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Jaipur News: जयपुर के गोविंद देवजी मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा इंतजामों को लेकर सख्ती दिखाई है. 25 अगस्त को मंदिर परिसर में संभावित भारी भीड़ और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल कराई गई थी. इस दौरान अग्निशमन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी कई व्यवस्थाओं में कमियां सामने आईं. इसके बाद जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मंदिर प्रबंधन को नोटिस जारी कर व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं.
पंप हाउस में पानी भरा मिला, हाइड्रेंट भी बंद
सहायक अग्निशमन अधिकारी, नगर निगम जयपुर की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर छह प्रमुख कमियां चिन्हित की गई हैं. निरीक्षण के दौरान मंदिर के पंप हाउस में पानी भरा मिला. वहीं हाइड्रेंट और होज रील भी चालू हालत में नहीं पाए गए. आग लगने की स्थिति में ये उपकरण तत्काल बचाव कार्य के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, इसलिए इनका तैयार हालत में नहीं मिलना गंभीर माना गया है.
फायर अलार्म और अग्निशमन यंत्रों में भी खामी
मंदिर में लगाए गए तीन Manual Call Point यानी MCP में से एक काम नहीं कर रहा था. इसके अलावा परिसर में मौजूद अग्निशमन यंत्र भी चालू स्थिति में नहीं पाए गए. मॉक ड्रिल में सामने आई इन कमियों से यह स्पष्ट हुआ कि आपात स्थिति के दौरान आग से निपटने के लिए उपलब्ध संसाधनों को पूरी तरह तैयार करने की जरूरत है.
इमरजेंसी एग्जिट और रूट के साइनेज नहीं मिले
निरीक्षण में केवल फायर सेफ्टी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षित निकासी से जुड़ी तैयारियों में भी कमी मिली. मंदिर परिसर में Emergency Exit, Emergency Route और Fire Equipment की जानकारी देने वाले जरूरी साइनेज मौजूद नहीं थे. इसके अलावा आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को एकत्र करने के लिए कोई Assembly Point निर्धारित या चिह्नित नहीं मिला.
भीड़ के बीच खतरे को लेकर प्रशासन गंभीर
प्रशासन का मानना है कि जन्माष्टमी जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में भारी भीड़ के दौरान आग या भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर ये कमियां जान-माल के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं. इसी वजह से मंदिर प्रबंधन को सभी व्यवस्थाओं को आयोजन से पहले दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं.
सभी व्यवस्थाएं ठीक करने के निर्देश
प्रशासन ने पंप हाउस से पानी निकालकर उसकी सफाई कराने और पर्याप्त पानी उपलब्ध रखने को कहा है. सभी हाइड्रेंट और होज रील को चालू करने, खराब MCP को ठीक या बदलने तथा पूरे फायर अलार्म सिस्टम को कार्यशील रखने के निर्देश दिए गए हैं. अग्निशमन यंत्रों की जांच, सर्विसिंग और रिफिलिंग कराने के साथ जरूरी इमरजेंसी साइनेज लगाने और Assembly Point तय करने को भी कहा गया है.
कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों को ट्रेनिंग जरूरी
आपातकालीन निकासी के रास्तों को हमेशा अवरोधमुक्त रखने और प्रभावी भीड़ नियंत्रण व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं. मंदिर कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और अन्य संबंधित कार्मिकों को फायर उपकरण चलाने तथा आपदा की स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रशिक्षण देने को कहा गया है. जन्माष्टमी के दौरान पुलिस, अग्निशमन, चिकित्सा और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
फोटो और प्रमाण के साथ देनी होगी रिपोर्ट
मंदिर प्रबंधन को किए गए सुधार कार्यों की बिंदुवार अनुपालन रिपोर्ट प्रशासन को सौंपनी होगी. इसके साथ कार्रवाई के प्रमाण और फोटो भी उपलब्ध कराने होंगे. आयोजन से पहले महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं से जुड़े लोगों, तैनात कर्मचारियों और स्वयंसेवकों की सूची भी प्रशासन को देनी होगी.
नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई की चेतावनी
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने यह नोटिस आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 30, 33 और 41 के तहत जारी किया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय समय में कमियां दूर नहीं की गईं या आपदा प्रबंधन संबंधी निर्देशों की अवहेलना पाई गई तो अधिनियम के तहत आवश्यक अग्रिम कार्रवाई की जाएगी.
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