Jaipur News: जयपुर मेट्रो के फेज-1C प्रोजेक्ट के तहत भूमिगत सुरंग बनाने का काम शनिवार, 10 अक्टूबर से शुरू होगा. इसके लिए गलता गेट के पास दिल्ली रोड स्थित गलता जी मेट्रो स्टेशन साइट पर टीबीएम (TBM) ‘प्रताप’ का शुभारंभ किया जाएगा. कार्यक्रम दोपहर 12 बजे मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की मौजूदगी में होगा. इस परियोजना के पूरा होने से परकोटे और दिल्ली रोड के बीच सीधी कनेक्टिविटी विकसित होगी. इससे शहर में यातायात व्यवस्था बेहतर होने और लोगों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद है.
बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक होगा मेट्रो का विस्तार
जयपुर मेट्रो के फेज-1C में बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक मेट्रो नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है. इस परियोजना में भूमिगत सुरंग के साथ भूमिगत और एलिवेटेड स्टेशनों का निर्माण भी शामिल है. मेट्रो कॉर्पोरेशन के अनुसार, सुरंग बनाने के लिए टीबीएम ‘प्रताप’ का इस्तेमाल किया जाएगा. इसका उद्देश्य शहर में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना और मेट्रो की पहुंच को अधिक लोगों तक पहुंचाना है.
क्या है टीबीएम ‘प्रताप’?
टीबीएम का पूरा नाम टनल बोरिंग मशीन (Tunnel Boring Machine) है. यह जमीन के नीचे सुरंग बनाने वाली एक विशाल और शक्तिशाली मशीन होती है. इसकी मदद से कठोर चट्टानों और मिट्टी को काटकर सुरंग तैयार की जाती है. सामान्य ड्रिलिंग मशीन की तुलना में टीबीएम अधिक बड़े स्तर पर काम करती है. यह खुदाई करने के साथ निकले हुए मलबे को बाहर पहुंचाने और सुरंग की दीवारों को मजबूत बनाने में भी मदद करती है.
महाराणा प्रताप के नाम पर रखा गया नाम
इस मशीन का नाम महाराणा प्रताप के पराक्रम और कभी हार न मानने वाले जज्बे को ध्यान में रखकर ‘प्रताप’ रखा गया है. मशीन की ताकत और कठिन परिस्थितियों में लगातार काम करने की क्षमता की तुलना महाराणा प्रताप के साहस से की गई है.
चार चरणों में सुरंग बनाती है टीबीएम
1. मिट्टी और चट्टानों की कटाई: मशीन के आगे लगा गोलाकार कटरहेड घूमता है. इसमें लगे विशेष कटर जमीन और चट्टानों को काटते हैं.
2. मलबे को बाहर निकालना: खुदाई से निकली मिट्टी और पत्थरों को कन्वेयर बेल्ट या विशेष व्यवस्था के जरिए बाहर पहुंचाया जाता है.
3. मशीन आगे बढ़ती है: हाइड्रोलिक सिस्टम की मदद से मशीन धीरे-धीरे आगे बढ़ती रहती है और सुरंग का रास्ता बनाती है.
4. दीवारों को मजबूती देना: मशीन के पीछे कंक्रीट के पहले से तैयार हिस्से लगाए जाते हैं. इससे सुरंग की दीवारों को सहारा और मजबूती मिलती है.
जयपुर मेट्रो फेज-1C से बदलेगी शहर की कनेक्टिविटी
जयपुर मेट्रो के फेज-1C प्रोजेक्ट के पूरा होने से शहर के पुराने और नए इलाकों के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है. बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक मेट्रो का विस्तार होने से यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी.
3.8 किलोमीटर लंबा होगा मेट्रो रूट
इस परियोजना के तहत बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक करीब 3.8 किलोमीटर लंबा मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाएगा. इसमें गलता गेट के पास एक भूमिगत मेट्रो स्टेशन और ट्रांसपोर्ट नगर में एक एलिवेटेड स्टेशन का निर्माण किया जाएगा.
टीबीएम ‘प्रताप’ से बनेगी भूमिगत सुरंग
इस रूट पर भूमिगत सुरंग बनाने का काम टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) ‘प्रताप’ की मदद से किया जा रहा है. यह विशाल मशीन जमीन और चट्टानों की खुदाई करके सुरंग तैयार करेगी. इससे भूमिगत मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण को आगे बढ़ाया जाएगा.
ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद
फेज-1C के शुरू होने से परकोटे से दिल्ली रोड और ट्रांसपोर्ट नगर की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है. मेट्रो कनेक्टिविटी बढ़ने से लोगों को आवागमन के लिए एक और विकल्प मिलेगा. इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने और ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत दिलाने में मदद मिल सकती है.
अप्रैल 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य
जयपुर मेट्रो फेज-1C परियोजना को अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके पूरा होने के बाद शहर में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार होगा और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है.