रक्षाबंधन के पर्व पर शेखावत ने याद किया खेजड़ली बलिदान, बोले- इस रक्षाबंधन प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का लें संकल्प
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन के अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देशवासियों और बहनों को शुभकामनाएं दीं. इस दौरान शेखावत ने राजस्थान के खेजड़ली बलिदान और अमृता देवी सहित 363 लोगों के पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए बलिदान को याद करते हुए इस रक्षाबंधन प्रकृति, पेड़-पौधों, जल और मिट्टी की रक्षा का संकल्प लेने की अपील की.
Raksha Bandhan 2026: केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर देशवासियों और सभी बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. उन्होंने रक्षाबंधन के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में रक्षा सूत्र केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह सुरक्षा, सहयोग, विश्वास और जिम्मेदारी के संकल्प का प्रतीक रहा है.
रक्षा सूत्र भारतीय संस्कृति में सुरक्षा और जिम्मेदारी का प्रतीक
शेखावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जिस किसी की रक्षा और सुरक्षा की कामना की जाती है, उसे रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा रही है. प्रकृति, पर्यावरण, माता-पिता, गुरु, गौ माता सहित जीवन और प्रकृति से जुड़े विभिन्न घटकों के प्रति संरक्षण और जिम्मेदारी का भाव हमारी संस्कृति में सदैव रहा है. रक्षाबंधन का पर्व हमें अपनी बहनों की रक्षा का भरोसा और विश्वास दिलाने के साथ-साथ प्रकृति एवं पर्यावरण की सुरक्षा के लिए संकल्प लेने का अवसर भी देता है.
उन्होंने आगे कहा कि भारत के समृद्ध त्योहारों की परंपरा में रक्षाबंधन ऐसा पर्व है, जो हमें अपने सामाजिक दायित्वों और जिम्मेदारियों से जोड़ता है. जब बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है, तो वह केवल भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक नहीं होता, बल्कि उसमें स्नेह, सौहार्द, सद्भाव, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का संस्कार भी निहित होता है.
राजस्थान की धरती ने पर्यावरण संरक्षण के लिए दी बलिदान की मिसाल
गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राजस्थान की गौरवशाली पर्यावरण संरक्षण परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान की धरती ने प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए बलिदान की अद्भुत मिसाल कायम की है. उन्होंने खेजड़ली बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि इसी धरती पर अमृता देवी के नेतृत्व में 363 लोगों ने वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था. खेजड़ली के इस ऐतिहासिक बलिदान की गाथा आज भी पूरी दुनिया को प्रकृति संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश देती है.
पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में खेजड़ली से प्रेरणा लेने की जरूरत
शेखावत ने कहा कि आज पूरी दुनिया पर्यावरण परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है. ऐसे समय में अमृता देवी और खेजड़ली के बलिदान से प्रेरणा लेकर प्रकृति के संरक्षण के लिए और अधिक गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना आज पूरी मानवता की जिम्मेदारी है. पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थाओं का दायित्व नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है.
इस रक्षाबंधन लें प्रकृति की रक्षा का संकल्प- गजेन्द्र सिंह शेखावत
केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने देशवासियों का आह्वान किया कि इस रक्षाबंधन प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लें तथा इसके संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करें. उन्होंने कहा कि रक्षा सूत्र की भावना को व्यापक बनाते हुए हमें पेड़-पौधों, जल, मिट्टी और समूचे प्राकृतिक परिवेश की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध होना चाहिए. शेखावत ने अंत में सभी बहनों और भाइयों को रक्षाबंधन की अपार बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से आगे आने का आह्वान किया.