Jaipur News: जयपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का गंभीर मामला सामने आया है. ठगों ने पुलिस, ATS, NIA और RBI के अधिकारी बनकर एक बुजुर्ग दंपती को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का डर दिखाया. गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर आरोपियों ने दंपती से 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली. पुलिस ने मामले में बाड़मेर निवासी तगाराम को गिरफ्तार किया है. इस प्रकरण में अब तक कुल चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
फोन कॉल से शुरू हुआ ठगी का खेल
पुलिस के मुताबिक, 17 अगस्त 2026 को जयपुर निवासी बुजुर्ग महिला के पास एक फोन आया. कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ है. इसके बाद कथित ATS अधिकारियों के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया गया. ठगों ने दंपती पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग करने वालों की सूची में शामिल होने का आरोप लगाया. उन्हें बताया गया कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल संदिग्ध लेन-देन के लिए किया जा रहा है. इस तरह आरोपियों ने दंपती को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर अपने जाल में फंसा लिया.
फर्जी दस्तावेज भेजकर बनाया दबाव
आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस, ATS, NIA, RBI, भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के नाम का दुरुपयोग किया. दंपती का भरोसा जीतने और डर बढ़ाने के लिए WhatsApp पर फर्जी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट और बैंकिंग प्रमाण-पत्र भेजे गए. इसके बाद बुजुर्ग दंपती को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया गया. ठगों ने निगरानी और गिरफ्तारी का भय दिखाकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करवाए. 11 सितंबर को शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.
बैंक खातों की जांच में सामने आया आरोपी का नाम
जांच के दौरान पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, WhatsApp चैट, बैंक स्टेटमेंट और KYC दस्तावेजों का विश्लेषण किया. इस पड़ताल में बाड़मेर निवासी तगाराम के बैंक खाते में ठगी की रकम पहुंचने की जानकारी मिली. पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने परिचित के कहने पर भारतीय स्टेट बैंक की सिणधरी शाखा में स्थित अपना खाता उपलब्ध कराया था. 20 अगस्त को इस खाते में 2 लाख रुपये आए. आरोप है कि तगाराम ने 1 लाख 90 हजार रुपये चेक के जरिए और 10 हजार रुपये ATM से निकाले. इसके बाद उसने पूरी रकम दूसरे आरोपी को सौंप दी. इस काम के बदले उसे 10 हजार रुपये कमीशन मिलने की बात सामने आई है.
पुलिस का कहना है कि आरोपी ने बैंक ऑफ इंडिया में मौजूद अपना एक अन्य खाता भी उपलब्ध कराया था. अब जांच एजेंसियां पैसों के आगे के लेन-देन और साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगा रही हैं.
डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए क्या करें?
राजस्थान पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, ATS, NIA या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाता है और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाता है, तो उसकी बातों में न आएं.
ध्यान रखें कि सरकारी एजेंसियां WhatsApp वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट करके पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश नहीं देतीं. किसी अनजान व्यक्ति को बैंक खाता, ATM कार्ड, चेकबुक या गोपनीय बैंकिंग जानकारी न दें.
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी की कोशिश होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें. इसके अलावा सरकारी पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी साइबर अपराध की रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है. फिलहाल पुलिस मामले में पैसों के लेन-देन की कड़ियां जोड़ने और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है.