पूजा के साथ अदा की जाती है नमाज: जोधपुर में 14 पीढ़ियों से देवी मां की सेवा कर रहा मुस्लिम परिवार, सपने में माता ने दिया था आदेश
जोधपुर जिले के भोपालगढ़ स्थित बागोरिया गांव का माताजी मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की अनोखी मिसाल है. यहां पिछले 14 पीढ़ियों से एक सिंधी मुस्लिम परिवार देवी मां की पूजा-अर्चना करता आ रहा है. करीब 500-600 साल पुरानी इस परंपरा में परिवार मंदिर में पूजा करने के साथ नमाज भी अदा करता है. पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं.
Jodhpur Temple: राजस्थान के जोधपुर जिले के भोपालगढ़ के बागोरिया गांव में स्थित माताजी का मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की अनोखी मिसाल है, जहां पिछले 14 पीढ़ियों से एक सिंधी मुस्लिम परिवार पुजारी बनकर देवी मां की सेवा कर रहा है. 500-600 साल पुरानी यह परंपरा आज भी कायम है, जहां पूजा के साथ नमाज भी अदा की जाती है.
पहाड़ी पर स्थित है आस्था का केंद्र
बागोरिया गांव की पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. मान्यता है कि इसी पहाड़ी पर माता ने अवतार लिया था. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. यह मंदिर पहाड़ी की चोटी पर बना है, जहां तक पहुंचने के लिए लगभग 500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. मंदिर परिसर में कुल 11 पोल और एक प्राचीन पर्चा बावड़ी भी है.
सपने में देवी ने दिया आदेश
मंदिर से जुड़ी एक रोचक कथा भी काफी प्रचलित है. बताया जाता है कि करीब सौ साल पहले इस मुस्लिम परिवार के पूर्वज ऊंटों के काफिले के साथ मालवा की ओर जा रहे थे. इसी दौरान एक रात उनके सपने में देवी मां ने दर्शन दिए और बताया कि पहाड़ी पर बनी बावड़ी से उनकी मूर्ति निकली है. देवी ने उन्हें उस मूर्ति की पूजा करने का आदेश दिया तब से यह परिवार देवी की सेवा करता आ रहा है.
पूजा के साथ नमाज भी
इस परिवार की खास बात यह है कि वे मंदिर में पूजा-अर्चना करने के साथ-साथ मस्जिद जाकर नमाज भी अदा करते हैं. वे हिन्दू रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पुजारी की भूमिका निभाते हैं और क्षेत्र के लोगों को सभी धार्मिक अनुष्ठान करवाते हैं.
गांव में भाईचारे की मिसाल
बागोरिया गांव में इस परंपरा को लेकर किसी तरह का मतभेद नहीं है. गांव के लोग इस मुस्लिम परिवार को अपने पुजारी के रूप में पूरी श्रद्धा से स्वीकार करते हैं. यहां हिन्दू-मुस्लिम एकता और भाईचारे का अनूठा उदाहरण देखने को मिलता है. यह मंदिर समाज को यह संदेश देता है कि आस्था और मानवता का कोई धर्म नहीं होता.
पुजारी का कहना है कि बागोरिया माताजी के मंदिर में मेरे से पहले मेरे परिवार की 14वीं पीढ़ी के रूप में पिता जमालुद्दीन खान सेवा करते आए,अब उनके 6 माह पहले निधन होने पर मेरे द्वारा पूजा की जा रही है. सांप्रदायिक एकता की मिसाल पेश करने वाला मंदिर है. आज से शुरू होने वाले नवरात्रि में यहां हजारों लोग दर्शन करने के लिए आएंगे.
Report-Rakesh Kumar Bhardwaj