खाटू श्याम जी के परिवार में कौन-कौन? भीम से लेकर श्रीकृष्ण तक ऐसे जुड़ा है रिश्ता
खाटू श्याम जी को महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक का स्वरूप माना जाता है. बर्बरीक के पास तीन दिव्य बाण थे और उन्होंने कमजोर पक्ष का साथ देने का प्रण लिया था. श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में ‘श्याम’ नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था. कहते हैं कि खाटू श्याम जी पांडव वंश से जुड़े हैं.
Khatu Shyam Ji: राजस्थान के सीकर जिले में बाबा श्याम यानी खाटू श्याम जी का भव्य मंदिर है, जो देशभर में आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां हर साल लाखों की संख्या में भक्त बाबा के दर्शन के लिए खाटू नगरी आते हैं.
कहते हैं कि खाटू श्याम जी की कहानी महाभारत काल से जुड़ी हुई है. खाटू श्याम जी का असली नाम बर्बरीक था, जो महाभारत के महान योद्धा के स्वरूप माने जाते हैं. खाटू श्याम जी को भक्त हारे का सहारा और तीन बाणधारी के साथ कई नामों से पुकारते हैं.
पांडव वंश से जुड़े हैं खाटू श्याम जी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, बर्बरीक, पांडव पुत्र भीम और राक्षसी हिडिंबा के बेटे घटोत्कच के बेटे थे, जिसके चलते बर्बरीक का संबंध सीधे पांडव वंश से जुड़ा जाता है. बर्बरीक की मां का नाम मोरवी है. कहते हैं कि बर्बरीक बचपन से ही युद्धकला में विशेष रुचि रखते थे और उन्होंने कठिन साधना करके दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए थे.
कहते हैं कि बर्बरीक की तपस्या-साधना से खुश होकर महादेव ने उनको तीन ऐसे दिव्य बाण थे, जिनकी शक्ति की वजह से वे अकेले ही युद्ध का परिणाम बदल सकते थे. कहा जाता है कि बर्बरीक की मां ने उनको हमेशा हारे हुए पक्ष की ओर से लड़ने को कहा था.
खुशी-खुशी कर दिया शीश का दान
कथाओं के अनुसार, बर्बरीक महाभारत युद्ध से पहले युद्ध देखने और उसमें शामिल होने के लिए कुरुक्षेत्र गए थे. उनकी शक्ति के बारे में भगवान श्रीकृष्ण को पता था. कृष्ण जानते थे कि बर्बरीक अगर कमजोर पक्ष की ओर से लड़ेंगे तो युद्ध बदल जाएगा.
मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का रूप धारण किया और बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया. इधर,बर्बरीक ने भी अपना शीश दान कर दिया. उनकी भक्ति और त्याग से खुश होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे.
युद्ध के बाद बर्बरीक का शीश का क्या हुआ?
कहते हैं कि युद्ध के बाद बर्बरीक का शीश एक नदी में बहा दिया गया था, जिसके बाद वह शीश राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में मिला. इसके चलते ही उनका नाम खाटू श्याम फेमस हुआ. वर्तमान समय में खाटू धाम में बाबा श्याम का बड़ा मंदिर है, जहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भक्त आते हैं
खाटू श्याम जी का परिवार
अगर खाटू श्याम जी के परिवार की बात करें तो धार्मिक परंपरा में उनके पिता घटोत्कच, मां मोरवी, दादा के रूप में भीम और दादी राक्षसी हिडिंबा का उल्लेख मिलता है. साथ ही उनके संबंध पांडवों और भगवान श्रीकृष्ण से भी जुड़ते हैं. कहते हैं कि माता मोरवी के तीन बेटे थे, जिसमें सबसे बड़े बेटे बर्बरीक थे. कहा जाता है कि ये अपनी मां से लाडले थे और दो अन्य पुत्र जनपर्व और मेघवर्ण थे.
आज के समय में खाटू श्याम जी केवल एक मंदिर या धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बाबा श्याम विश्वास, त्याग और संकट के समय सहारे के प्रतीक माने जाते हैं. हर साल यहां फाल्गुन मेला लगता है, जिसमें भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.