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EWS में क्या बदलना चाहते हैं रविंद्र भाटी? क्यों निकले राजस्थान के गांव-गांव, जानिए पूरी कहानी

Ravindra Singh Bhati: शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की EWS सरलीकरण जन-संवाद यात्रा को सिरोही में बड़ा समर्थन मिला. यात्रा के दौरान हजारों लोग जनसभा में पहुंचे और भाटी का ऊंट पर स्वागत किया गया.

Written By Ansh Raj
Published: Sep 28, 2026, 10:54 AM IST | Updated: Sep 28, 2026, 11:01 AM IST
Image Credit: Ravindra Singh Bhati
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Rajasthan News: शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की EWS सरलीकरण जन-संवाद यात्रा इन दिनों चर्चा में है. पंचायती राज चुनावों से पहले शुरू किए गए इस अभियान के जरिए भाटी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण व्यवस्था में मौजूद व्यावहारिक दिक्कतों और नियमों को सरल बनाने की मांग उठा रहे हैं.


बाड़मेर से शुरू हुई यात्रा के दौरान वे अलग-अलग इलाकों में युवाओं, ग्रामीणों और किसानों से संवाद कर EWS प्रमाण-पत्र बनवाने और आरक्षण का लाभ लेने में आने वाली परेशानियों की जानकारी ले रहे हैं.


सिरोही में हजारों की भीड़, ऊंट पर हुआ स्वागत
रविवार को EWS सरलीकरण यात्रा के तहत रविंद्र सिंह भाटी सिरोही पहुंचे. राव सुरताण शिक्षण संस्थान में आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. इस दौरान भाटी का ऊंट पर बैठाकर स्वागत किया गया. सभा में उन्होंने EWS आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों और प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें सामने रखीं. रेवदर में भी उन्होंने युवाओं से संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने.


क्या है EWS सरलीकरण यात्रा?
भाटी की यह यात्रा EWS आरक्षण व्यवस्था को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाने की मांग को लेकर निकाली जा रही है. उनका कहना है कि केवल जमीन के आकार को आर्थिक स्थिति का आधार नहीं माना जाना चाहिए. जमीन की उत्पादकता, सिंचाई की सुविधा, स्थानीय जमीन की कीमत और उससे होने वाली वास्तविक आर्थिक उपयोगिता को भी पात्रता तय करने में ध्यान में रखा जाना चाहिए.


EWS आरक्षण पर क्या हैं प्रमुख मांगें?
भाटी की प्रमुख मांगों में EWS पात्रता से जुड़ी कृषि भूमि की शर्तों में बदलाव, अभ्यर्थियों को आयु सीमा और आवेदन शुल्क में उचित राहत तथा आय निर्धारण की प्रक्रिया को सरल करना शामिल है. खास तौर पर विवाहित महिलाओं के दस्तावेज और आय से जुड़े नियमों को आसान बनाने की मांग भी उठाई जा रही है.


क्या है EWS सर्टिफिकेट का मामला?
EWS प्रमाण-पत्र की वैधता फिलहाल एक साल होने के कारण अभ्यर्थियों को बार-बार नया प्रमाण-पत्र बनवाने की जरूरत पड़ती है. भाटी इसकी वैधता बढ़ाकर तीन या पांच साल करने की मांग कर रहे हैं. साथ ही उनका कहना है कि राज्य सरकार द्वारा जारी और सत्यापित EWS प्रमाण-पत्र को केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी मान्यता मिलनी चाहिए. इससे अभ्यर्थियों को अलग-अलग स्तर पर प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया से राहत मिल सकती है.


भाटी का कहना है कि यह अभियान किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि EWS श्रेणी के वास्तविक पात्र लोगों को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए नियमों को सरल बनाने की मांग है. अब उनकी यात्रा के दौरान अलग-अलग जिलों में युवाओं और ग्रामीणों से संवाद कर इन मुद्दों को आगे उठाया जा रहा है.

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About the Author

अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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