EWS में क्या बदलना चाहते हैं रविंद्र भाटी? क्यों निकले राजस्थान के गांव-गांव, जानिए पूरी कहानी
Ravindra Singh Bhati: शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की EWS सरलीकरण जन-संवाद यात्रा को सिरोही में बड़ा समर्थन मिला. यात्रा के दौरान हजारों लोग जनसभा में पहुंचे और भाटी का ऊंट पर स्वागत किया गया.
Rajasthan News: शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की EWS सरलीकरण जन-संवाद यात्रा इन दिनों चर्चा में है. पंचायती राज चुनावों से पहले शुरू किए गए इस अभियान के जरिए भाटी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण व्यवस्था में मौजूद व्यावहारिक दिक्कतों और नियमों को सरल बनाने की मांग उठा रहे हैं.
बाड़मेर से शुरू हुई यात्रा के दौरान वे अलग-अलग इलाकों में युवाओं, ग्रामीणों और किसानों से संवाद कर EWS प्रमाण-पत्र बनवाने और आरक्षण का लाभ लेने में आने वाली परेशानियों की जानकारी ले रहे हैं.
सिरोही में हजारों की भीड़, ऊंट पर हुआ स्वागत
रविवार को EWS सरलीकरण यात्रा के तहत रविंद्र सिंह भाटी सिरोही पहुंचे. राव सुरताण शिक्षण संस्थान में आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. इस दौरान भाटी का ऊंट पर बैठाकर स्वागत किया गया. सभा में उन्होंने EWS आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों और प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें सामने रखीं. रेवदर में भी उन्होंने युवाओं से संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने.
क्या है EWS सरलीकरण यात्रा?
भाटी की यह यात्रा EWS आरक्षण व्यवस्था को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाने की मांग को लेकर निकाली जा रही है. उनका कहना है कि केवल जमीन के आकार को आर्थिक स्थिति का आधार नहीं माना जाना चाहिए. जमीन की उत्पादकता, सिंचाई की सुविधा, स्थानीय जमीन की कीमत और उससे होने वाली वास्तविक आर्थिक उपयोगिता को भी पात्रता तय करने में ध्यान में रखा जाना चाहिए.
EWS आरक्षण पर क्या हैं प्रमुख मांगें?
भाटी की प्रमुख मांगों में EWS पात्रता से जुड़ी कृषि भूमि की शर्तों में बदलाव, अभ्यर्थियों को आयु सीमा और आवेदन शुल्क में उचित राहत तथा आय निर्धारण की प्रक्रिया को सरल करना शामिल है. खास तौर पर विवाहित महिलाओं के दस्तावेज और आय से जुड़े नियमों को आसान बनाने की मांग भी उठाई जा रही है.
क्या है EWS सर्टिफिकेट का मामला?
EWS प्रमाण-पत्र की वैधता फिलहाल एक साल होने के कारण अभ्यर्थियों को बार-बार नया प्रमाण-पत्र बनवाने की जरूरत पड़ती है. भाटी इसकी वैधता बढ़ाकर तीन या पांच साल करने की मांग कर रहे हैं. साथ ही उनका कहना है कि राज्य सरकार द्वारा जारी और सत्यापित EWS प्रमाण-पत्र को केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी मान्यता मिलनी चाहिए. इससे अभ्यर्थियों को अलग-अलग स्तर पर प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया से राहत मिल सकती है.
भाटी का कहना है कि यह अभियान किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि EWS श्रेणी के वास्तविक पात्र लोगों को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए नियमों को सरल बनाने की मांग है. अब उनकी यात्रा के दौरान अलग-अलग जिलों में युवाओं और ग्रामीणों से संवाद कर इन मुद्दों को आगे उठाया जा रहा है.