जयपुर : नूरानी मस्जिद-मदरसा तोड़ने पर जेडीए से HC ने मांगा जवाब पूछा - याचिकाकर्ता को पक्ष रखने का मौका क्यों नहीं दिया ?
Jaipur News : नूरानी मस्जिद-मदरसा तोड़ने पर जेडीए से HC जवाब मांगा है और पूछा है कि कार्रवाई से पहले याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का मौका क्यों नहीं दिया गया
Jaipur News : राजस्थान हाईकोर्ट ने जेडीए आयुक्त,जोन-7 के उपायुक्त और प्रवर्तन अधिकारी को नोटिस जारी कर पूछा है, कि मालवीय नगर स्थित नूरानी मस्जिद-मदरसा तोड़ने से पहले याचिकाकर्ता को पक्ष रखने का मौका क्यों नहीं दिया गया ? जस्टिस मनीष शर्मा की एकलपीठ ने ये आदेश राजस्थान मुस्लिम वक्फ बोर्ड की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए.
याचिका में अधिवक्ता नकवी सेहबान नजीब ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता बोर्ड के स्वामित्व में मालवीय नगर के अशोक विहार में एक वक्फ संपत्ति है. जिसे नूरानी मस्जिद एवं मदरसा के नाम से जाना जाता है. इसका निर्माण साल 1981 में किया गया था और तब से यहां मुस्लिम समुदाय के नमाज सहित अन्य धार्मिक प्रयोजन होते आ रहे हैं.
याचिकाकर्ता को 8 जून को पता चला कि जयपुर विकास प्राधिकरण ने इस मस्जिद - मदरसा को अल-सुबह ध्वस्त कर दिया है. याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता को जेडीए की ओर से कार्रवाई करने से पूर्व कोई नोटिस नहीं दिया गया. जिससे उसे सुनवाई का मौका भी नहीं मिला. याचिका में कहा गया कि जेडीए की ओर से 5 जून को धारा 72 के तहत एक नोटिस जारी किया जाना बताया जा रहा है, लेकिन याचिकाकर्ता को ये नोटिस प्राप्त ही नहीं हुआ. इसके अलावा इस कथित नोटिस को भी शुक्रवार को जारी कर शनिवार को जवाब मांगा गया. अगर याचिकाकर्ता को ये मिलता तो भी वो शनिवार को अवकाश होने के चलते जवाब नहीं दे पाता. ऐसे में जेडीए की ये कार्रवाई गलत है. इसलिए जेडीए की इस कार्रवाई को अवैध घोषित किया जाए. जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने जेडीए के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.
नूरानी मस्जिद को कब गिराया गया ?
जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने मालवीय नगर (नंदपुरी) में स्थित नूरानी मस्जिद को 8 जून 2026 की सुबह कार्रवाई करते हुए ध्वस्त कर दिया गया था.
नूरानी मस्जिद को गिराने पर जेडीए का क्या तर्क था ?
जेडीए का ये तर्क था कि ये धार्मिक ढांचा और अन्य अतिक्रमण सड़क चौड़ीकरण परियोजना (विशेषकर 'ऑपरेशन 80 फीट') के मार्ग की सीमा (आरक्षण सीमा) के दायरे में आ रहे थे. प्रशासन का कहना था कि इस सड़क मार्ग के विस्तार और ट्रैफिक को ठीक करने के लिए इसे हटाना जनहित में जरूरी था.
नूरानी मस्जिद को गिराने पर क्या बोले थे मस्जिद कमेटी के लोग ?
मस्जिद कमेटी का कहना था कि ये मस्जिद करीब 44-45 साल पुरानी (1981 में निर्मित)वक्फ संपत्ति थी. और प्रशासन ने बिना किसी उचित या पर्याप्त पूर्व सूचना के अचानक और जल्दबाजी में ये कार्रवाई की. कमेटी का दावा था, कि इसके निर्माण से लेकर कभी इसे आधिकारिक रूप से अवैध नहीं बताया गया था और कार्रवाई से पहले पक्ष रखने का उचित मौका भी नहीं दिया गया.
आपको बता दें कि जेडीए के चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत करीब 143 चिन्हित संपत्तियों को नोटिस जारी किए थे. इसके पहले चरण में 22 मई को 134 रिहायशी मकानों जो अवैध निर्माण थे को ध्वस्त किया गया था. जेडीए का पक्ष था कि जगतपुरा से जवाहर सर्कल तक जाने वाली सड़क को 30 फीट से बढ़ाकर 80 फीट चौड़ा किया जाना है,जिससे भारी ट्रैफिक जाम से निजात मिल सके. इस रोड सीमा में आने वाले सभी प्रकार के अवैध निर्माण और अतिक्रमण (चाहे वे रिहायशी हों या धार्मिक) को हटाया गया है. जिसके बाद नूरानी मस्जिद के साथ-साथ कुछ और धार्मिक ढांचों जिनमें एक मजार, दो छोटे मंदिर और एक सत्संग भवन भी शामिल थे को 8 जून 2026 को हटाया गया था.