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Rajasthan Mayor Election: हनुमानगढ़ नगर परिषद चुनाव के बाद निर्दलीय पार्षदों का जत्था सोमवार सुबह हनुमानगढ़ पहुंच गया. सभी पार्षद सुबह करीब 5 बजे रेलगाड़ी से हनुमानगढ़ रेलवे स्टेशन पर उतरे. इस दौरान स्टेशन पर बड़ी संख्या में उनके समर्थक पहले से मौजूद थे. पार्षदों के पहुंचते ही समर्थकों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया. भीड़ और तनाव के बीच समर्थकों की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए.
आंखों में आंसू, जनता से मांगा सहयोग
हनुमानगढ़ पहुंचने के दौरान निर्दलीय पार्षद भावुक नजर आए. आंखों में आंसू लिए उन्होंने जनता से सहयोग की अपील की. इस दौरान पूर्व सभापति सुमित रणवां ने भी जनता से खुलकर साथ देने की गुहार लगाई. उन्होंने कहा कि निर्दलीय पार्षदों को वोटिंग का अधिकार मिलना चाहिए. रणवां ने यह भी कहा कि अब इस काम में जनता को सहयोग करना होगा.
चुनाव से पहले गरमा चुका है माहौल
हनुमानगढ़ और संगरिया क्षेत्र में नगरपालिका अध्यक्ष और नगर परिषद से जुड़े चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल गरमा चुका है. पार्षदों और उनके परिजनों की तलाश में पुलिस कार्रवाई और उनके घरों व प्रतिष्ठानों पर दबिश की बात सामने आई थी. इसके बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले.
संगरिया में नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव से पहले कांग्रेस पार्षदों को एकजुट रखने के लिए पंजाब में ठहराए जाने की बात सामने आई थी. इसी दौरान पार्षदों की तलाश में पुलिस के पहुंचने पर स्थानीय विधायकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक तथा विरोध प्रदर्शन हुआ.
थाने का घेराव और प्रदर्शन
विधायक गणेशराज बंसल के समर्थकों और पार्षदों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया था. उनका आरोप था कि पुलिस कार्रवाई के जरिए राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. इसके विरोध में जंक्शन थाने का घेराव किया गया और प्रदर्शन भी हुआ.
हाईकोर्ट से मिली राहत
मामला राजस्थान हाईकोर्ट तक भी पहुंचा. कोर्ट ने पार्षदों और याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया के कोई दंडात्मक या सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी. ऐसे में अब हनुमानगढ़ पहुंचे निर्दलीय पार्षदों और उनके समर्थकों की गतिविधियों पर शहर की नजर बनी हुई है. उनके पहुंचने के बाद नगर परिषद की राजनीति में आगे की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
राजनीतिक तनाव के बीच कुछ पार्षदों को मतदान से रोकने या दबाव बनाने की आशंका जताई गई थी। राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना कानूनी प्रक्रिया के कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी और पार्षद नियमानुसार अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे।