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चिड़ावा में बीच बाजार 2 सांडों का आतंक! लड़ते-लड़ते पहले मिठाई की दुकान में घुसे, फिर मोबाइल शॉप में

झुंझुनूं के चिड़ावा मुख्य बाजार में दो सांड लड़ते-लड़ते मिठाई की दुकान में घुस गए. इस दौरान व्यापारी और उसका बेटा बाल-बाल बच गए और जलेबी की कड़ाही और सामान सड़क पर बिखर गया. इसके बाद एक सांड मोबाइल की दुकान में भी जा घुसा. घटना CCTV में कैद हुई.

Written By Sneha Aggarwal
Published: Oct 01, 2026, 03:08 PM IST | Updated: Oct 01, 2026, 03:14 PM IST
Image Credit: Jhunjhunu News
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Jhunjhunu News: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे के मुख्य बाजार में एक बार फिर बेसहारा सांडों के आतंक ने व्यापारियों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी. दो सांडों के बीच बाजार में हुई लड़ाई के दौरान दोनों सांड अचानक एक दुकान में जा घुसे.

घटना में व्यापारी और उसका बेटा बाल-बाल बचे. पूरी घटना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. बताया जा रहा है कि दोनों सांड आपस में लड़ते-लड़ते मिठाई की दुकान में घुस गए.

मोबाइल दुकान में भी घुसा सांड
सांडों के दुकान में घुसते ही वहां बनाई जा रही जलेबी की कड़ाही और जलेबियां सड़क पर बिखर गईं. इसके बाद एक सांड पास की मोबाइल दुकान में जा घुसा. काफी मशक्कत के बाद लोगों ने उसे दुकान से बाहर निकाला. घटना के दौरान व्यापारियों की नजर एक सांड के कान में लगे टैग पर भी पड़ी. व्यापारियों का कहना है कि टैग लगा होने के कारण यह सांड किसी गौशाला से संबंधित होने की संभावना है.

गौशाला भेजे गए सांड फिर बाजार में कैसे लौटे?
व्यापारियों का कहना है कि पहले भी नगरपालिका की ओर से बड़ी संख्या में सांडों को श्रीकृष्ण गौशाला भिजवाया गया था लेकिन गौशाला इन बेसहारा सांडों को संभाल नहीं पाई और ये सांड वापस बाजार में नजर आने लगे. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि अगर सांडों को गौशाला भेजा जाता है, तो वे वापस बाजारों तक कैसे पहुंच रहे हैं और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? लगातार बाजारों में सांडों की मौजूदगी और उनके कारण हो रही घटनाओं को लेकर व्यापारियों में नाराजगी है.

सिर्फ गौशाला भेजना नहीं, स्थायी समाधान की मांग
व्यापारियों का कहना है कि केवल सांडों को पकड़कर गौशाला भेज देना ही स्थायी समाधान नहीं है. नगरपालिका और गौशाला प्रबंधन को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पकड़े गए सांड दोबारा बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में न पहुंचें. व्यापारियों का कहना है कि बाजार में सांडों के झुंड दिखाई देते ही लोग सतर्क हो जाते हैं. दुकानदारों को डर रहता है कि कहीं अचानक सांड दुकान में न घुस जाएं या किसी ग्राहक, बच्चे या राहगीर को नुकसान न पहुंचा दें.

नगरपालिका और गौशाला प्रबंधन से कार्रवाई की मांग
इस ताजा घटना के बाद व्यापारियों ने नगरपालिका और संबंधित गौशाला प्रबंधन से सांडों की स्थायी व्यवस्था, निगरानी और बाजारों में उनकी आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की है. सवाल अब यही है कि आखिर बाजारों में बार-बार लौट रहे इन सांडों की जिम्मेदारी कौन लेगा-नगरपालिका या गौशाला प्रबंधन?  

Report- Sandeep Kedia 

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About the Author

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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