राजस्थान के माउंट आबू में स्थित दिलवाड़ा जैन मंदिर अपनी खूबसूरत नक्काशी, ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक महत्व के लिए देशभर में मशहूर है. राजस्थान पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 14 प्रमुख जैन मंदिरों और तीर्थस्थलों पर 28 लाख 79 हजार 241 घरेलू पर्यटक पहुंचे. इनमें दिलवाड़ा जैन मंदिर सबसे आगे रहा. यहां छह महीने में 11 लाख 44 हजार से ज्यादा घरेलू पर्यटकों ने भ्रमण किया. मंदिर की खास बात यह है कि संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी इसे देखने आने वाले लोगों को आकर्षित करती है.
संगमरमर पर ऐसी नक्काशी, जिसे देखकर ठहर जाती है नजर
दिलवाड़ा जैन मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी संगमरमर की कारीगरी है. मंदिर के खंभों, छतों, दरवाजों और दीवारों पर बेहद बारीक नक्काशी की गई है. फूलों, पत्तियों, देवी-देवताओं और धार्मिक आकृतियों को पत्थर पर इस तरह उकेरा गया है कि कई जगह संगमरमर भी कपड़े जैसा हल्का दिखाई देता है. मंदिर परिसर में अलग-अलग मंदिर हैं, जिनकी बनावट और कलाकारी अपनी अलग पहचान रखती है.
11वीं से 13वीं सदी के बीच बने मंदिर
दिलवाड़ा मंदिर समूह का निर्माण मुख्य रूप से 11वीं से 13वीं सदी के बीच हुआ. यहां पांच प्रमुख जैन मंदिर हैं, जो जैन तीर्थंकरों को समर्पित हैं. इनमें विमल वसाही और लूण वसाही विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं. विमल वसाही मंदिर प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को समर्पित है, जबकि लूण वसाही मंदिर 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ को समर्पित है. इन मंदिरों की बनावट उस दौर के कारीगरों की कला और मेहनत को दिखाती है.
धार्मिक आस्था के साथ इतिहास और कला का केंद्र
दिलवाड़ा जैन मंदिर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है. यहां श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं, जबकि इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले पर्यटक इसकी कलाकारी देखने पहुंचते हैं. मंदिर की शांति और संगमरमर की भव्यता इसे माउंट आबू के प्रमुख आकर्षणों में शामिल करती है.
राजस्थान के दूसरे जैन तीर्थ भी आकर्षण का केंद्र
राजस्थान में जैन धर्म से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थल हैं. अजमेर की सोनीजी की नसियां, बीकानेर का भांडाशाह जैन मंदिर, खैरथल-तिजारा का तिजारा जैन मंदिर और बांसवाड़ा का आंदेश्वर जैन तीर्थ इनमें शामिल हैं. झालावाड़ जिले के चांदखेड़ी और उन्हेल, भीलवाड़ा का जहाजपुर जैन मंदिर और उदयपुर जिले का ऋषभदेव तीर्थ भी धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाने जाते हैं. इन सभी स्थलों की मौजूदगी राजस्थान को जैन संस्कृति और स्थापत्य कला के लिहाज से खास बनाती है.