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कीपैड मोबाइल, मनरेगा में मजदूरी, न पक्का मकान और न ही साइकिल... सिर्फ 2 किलो गुड़ बांटकर सरपंच बन गईं आशा देवी

राजस्थान के घाटोल की मोटा टांडा ग्राम पंचायत में आशा देवी ने सरपंच चुनाव में 455 वोटों से जीत दर्ज की. कभी मनरेगा और दिहाड़ी मजदूरी करने वाली आशा को 652 वोट मिले. उनके पास न बाइक है, न साइकिल और न स्मार्टफोन.

Reported By Ansh Raj Written By Ansh Raj
Published: Nov 03, 2026, 11:31 PM IST | Updated: Nov 03, 2026, 11:37 PM IST
Image Credit: Asha Devi
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राजस्थान के घाटोल की मोटा टांडा ग्राम पंचायत में सरपंच चुनाव का नतीजा एक ऐसी महिला के पक्ष में आया, जिनके पास चुनाव प्रचार के लिए न गाड़ियों का काफिला था और न ही बड़े संसाधन. कभी मनरेगा में मजदूरी करके तो कभी आसपास के गांवों में दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार चलाने वाली आशा देवी अब सरपंच की जिम्मेदारी संभालेंगी. कवेलू-पोश मकान में रहने वाली आशा के पास न मोटरसाइकिल है, न साइकिल और न ही स्मार्टफोन. वह कीपैड मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं. इसके बावजूद उन्होंने 455 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की.

आशा देवी के चुनाव प्रचार का तरीका भी चर्चा में रहा. जहां चुनाव में कई प्रत्याशी गाड़ियों और दूसरे संसाधनों के साथ प्रचार करते हैं, वहीं आशा देवी ने गांव के लोगों को महज दो किलो गुड़ बांटा. इसके बावजूद मतदाताओं का उन्हें अच्छा समर्थन मिला. चुनाव में आशा देवी को कुल 652 वोट मिले, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी डिम्पी को 197 वोट मिले. इस तरह आशा देवी ने 455 मतों के अंतर से जीत दर्ज की.

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छह प्रत्याशियों के बीच हुआ मुकाबला

मोटा टांडा ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए कुल छह प्रत्याशी मैदान में थे. मतगणना में आशा देवी को सबसे ज्यादा 652 वोट मिले. वहीं डिम्पी को 197, भावना को 63, सुनीता को 45, गंगा राजेंग को 40 और गंगा देवी को 19 वोट मिले. इस तरह आशा देवी ने सभी पांच प्रत्याशियों को पीछे छोड़ते हुए सरपंच पद पर जीत हासिल की.

मनरेगा और दिहाड़ी मजदूरी से चलाती थीं परिवार

आशा देवी की कहानी उनके चुनावी नतीजे से भी ज्यादा चर्चा में है. वह पहले मनरेगा में मजदूरी करती थीं. इसके अलावा आसपास के गांवों में दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का गुजारा करती थीं. सीमित संसाधनों के बीच जीवन बिताने वाली आशा देवी ने सरपंच का चुनाव लड़ा और अब गांव की जिम्मेदारी संभालेंगी.

उनके पास न मोटरसाइकिल है, न साइकिल और न स्मार्टफोन. इसके बावजूद 455 वोटों के अंतर से मिली जीत ने उन्हें चर्चा में ला दिया है. मोटा टांडा में आशा देवी की जीत ग्रामीण चुनाव में एक अलग कहानी बनकर सामने आई है.

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अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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