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जयपुर के टोंक रोड स्थित प्रसिद्ध केसर स्वीट्स के खिलाफ खाद्य आयुक्तालय ने कार्रवाई करते हुए प्रतिष्ठान का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है. यह कार्रवाई काजू कतली के सैंपल की जांच रिपोर्ट में अनसेफ पाए जाने के बाद की गई है. खाद्य सुरक्षा से जुड़े इस मामले में CMHO सेकंड डॉ. मनीष मित्तल ने लाइसेंस निलंबित किया है.
यह प्रतिष्ठान M/s The Divine Taste Pvt. Ltd. (Kesar) के नाम से संचालित है. जांच के दौरान यहां की काजू कतली के नमूने में टार्टाजीन रंग पाया गया. स्टेट सेंट्रल पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी की रिपोर्ट में इस रंग को नॉन-परमिटेड कलर बताया गया, जिसके आधार पर सैंपल को अनसेफ घोषित किया गया.
जांच रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर नमूनों की जांच की जाती है. केसर स्वीट्स की काजू कतली के मामले में प्रयोगशाला की रिपोर्ट सामने आने के बाद लाइसेंस सस्पेंड करने की कार्रवाई की गई है.
इस मामले में कार्रवाई के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, काजू कतली का सैंपल अनसेफ मिलने के बावजूद करीब डेढ़ महीने तक प्रतिष्ठान का लाइसेंस जारी रहा. ऐसे में लूज फूड आइटम का नमूना अनसेफ पाए जाने पर तत्काल लाइसेंस सस्पेंड करने के नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं.
क्या है टार्टाजीन रंग?
टार्टाजीन (INS 102) एक सिंथेटिक एज़ो डाई है. इसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों और मिठाइयों को पीला या केसरिया रंग देने के लिए किया जाता है. हालांकि, खाद्य पदार्थों में किसी रंग का इस्तेमाल उसकी निर्धारित अनुमति और लागू खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार ही किया जा सकता है. संबंधित जांच रिपोर्ट में काजू कतली में मिले टार्टाजीन को नॉन-परमिटेड कलर बताया गया है.
सेहत पर क्या हो सकता है असर?
टार्टाजीन के प्रति संवेदनशील लोगों में एलर्जी संबंधी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में त्वचा पर लाल चकत्ते, पित्ती और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. अस्थमा से पीड़ित या एलर्जी के प्रति संवेदनशील लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है.
खाद्य रंगों के इस्तेमाल में निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी है. किसी पदार्थ के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव उसकी मात्रा, सेवन की अवधि और व्यक्ति की संवेदनशीलता पर निर्भर करते हैं. इसलिए खाद्य पदार्थों में अनधिकृत रंगों का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है.