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Explainer: श्रीगंगानगर को कभी हरे-भरे खेतों और कृषि क्रांति के लिए जाना जाता था, लेकिन अब जिले के सामने नशे की एक गंभीर चुनौती दिखाई दे रही है. भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे इस इलाके में हाल ही में करोड़ों रुपये की हेरोइन और अफीम की बरामदगी ने एक बार फिर ड्रग्स की सप्लाई और इसके नेटवर्क को लेकर सवाल खड़े किए हैं. रावला इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक 23 केडी क्षेत्र में BSF की सर्चिंग के दौरान 12 पैकेट मिले. इनमें 11 पैकेट में करीब 5 किलो 500 ग्राम हेरोइन और एक पैकेट में करीब 500 ग्राम अफीम बताई गई है.
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आपके दिए इनपुट के मुताबिक यह खेप संभवतया पाकिस्तान की तरफ से भेजी गई है. हालांकि, इस खेप को किस व्यक्ति या नेटवर्क तक पहुंचाया जाना था, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. BSF, CID और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस इसी नेटवर्क तक पहुंचने पर है.
श्रीगंगानगर में नशे का सवाल क्यों गंभीर है?
श्रीगंगानगर की भौगोलिक स्थिति इस पूरे मामले को समझने में महत्वपूर्ण है. एक तरफ जिला पाकिस्तान से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब है, वहीं दूसरी तरफ इसकी सीमाएं पंजाब से जुड़ी हैं. आपके दिए विवरण के मुताबिक यही स्थिति इसे नशे की तस्करी के लिहाज से संवेदनशील बनाती है.
पिछले कुछ वर्षों में श्रीगंगानगर और आसपास के इलाकों में ‘चिट्टा’ यानी हेरोइन और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स के चलन को चिंताजनक बताया गया है. इसका असर स्थानीय युवाओं पर पड़ने की बात भी सामने रखी गई है.
नशे की समस्या को केवल एक बरामदगी या एक पुलिस कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जा सकता. आपके इनपुट के मुताबिक इसके पीछे एक ऐसी सप्लाई चेन की आशंका है, जिसमें सीमा के रास्ते आने वाले मादक पदार्थ स्थानीय स्तर तक पहुंच सकते हैं.
23 केडी में क्या मिला?
रावला इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक 23 केडी क्षेत्र में BSF की सर्चिंग के दौरान कुल 12 पैकेट बरामद हुए.
11 पैकेट में करीब 5 किलो 500 ग्राम हेरोइन
1 पैकेट में करीब 500 ग्राम अफीम
बरामद खेप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये बताई गई है. यानी एक ही कार्रवाई में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद हुआ. आपके दिए इनपुट के अनुसार यह खेप संभवतया पाकिस्तान की तरफ से भेजी गई थी. यह बरामदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि सीमा क्षेत्र में तस्करी की कोशिशों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के सामने लगातार चुनौती बनी हुई है.
पाकिस्तान की तरफ से भेजे जाने की आशंका
इस मामले में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर आपके इनपुट में संभावना जताई गई है. ड्रग्स की यह खेप संभवतया पाकिस्तान की तरफ से भेजे जाने की बात सामने आई है.
इसी वजह से इस पूरे मामले को केवल स्थानीय स्तर की ड्रग्स बरामदगी के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि सीमा पार से आने वाली संभावित सप्लाई के एंगल से भी देखा जा रहा है.
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि अगर यह खेप सीमा पार से आई थी, तो इसे आगे किसे पहुंचाया जाना था? इसका रिसीवर कौन था? स्थानीय स्तर पर इसे कौन आगे सप्लाई करता? इन सवालों के जवाब जांच के आगे बढ़ने के बाद ही सामने आ सकते हैं.
नशे की सप्लाई चेन का सबसे बड़ा सवाल
किसी भी ड्रग्स खेप के पकड़े जाने के बाद सिर्फ मादक पदार्थ की बरामदगी ही पूरी कहानी नहीं होती. असली सवाल उसके नेटवर्क तक पहुंचने का होता है.
आपके दिए इनपुट में भी यही सवाल सबसे अहम बताया गया है कि इस खेप का रिसीवर कौन था. BSF, CID और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में खेप बरामद हो गई, लेकिन अब जांच एजेंसियों के सामने इससे जुड़े लोगों तक पहुंचने की चुनौती है.
पुलिस और BSF पूरे इलाके में सर्चिंग कर रही हैं. इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय तस्करी के नेटवर्क को लेकर भी जांच की जा रही है.
युवाओं तक पहुंचने का खतरा
श्रीगंगानगर में नशे की समस्या को लेकर सबसे बड़ी चिंता युवाओं को लेकर जताई गई है. आपके दिए इनपुट के मुताबिक ‘चिट्टा’ और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स का चलन बढ़ने की बात सामने आई है.
नशे की लत का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता. आपके इनपुट में इसे स्थानीय युवाओं और सामाजिक स्थिरता से जोड़कर चिंता जताई गई है. अपराध के बढ़ते ग्राफ और सामाजिक अस्थिरता के पीछे नशे को एक बड़ा कारण बताया गया है.
यही वजह है कि सीमा पर पकड़ी गई एक बड़ी खेप को केवल बरामदगी के आंकड़े के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा. इसके पीछे मौजूद संभावित सप्लाई चेन और इसके अंतिम इस्तेमाल तक पहुंचना ज्यादा महत्वपूर्ण है.
‘नार्को-टेररिज्म’ का एंगल
आपके दिए इनपुट में इस पूरे मामले को ‘नार्को-टेररिज्म’ यानी नशे के जरिए होने वाली संभावित गतिविधियों के एंगल से भी समझाया गया है. इसमें पाकिस्तान की तरफ से ड्रग्स भेजने को एक संभावित छद्म युद्ध की रणनीति के रूप में बताया गया है.
इसके दो संभावित उद्देश्य बताए गए हैं. पहला, सीमावर्ती राज्यों के युवाओं को नशे की ओर धकेलना और दूसरा, ड्रग्स से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल टेरर फंडिंग और देश विरोधी गतिविधियों में किए जाने की आशंका.
हालांकि, इस मामले में बरामद खेप से जुड़ा ऐसा कोई अंतिम निष्कर्ष आपके दिए तथ्यों में नहीं बताया गया है. इसलिए इसे जांच के एक एंगल और आशंका के तौर पर ही देखना उचित होगा.
पंजाब तक जाने की भी आशंका
आपके इनपुट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय तस्करों के जरिए श्रीगंगानगर से पंजाब जाने की आशंका है.
यानी सीमा से बरामदगी के बाद जांच का दायरा केवल श्रीगंगानगर तक सीमित नहीं रह सकता. अगर सप्लाई चेन की यह आशंका सही साबित होती है, तो यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सीमा क्षेत्र से ड्रग्स आगे किस नेटवर्क तक पहुंचती है.
फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम पुष्टि आपके दिए विवरण में नहीं है. इसलिए इसे जांच के एक संभावित एंगल के रूप में ही देखा जा रहा है.
15 किलोमीटर नहीं, सवाल पूरे नेटवर्क का है
इस मामले में BSF ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से 12 पैकेट बरामद किए हैं. लेकिन इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल बरामद पदार्थ की मात्रा या उसकी कीमत से आगे का है.
सवाल यह है कि इसे सीमा तक कौन लेकर आया? इसे आगे किसे पहुंचाया जाना था? क्या इसके पीछे स्थानीय स्तर पर कोई नेटवर्क सक्रिय है? क्या पहले से चल रही किसी सप्लाई चेन से इसका संबंध है?
आपके इनपुट के मुताबिक जांच एजेंसियां इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही हैं. पूरे रावला इलाके और सीमावर्ती क्षेत्रों में BSF और पुलिस की सघन तलाशी जारी है.
अब आगे क्या?
खेप की बरामदगी के बाद असली चुनौती अब उस नेटवर्क तक पहुंचने की है, जो इसके पीछे हो सकता है. BSF, CID और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ड्रग्स बरामद हुई है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस खेप का रिसीवर कौन था और इसे कहां पहुंचाया जाना था.
आपके दिए इनपुट के मुताबिक स्थानीय स्लीपर सेल और तस्करों के नेटवर्क को खंगालने के लिए खुफिया तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है. कॉल डिटेल्स और तकनीकी सर्विलांस के जरिए उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जो श्रीगंगानगर के युवाओं तक नशा पहुंचाने वाले नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं.