न कोई नेता पसंद, न कोई पार्टी: यहां जीतने के लिए नहीं, सबको हराने के लिए पड़े रिकॉर्ड वोट! पढ़ें निकाय चुनाव का अनोखा रिकॉर्ड
Jaipur News: जयपुर नगर निगम चुनाव में 27,099 मतदाताओं ने NOTA दबाया. वार्ड 66 में सबसे ज्यादा 767 NOTA वोट पड़े, वहीं, सांगानेर के 21 वार्डों में कुल 5,490 वोट NOTA के खाते में गए.
Jaipur News: चुनाव में वोट अक्सर किसी को जिताने के लिए दिया जाता है लेकिन जयपुर में 27 हजार से ज्यादा मतदाताओं ने वोट तो दिया, पर पसंद किसी को नहीं किया. सबसे दिलचस्प कहानी वार्ड 66 की है. जहां मतदान के दिन NOTA की टेबल लगी और नतीजे में NOTA ने यहीं शहर का रिकॉर्ड बना दिया. अकेले इस वार्ड में 767 लोगों ने सभी प्रत्याशियों को नकार दिया. वहीं सांगानेर में पूरे शहर के सबसे ज्यादा 5,490 NOTA वोट पड़े. यानी इस चुनाव में प्रत्याशियों की जीत-हार के बीच 27 हजार वोट ऐसे भी हैं, जो किसी के साथ नहीं...बल्कि सबके खिलाफ गए.
जयपुर नगर निगम चुनाव में 15 लाख से ज्यादा मतदाताओं ने अपनी पसंद का पार्षद चुनने के लिए वोट डाला. लेकिन इनमें 27,099 मतदाता ऐसे भी थे, जिन्हें मैदान में उतरा कोई प्रत्याशी पसंद नहीं आया. इन्होंने EVM पर NOTA यानी ‘इनमें से कोई नहीं’ का बटन दबाया. NOTA के इन आंकड़ों में सबसे दिलचस्प कहानी वार्ड 66 की है. मतदान के दिन इसी वार्ड के महात्मा गांधी स्कूल मतदान केंद्र के बाहर NOTA के समर्थन में टेबल लगाकर वोट देने की अपील की गई थी. नतीजे आए तो पूरे जयपुर में सबसे ज्यादा 767 वोट भी NOTA में इसी वार्ड में निकले. यह आंकड़ा कितना असामान्य है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि NOTA के मामले में दूसरे नंबर पर रहे वार्ड 90 में 428 वोट पड़े. यानी वार्ड 66 ने दूसरे नंबर के वार्ड से भी 339 ज्यादा NOTA वोट दिए.
सांगानेर बना NOTA का सबसे बड़ा केंद्र
विधानसभा क्षेत्रवार तस्वीर देखें तो सांगानेर NOTA का सबसे बड़ा केंद्र बनकर सामने आया. यहां 21 वार्डों में 5,490 लोगों ने किसी प्रत्याशी को नहीं चुना. यह जयपुर में पड़े कुल 27,099 NOTA वोटों का करीब 20.3% है. यानी शहर में NOTA दबाने वाले हर पांच मतदाताओं में लगभग एक सांगानेर के वार्डों से था. इसके बाद बगरू में 3,674, विद्याधर नगर में 3,248, मालवीय नगर में 3,235 और सिविल लाइंस में 2,976 NOTA वोट पड़े.
तीन वार्डों में कुल मिलाकर 426 NOTA वोट
शहर के 146 वार्डों के उपलब्ध नतीजों का विश्लेषण बताता है कि NOTA का असर हर इलाके में एक जैसा नहीं था. 53 वार्डों में 200 या इससे ज्यादा मतदाताओं ने NOTA चुना. इनमें 18 वार्ड ऐसे रहे, जहां आंकड़ा 300 के पार पहुंच गया. इसके उलट 26 वार्डों में NOTA 100 वोट भी हासिल नहीं कर सका. सबसे कम वार्ड 11 में केवल 30 लोगों ने NOTA दबाया. वार्ड 125 में 39, वार्ड 93 और 126 में 53-53 तथा वार्ड 118 में 54 वोट ही NOTA के खाते में आए. आंकड़ों का एक और दिलचस्प पहलू है. आमेर विधानसभा क्षेत्र के उपलब्ध तीन वार्डों में कुल मिलाकर 426 NOTA वोट पड़े. इसके मुकाबले अकेले वार्ड 66 में 767 वोट NOTA को मिले. यानी वार्ड 66 ने आमेर के इन तीनों वार्डों के कुल NOTA से 341 वोट ज्यादा दिए. इसी तरह वार्ड 66 के 767 और सबसे कम NOTA वाले वार्ड 11 के 30 वोटों में 25 गुना से भी ज्यादा का अंतर है.
बहरहाल, चुनाव में जीत-हार प्रत्याशियों की हुई, लेकिन 27 हजार से ज्यादा मतदाताओं ने अपना फैसला किसी उम्मीदवार के पक्ष में नहीं, बल्कि सभी उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज कराया. सबसे दिलचस्प तस्वीर उस वार्ड से निकली, जहां मतदान के दिन NOTA की बाकायदा टेबल लगी थी और नतीजे में वहीं NOTA पूरे शहर में नंबर-1 हो गया.