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कूनो से 100 किमी दूर धौलपुर पहुंचा चीता ! सरमथुरा के जंगलों में खलबली

धौलपुर के सरमथुरा के रिछरा के नाले में चीता की झलक दिखी जिसके बाद से ट्रैकर्स की टीम निगरानी कर रही है. कूनो से 100 किमी का सफर तय करके ये चीता राजस्थान पहुंचा है.

Written By Zee Rajasthan Web Team
Published: Nov 06, 2026, 11:32 AM IST | Updated: Nov 06, 2026, 11:37 AM IST
Image Credit: dholpur cheetah movement kunoo national park
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धौलपुर के सरमथुरा के जंगलों में इन दिनों एक खास मेहमान की चर्चा जोरों पर है. मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर एक चीता ने करीब 100 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर धौलपुर टाइगर अभ्यारण्य की सीमा में दस्तक दे दी है. इस खबर के बाद से वन विभाग की टीमें पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई हैं.

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक चीते की लोकेशन धौलपुर अभ्यारण्य के रीक्षरा के नाले में ट्रेस हुई है. रेंजर देवेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि कूनो नेशनल पार्क का KGP-3 चीता मंडरायल रेंज होते हुए, धौलपुर की सीमा में दाखिल हुआ है. पिछले कई दिनों से इस चीते का मूवमेंट मंडरायल रेंज में बना हुआ था, जिसके बाद इसने सीधे रीक्षरा के नाले में शरण ली है.

बताया जा रहा है कि कूनो से निकलते ही कूनो नेशनल पार्क की विशेष ट्रैकर्स टीम सैटेलाइट कॉलर के जरिए लगातार इस चीते का पीछा कर रही थी. जैसे ही चीते ने राजस्थान की सीमा में प्रवेश किया, करौली जिले की मंडरायल रेंज और सरमथुरा रेंज की वन टीमों को भी अलर्ट कर दिया गया.

फिलहाल वन विभाग ने अभ्यारण्य क्षेत्र में कैमरा ट्रैप बढ़ा दिए हैं और ग्रामीणों को भी जंगल की तरफ अकेले नहीं जाने की हिदायत दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि चीता पूरी तरह से स्वस्थ है और ये अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति के चलते इतना लंबा सफर तय कर यहां पहुंचा है. धौलपुर टाइगर रिजर्व में चीते की मौजूदगी वन्यजीव प्रेमियों के लिए रोमांचक खबर है, लेकिन वन विभाग के लिए यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी है. फिलहाल सभी टीमें चीते की निगरानी में जुटी हैं ताकि उसे सुरक्षित वापस कूनो की ओर ले जाया जा सके या उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

चीता पुनर्वास परियोजना क्या है ?
एमपी के श्योपुर जिले में कूनो नेशनल पार्क भारत में चीता पुनर्वास परियोजना का मुख्य केंद्र है. जहां पर विलुप्त हो चुके चीतों को फिर से बसाने के लिए सितंबर 2022 में नामीबिया और बाद में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों को इसी अभ्यारण्य में छोड़ा गया था. कूनो का विशाल घास के मैदान और घना जंगल इन वन्यजीवों की प्राकृतिक जीवनशैली के अनुकूल माना जाता है, हालांकि कई बार युवा चीते अपने स्वाभाविक विस्थापन के दौरान नए इलाकों की खोज में लंबी दूरियां तय कर लेते हैं.

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