मौत के बाद भी पढ़ाएंगे झुंझुनूं के मेघराज करोल: विद्यार्थियों के लिए पेश की अनोखी मिसाल!
झुंझुनूं के सुलताना निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक मेघराज करोल ने मृत्यु के बाद भी समाजसेवा की मिसाल पेश की. उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार परिजनों ने उनकी पार्थिव देह राजकीय मेडिकल कॉलेज झुंझुनूं को दान कर दी, जिससे मेडिकल विद्यार्थियों को पढ़ाई में मदद मिलेगी. खास बात यह है कि उनकी पत्नी प्रेम देवी ने भी अपनी देह मेडिकल कॉलेज सीकर को दान की थी.
Jhunjhunu News: जिस शिक्षक ने जीते जी हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारा, वह अब मृत्यु के बाद भी मेडिकल के विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे. शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाले झुंझुनूं जिले के सुलताना निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक मेघराज करोल की अंतिम इच्छा के अनुसार, उनके परिजनों ने उनकी पार्थिव देह राजकीय मेडिकल कॉलेज झुंझुनूं को दान कर दी.
मानव सेवा की मिसाल
जीवनभर विद्यार्थियों को ज्ञान देकर उनके भविष्य की नींव मजबूत करने वाले मेघराज करोल ने अंतिम विदाई के बाद भी चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा में योगदान देने की मिसाल पेश की है. खास बात यह है कि उनकी पत्नी प्रेम देवी ने भी देहदान किया था. उन्होंने अपनी पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सीकर को दान की थी.
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अंतिम इच्छा का सम्मान
परिजनों ने बताया कि मेघराज करोल ने इच्छा जाहिर की थी कि मृत्यु के बाद उनकी पार्थिव देह किसी मेडिकल कॉलेज को दान की जाए, ताकि चिकित्सा के विद्यार्थियों को अध्ययन में मदद मिल सकें. उनकी इसी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने उनकी पार्थिव देह राजकीय मेडिकल कॉलेज झुंझुनूं को दान कर दी. मेडिकल कॉलेज में देहदान के माध्यम से विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना समझने और चिकित्सा विज्ञान का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलती है.
हजारों विद्यार्थियों का संवारा भविष्य
इस तरह मेघराज करोल का योगदान उनके जीवन के बाद भी चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बना रहेगा. मेघराज करोल का शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा. उन्होंने अपने सेवाकाल में विद्यार्थियों को शिक्षित कर उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की राह दिखाई. उनके पढ़ाए अनेक विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं. एक शिक्षक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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पति-पत्नी ने देहदान कर पेश की सेवा की मिसाल
जीवनभर ज्ञान बांटने वाले मेघराज करोल ने मृत्यु के बाद भी ज्ञान के प्रसार का रास्ता चुना. उनका देहदान यह संदेश देता है कि शिक्षा और सेवा की कोई अंतिम सीमा नहीं होती. व्यक्ति अपने जीवन के बाद भी समाज के लिए उपयोगी बना रह सकता है. मेघराज करोल का देहदान का निर्णय इसलिए भी विशेष है, क्योंकि उनकी पत्नी प्रेम देवी ने भी देहदान किया था. उनके निधन के बाद उनकी पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज सीकर को दान की गई थी.
मौत के बाद भी भावी डॉक्टरों की पढ़ाई में आएंगे काम
अब मेघराज करोल ने भी अपनी अंतिम इच्छा के अनुरूप पार्थिव देह राजकीय मेडिकल कॉलेज झुंझुनूं को समर्पित कर दी. मेघराज करोल अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके पढ़ाए विद्यार्थियों की सफलता और उनकी पार्थिव देह से चिकित्सा विद्यार्थियों को मिलने वाला ज्ञान उनके योगदान को जीवित रखेगा. जिस शिक्षक ने जीवनभर विद्यार्थियों का भविष्य संवारा, वह मृत्यु के बाद भी भावी चिकित्सकों की शिक्षा में सहभागी बनकर मानव सेवा की प्रेरक मिसाल बन गए.
Report- Sandeep Kedia