अवसर भी मिलता है.
कुंभलगढ़ में क्या खाएं?
कुंभलगढ़ के खान-पान पर मेवाड़ की संस्कृति का असर साफ दिखाई देता है. यहां आपको पारंपरिक राजस्थानी खाने का स्वाद चखने का मौका मिलता है. यहां दाल बाटी चूरमा, गट्टे की सब्जी, पिटोड़ की सब्जी, लाल मांस और पंचमेल दाल जैसी पारंपरिक डिशेज ट्राई की जा सकती हैं. राजस्थान के पारंपरिक स्वाद को पसंद करने वाले लोगों के लिए स्थानीय खाना यात्रा का एक खास अनुभव बन सकता है.
कैसे पहुंचें कुंभलगढ़?
कुंभलगढ़ उदयपुर से लगभग 84 किलोमीटर दूर है. यहां पहुंचने के लिए पहले फ्लाइट या बस के जरिए उदयपुर पहुंचा जा सकता है. इसके बाद सड़क के रास्ते कुंभलगढ़ जाया जा सकता है. उदयपुर से कुंभलगढ़ पहुंचने में लगभग 2 घंटे लग सकते हैं. कुंभलगढ़ में रेलवे स्टेशन नहीं है, लेकिन सड़क मार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. इसलिए उदयपुर को बेस बनाकर कुंभलगढ़ घूमने का प्लान भी बनाया जा सकता है.
कुंभलगढ़ में कहां ठहरें?
कुंभलगढ़ में ठहरने के लिए बजट होटल से लेकर लग्जरी रिजॉर्ट तक कई तरह के विकल्प मिल जाते हैं. पहाड़ियों के बीच शांत माहौल में रुकने का अनुभव भी इस यात्रा को खास बना सकता है. अगर आप प्रकृति और शांति के बीच कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो कुंभलगढ़ में रुककर आसपास की जगहों को आराम से एक्सप्लोर कर सकते हैं. वहीं, समय ज्यादा हो तो कुंभलगढ़ के साथ उदयपुर को भी अपनी यात्रा में शामिल किया जा सकता है.
दो दिन के ट्रिप के लिए हो सकता है अच्छा विकल्प
कुंभलगढ़ में इतिहास, प्रकृति, वन्यजीव, स्थानीय कला और राजस्थानी खान-पान एक ही यात्रा में देखने को मिल सकता है. यही वजह है कि राजस्थान में कुछ अलग घूमने की योजना बना रहे लोग इसे अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं. खासकर वीकेंड पर दो दिन का ट्रिप प्लान करने वालों के लिए कुंभलगढ़ में घूमने और आसपास की जगहों को देखने का विकल्प मौजूद है.