कौन हैं 104 एनकाउंटर वाले IPS डॉ. अनिल कुमार? जो अनाथ हुईं दो बच्चियों के लिए देंगे 1 महीने की सैलरी
झुंझुनूं के अलसीसर की रामू की ढाणी के रहने वाले यूपी कैडर के IPS डॉ. अनिल कुमार आजमगढ़ हत्याकांड में माता-पिता को खोने वाली दो मासूम बच्चियों की मदद के लिए आगे आए हैं. उन्होंने अपनी एक महीने की तनख्वाह बच्चियों के नाम FD कराने की घोषणा की. उनकी पहल से प्रेरित होकर आजमगढ़ पुलिस के जवानों ने भी एक दिन का वेतन देने का फैसला किया.
Jhunjhunu News: वर्दी पहनकर अपराध के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले पुलिस अधिकारी की पहचान अक्सर उसके एक्शन और सख्त फैसलों से होती है लेकिन कभी-कभी उसी वर्दी के पीछे छिपा इंसान सामने आता है और फिर कहानी सिर्फ पुलिस अधिकारी की नहीं रहती... बल्कि इंसानियत की बन जाती है. झुंझुनूं जिले के अलसीसर की रामू की ढाणी से निकले यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी डॉ. अनिल कुमार की ऐसी ही एक पहल इन दिनों चर्चा में है.
दो मासूम बच्चियों के भविष्य के लिए आगे आए IPS डॉ. अनिल कुमार
यूपी के आजमगढ़ के एक बेहद दर्दनाक हत्याकांड में माता-पिता का साया खो चुकीं दो मासूम बच्चियों के सामने जब पूरी जिंदगी का सवाल खड़ा हुआ तो IPS डॉ. अनिल कुमार ने केवल पुलिस अधिकारी की भूमिका तक खुद को सीमित नहीं रखा.उन्होंने इन बच्चियों के भविष्य का सहारा बनने का फैसला किया.
एक महीने की सैलरी बच्चियों के नाम कराएंगे FD
उन्होंने अपनी एक माह की तनख्वाह बच्चियों के नाम एफडी कराने की घोषणा की है. उनकी इस संवेदनशील पहल से प्रभावित होकर आजमगढ़ पुलिस के जवान भी आगे आए और बच्चियों की मदद के लिए एक दिन का वेतन देने का फैसला लिया. डॉ. अनिल कुमार की पहचान उत्तर प्रदेश पुलिस में अपराध के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने वाले अधिकारी के रूप में बनी है.
104 एनकाउंटर से पहचान
पिछले साल 2025 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार उनके करीब आठ साल के सेवाकाल में 104 एनकाउंटर का आंकड़ा सामने आया था लेकिन आजमगढ़ की इस घटना ने उनकी पहचान का एक दूसरा पहलू भी सामने ला दिया, जहां एक ओर वे अपराध के खिलाफ 'एक्शन ऑन द स्पॉट' के लिए जाने जाते हैं.
आर्थिक मदद के साथ बच्चियों को दिया भविष्य का भरोसा
वहीं, दूसरी ओर किसी पीड़ित के दर्द को समझकर उसके साथ खड़े होने का उनका यह फैसला उनके संवेदनशील व्यक्तित्व को सामने लाता है. दो बच्चियों ने एक ही घटना में अपना परिवार खो दिया. ऐसे समय में उनके भविष्य की चिंता करना और अपनी कमाई का हिस्सा उनके नाम करना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उन बच्चियों को यह भरोसा दिलाने जैसा है कि उनके जीवन में सब कुछ खत्म नहीं हुआ है.
आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था. अरविंद सिंह पर अपनी पत्नी समेत दो पंडितों और एक बच्चे की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है. घटना के बाद उसकी दो बेटियां कमरे में कैद थी. पुलिस ने करीब आठ घंटे तक बातचीत के जरिए उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की.
आठ घंटे की मशक्कत के बाद बच्चियों को निकाला सुरक्षित
हालात बिगड़ने पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाला. इस दौरान आरोपी की ओर से पुलिस पर फायरिंग की गई और जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई. घटना के बाद दोनों बच्चियों के सिर से माता-पिता का साया उठ चुका था. परिवार में अब बुजुर्ग दादी और दोनों मासूम बच्चियां ही रह गईं. यहीं से डॉ. अनिल कुमार की संवेदनशील सोच सामने आई.
पढ़ाई से पालन-पोषण तक
डॉ. अनिल कुमार ने महसूस किया कि इन बच्चियों को केवल तत्काल सुरक्षा की जरूरत नहीं है. असली चुनौती तो अब शुरू होगी-पढ़ाई, पालन-पोषण और भविष्य की. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी एक महीने की तनख्वाह बच्चियों के नाम एफडी कराने का फैसला लिया. प्रशासन की ओर से दोनों बच्चियों को यूपी में संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया भी की जा रही है. घटना की प्रत्यक्षदर्शी बच्ची की बाल मनोचिकित्सक से काउंसलिंग भी कराई जा रही है, ताकि इस भयावह घटना का उसके मन पर स्थायी असर कम किया जा सके.
झुंझुनूं की रामू की ढाणी से IPS बनने तक का सफर
डॉ. अनिल कुमार की कहानी खुद झुंझुनूं के लिए गौरव की कहानी है. अलसीसर क्षेत्र की रामू की ढाणी से निकलकर उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की. डॉक्टर बने, चिकित्सा सेवा में काम किया और इसके बाद देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक यूपीएससी का रास्ता चुना. लगातार प्रयासों के बाद उन्होंने पुलिस सेवा में जाने का सपना पूरा किया और 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी बने. एक चिकित्सक के रूप में लोगों की जिंदगी बचाने की पढ़ाई करने वाले डॉ. अनिल कुमार ने बाद में पुलिस की वर्दी पहनकर समाज को अपराध से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संभाली.
बहन डॉ. मंजू भी राजस्थान कैडर की IAS अधिकारी
आज वही डॉक्टर और पुलिस अधिकारी दो मासूम बच्चियों के भविष्य के लिए आगे आया है. उनकी बहन डॉ. मंजू भी राजस्थान कैडर में आईएएस है, जो भी सामाजिक सुधार के लिए अपनी अलग पहचान रखती है.
अपराध के खिलाफ सख्ती और पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता
झुंझुनूं की पहचान देशभर में अपनी मेहनत, संघर्ष और फौज-पुलिस में योगदान के लिए रही है. इस जिले की मिट्टी से निकले लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाते रहे हैं. इसी कड़ी में अलसीसर के डॉ. अनिल कुमार का नाम भी अब एक अलग वजह से चर्चा में है. उन्होंने पुलिस अधिकारी के तौर पर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की पहचान बनाई, लेकिन आज उनकी चर्चा दो मासूम बच्चियों के लिए उठाए गए मानवीय कदम के कारण हो रही है. एक तरफ कानून की सख्ती, दूसरी तरफ इंसानियत की नरमी. यही विरोधाभास डॉ. अनिल कुमार की इस कहानी को खास बनाता है.
अलसीसर से आजमगढ़ तक चर्चा में IPS की पहल
अलसीसर की जिस मिट्टी ने डॉ. अनिल कुमार को जन्म दिया, उसी मिट्टी का नाम अब उनकी उपलब्धियों के साथ उत्तर प्रदेश में भी लिया जा रहा है. यह कहानी केवल एक आईपीएस अधिकारी की नहीं है, बल्कि यह झुंझुनूं की उस मिट्टी की कहानी है, जो अपने बेटों को संघर्ष करना सिखाती है, जिम्मेदारी निभाना सिखाती है और जरूरत पड़ने पर किसी अनजान के दर्द को भी अपना समझना सिखाती है.
दो मासूमों को मिला भरोसा
डॉ. अनिल कुमार का यह कदम उन दो बच्चियों के लिए शायद जिंदगी भर की याद बन जाए क्योंकि कुछ मदद रुपये से बड़ी होती है. वह किसी टूटे हुए इंसान को यह एहसास दिलाती है कि तुम अकेले नहीं हो. शायद यही वजह है कि आज अलसीसर से लेकर झुंझुनूं तक लोग इस पुलिस अधिकारी की चर्चा सिर्फ उसके एक्शन के लिए नहीं, बल्कि उसके दिल के लिए भी कर रहे हैं.
Report- Sandeep Kedia