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विवादों में घिरे परिवहन निरीक्षक मुकुल गिदवानी: कभी रिश्वत के वीडियो तो कभी फर्जी चालान से मचा बवाल

Jaipur News: भिवाड़ी के परिवहन निरीक्षक मुकुल गिदवानी पर गलत चालान बनाने और ट्रांसपोर्टरों से पैसे मांगने के आरोप लगे हैं. एक मामले में 8500 रुपए के चालान की शिकायत मानवाधिकार आयोग तक पहुंची. वायरल वीडियो और चालान की लोकेशन में अंतर ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं.

Written By Kashiram Chaudhary
Published: Oct 09, 2026, 05:44 PM IST | Updated: Oct 09, 2026, 05:47 PM IST
Image Credit: भिवाड़ी के परिवहन निरीक्षक पर जयपुर में बैठकर गलत लोकेशन से चालान बनाने का आरोप.
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Jaipur News: राजस्थान के परिवहन विभाग में अधिकारियों और परिवहन निरीक्षकों से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आते रहते हैं. लेकिन भिवाड़ी जिला परिवहन कार्यालय के निरीक्षक मुकुल गिदवानी से जुड़े मामले लगातार चर्चा में हैं. पहले ट्रक मालिकों से पैसे मांगने के कथित वीडियो सामने आए और अब गलत तरीके से चालान बनाने के आरोप भी लगे हैं. एक मामले में चालान की लोकेशन और विभागीय पोर्टल पर दर्ज किए गए कॉर्डिनेट्स में अंतर सामने आया है. वहीं, एक अन्य मामले में गलत वाहन नंबर दर्ज करने के कारण वाहन मालिक को 8500 रुपए का चालान भरना पड़ा. इस प्रकरण में राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग भी संज्ञान ले चुका है.

जयपुर में रहकर भिवाड़ी की लोकेशन पर चालान बनाने का आरोप
मुकुल गिदवानी से जुड़ा एक चालान 5 जुलाई 2026 को जारी किया गया था. यह चालान हरियाणा के एक ट्रक का है. इसमें वाहन पर रिफ्लेक्टिव टेप और रिफ्लेक्टिव पेंट नहीं होने का हवाला देते हुए कार्रवाई की गई. चालान में घटनास्थल की लोकेशन भिवाड़ी रोड दर्ज की गई है. हालांकि, विभागीय पोर्टल पर चालान के साथ दर्ज कॉर्डिनेट्स जयपुर के बताए जा रहे हैं.

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरियाणा के वाहन नंबर HR65A6213 का चालान 5 जुलाई 2026 को शाम 4 बजकर 15 मिनट पर किया गया. इस पर 2000 रुपए का जुर्माना लगाया गया. चालान में भिवाड़ी रोड का उल्लेख है, जबकि पोर्टल पर दर्ज लोकेशन कॉर्डिनेट्स जयपुर के दौलतपुरा के पास स्थित बिलौंची जगह के बताए गए हैं.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब चालान में भिवाड़ी की लोकेशन दर्ज की गई, तो उसके साथ जयपुर के कॉर्डिनेट्स कैसे दर्ज हुए. यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या यह चालान मौके पर फ्लाइंग के दौरान बनाया गया था या किसी निजी गाड़ी से कार्रवाई किए बिना ही इसे जारी कर दिया गया. हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच और पुष्टि होना बाकी है.

गलत वाहन नंबर से 8500 रुपए का चालान काटने का मामला
मुकुल गिदवानी से जुड़ा एक अन्य मामला राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच चुका है. इस प्रकरण में आरोप है कि परिवहन निरीक्षक ने गलत वाहन नंबर दर्ज कर चालान बना दिया, जिसके कारण वाहन मालिक को बेवजह 8500 रुपए जमा करवाने पड़े.

शिकायत के अनुसार, वाहन नंबर RJ22CB7878 का चालान किया गया, जबकि वाहन उस समय पाली में मौजूद ही नहीं था. वाहन मालिक ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. इस मामले में आयोग ने प्रकरण संख्या 26/26/1353 दर्ज किया.

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने परिवहन आयुक्त और भिवाड़ी जिला परिवहन अधिकारी से जवाब मांगा था. दी गई जानकारी के मुताबिक, आयोग ने निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा भी की. इस प्रकरण ने चालान बनाने की प्रक्रिया और वाहन संबंधी विवरणों की जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

ट्रांसपोर्टरों से पैसे मांगने के दो वीडियो वायरल
गलत चालान के आरोपों के बीच परिवहन निरीक्षक मुकुल गिदवानी से जुड़े दो अलग-अलग वीडियो भी गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. इन वीडियो को लेकर ट्रांसपोर्टरों से पैसे मांगने के आरोप लगाए जा रहे हैं.

पहले वीडियो में ट्रांसपोर्टर गुरविन्दर सिंह की ओर से परिवहन निरीक्षक से बातचीत का हवाला दिया गया है. इसमें कथित तौर पर निरीक्षक मुकुल गिदवानी फोन पर सीजर यार्ड के कर्मचारी प्रकाश को 10 हजार रुपए देने की बात कहते सुनाई देते हैं.

वहीं, दूसरे वीडियो में निरीक्षक पर एक अन्य ट्रांसपोर्टर से 40 हजार रुपए मांगने का आरोप है. वीडियो में कथित तौर पर वे ट्रांसपोर्टर से कहते दिखाई देते हैं कि एक लाख रुपए का चालान हो सकता था, लेकिन उसे 40 हजार रुपए में छोड़ रहे हैं. इन वीडियो के सामने आने के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय जांच का परिणाम सामने आना बाकी है.

पांच साल से बिना वेतन काम करने का भी आरोप
मुकुल गिदवानी से जुड़े मामले में एक अन्य आरोप यह भी है कि वे पिछले पांच वर्षों से परिवहन विभाग में बिना वेतन लिए काम कर रहे हैं. इस दावे को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर कोई निरीक्षक इतने लंबे समय तक बिना वेतन के विभाग में कैसे कार्य कर सकता है.

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में भी विभाग की ओर से जांच या अन्य कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में निरीक्षक की सेवा और वेतन से जुड़े रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है.

परिवहन विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
एक तरफ चालान की लोकेशन में अंतर और गलत वाहन नंबर के आधार पर जुर्माना लगाने के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ ट्रांसपोर्टरों से पैसे मांगने के कथित वीडियो भी चर्चा में हैं. इसके अलावा बिना वेतन काम करने का मामला भी सवाल खड़े कर रहा है.

इन सभी मामलों में अब तक सामने आई जानकारी के आधार पर परिवहन विभाग की जांच और जवाबदेही अहम हो गई है. खास तौर पर यह देखना होगा कि विभाग वायरल वीडियो, चालान के रिकॉर्ड और मानवाधिकार आयोग से जुड़े प्रकरण की जांच कब शुरू करता है. फिलहाल, आरोपों पर विभागीय जांच के निष्कर्ष और संबंधित निरीक्षक का पक्ष सामने आना बाकी है.
 

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जी राजस्थान में स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में कार्यरत काशीराम चौधरी पत्रकारिता के क्षेत्र में विगत 21 वर्षों से सक्रिय हैं. जी मीडिया में वे ट्रांसपोर्ट विषय से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से कवर करते हैं. बात चाहे सड़क परिवहन की हो, फ्लाइट मूवमेंट की या फिर रेलवे परिवहन, सभी क्षेत्रों में काशीराम सक्रिय रूप से न्यूज कवर करते रहे हैं. काशीराम कृषि और पशुपालन से जुड़ी खबरों पर भी गहरी पकड़ रखते हैं. किसानों की जमीनी हकीकत दिखाने के साथ ही कृषि विपणन मंडियों की भी रिपोर्टिंग करते रहे हैं. साथ ही वे आबकारी और माइंस सेक्टर की खबरों को भी दर्शकों तक पहुंचाते हैं. काशीराम जी मीडिया समूह से पहले राजस्थान पत्रिका, डीएनए, ईटीवी राजस्थान, फर्स्ट इंडिया न्यूज में भी कार्य कर चुके हैं.
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