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Kota News: राजस्थान के कोटा नगर निगम चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है. टिकट बंटवारे को लेकर शुरू हुआ विवाद बंद कमरों से निकलकर सड़क तक पहुंच गया. कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं के गुट, टिकटों पर खींचतान और अपने ही कार्यकर्ताओं के विरोध ने पार्टी की चुनावी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. नामांकन के बाद कांग्रेस जिला अध्यक्ष का पुतला जलाए जाने से विवाद और गहरा गया.
प्रदेश से दिल्ली तक पहुंचा टिकट विवाद
कोटा में टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस के स्थानीय और प्रदेश नेताओं के बीच सहमति नहीं बन सकी तो मामला प्रदेश प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा तक पहुंचा, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचने के बाद शीर्ष नेताओं से चर्चा की गई. इसके बाद दिल्ली से पूनम पासवान को ऑब्जर्वर बनाकर राजस्थान भेजा गया.
फाइलें फेंकने तक पहुंचा विवाद
सूत्रों के अनुसार, प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देने के दौरान विवाद ने गंभीर रूप ले लिया. सूत्रों के अनुसार आरोप है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल, अशोक चांदना और दोनों जिला अध्यक्षों की मौजूदगी में पूनम पासवान और पुष्पेंद्र भारद्वाज के सामने फाइलें तक फेंकी गईं. नेताओं की ओर से कथित तौर पर नाराजगी जताते हुए कहा गया कि प्रहलाद गुंजल से ही टिकट बंटवा दिए जाएं. इसके बाद संबंधित नेता बैठक छोड़कर भी चले गए.
विधानसभा क्षेत्रवार टिकट वितरण से भी बढ़ी चर्चा
इस बार कोटा में विधानसभा क्षेत्रवार टिकट वितरण की चर्चा है. लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस नेता नईमुद्दीन गुड्डू की ओर से 24 प्रत्याशियों के टिकट फाइनल किए जाने और नामांकन के दौरान उनके सिंबल लिए जाने की बात सामने आई.
दूसरी ओर, नामांकन के दिन कांग्रेस जिला अध्यक्ष राखी गौतम का मोबाइल फोन स्विच ऑफ रहा. शांति धारीवाल की ओर से भी कलेक्ट्रेट में कोई प्रतिनिधि नजर नहीं आया.
पुराने नेताओं के टिकट कटने से नाराजगी
गुटबाजी के बीच पूर्व महापौर पवन मीणा का टिकट कटना भी चर्चा में रहा. महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष शालिनी गौतम को भी टिकट नहीं दिया गया. इससे पार्टी के भीतर नाराजगी और बढ़ने की बात सामने आ रही है. नामांकन के बाद जिला अध्यक्ष राखी गौतम का पुतला जलाकर विरोध किया गया. पूर्व पार्षद शमा मिर्जा ने दबाव में टिकट दूसरे को देने जैसे गंभीर आरोप तक लगाए.
अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती
नामांकन पूरा हो चुका है और आज प्रत्याशियों के नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी हो रही है. इसके बाद चुनावी मुकाबला और स्पष्ट होगा, लेकिन कांग्रेस के सामने असली चुनौती अब नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की है.
टिकट बंटवारे की लड़ाई अगर मतदान तक जारी रही तो कांग्रेस को इसका चुनावी नुकसान उठाना पड़ सकता है. सवाल यही है, क्या कांग्रेस अपने ही गुटों को एकजुट कर पाएगी या अंदरूनी कलह विपक्ष के लिए सबसे बड़ा हथियार बन जाएगी?