राजस्थान संपर्क 181 पर बड़ा बदलाव: शिकायतों का होगा 'संतुष्टि टेस्ट', CS वी. श्रीनिवास ने दिए सख्त निर्देश
Rajasthan News: राजस्थान संपर्क 181 पर अब सिर्फ शिकायत का निस्तारण दर्ज कर फाइल बंद करना पर्याप्त नहीं होगा. सरकार यह भी जांचेगी कि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट है या नहीं... मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने असंतुष्ट परिवादियों से वीडियो कॉल पर बात कर संबंधित अधिकारियों को लंबित और असंतोषजनक मामलों का दोबारा समाधान करने के निर्देश दिए.
Rajasthan News: राजस्थान संपर्क 181 पर अब केवल शिकायत का 'निस्तारण' दर्ज कर फाइल बंद करना पर्याप्त नहीं होगा. सरकार यह भी देखेगी कि जिस समाधान के आधार पर शिकायत बंद की गई, उससे शिकायतकर्ता वास्तव में संतुष्ट है या नहीं. मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन सेंटर पहुंचकर ऐसे परिवादियों को वीडियो कॉल किया. जो विभागों की ओर से किए गए समाधान के बावजूद संतुष्ट नहीं थे.
मुख्य सचिव ने भरतपुर, डीग, जालौर, फलौदी, अजमेर, भीलवाड़ा, जैसलमेर और चूरू सहित अलग-अलग जिलों के परिवादियों से सीधे बातचीत की. शिकायतकर्ता ने अपनी समस्या बताई, तो संबंधित अधिकारियों से भी वीडियो कॉल पर ही जवाब लिया गया. इसके बाद लंबित अथवा असंतोषजनक मामलों का दोबारा समाधान करने के निर्देश दिए गए.
181 पर रोजाना करीब 14 हजार शिकायतें
राजस्थान संपर्क 181 पर प्रतिदिन औसतन करीब 14 हजार शिकायतें आती हैं और लगभग इतनी ही शिकायतों का निस्तारण भी किया जाता है. मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि निस्तारण का प्रतिशत अच्छा होना ही पर्याप्त नहीं है. शिकायत के समाधान की गुणवत्ता और शिकायतकर्ता की संतुष्टि भी जांची जाए. असंतुष्ट परिवादियों के मामलों को प्राथमिकता से दोबारा देखा जाए.
पेयजल की शिकायतों पर विशेष फोकस
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जब समीक्षा की तो सामने आया कि पेयजल से जुड़ी शिकायतों पर विशेष फोकस रहा. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में अब तक 8,58,234 शिकायतें आई हैं, जिनमें 8,42,904 का निस्तारण किया गया है. यानी उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 15,330 शिकायतों का निस्तारण बाकी है. मुख्य सचिव ने खराब हैंडपंप, नाकारा ट्यूबवेल और पाइपलाइन लीकेज जैसी शिकायतें लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए.
भू-स्वामित्व और पट्टों से जुड़ी शिकायतों के लिए लगेंगे विशेष शिविर
ऐसी शिकायतों के समाधान के लिए जिलेवार विशेष अभियान चलाने को कहा गया है. पंचायतीराज विभाग में अब तक 4,44,386 शिकायतें मिली हैं और इनमें से 4,34,033 का निस्तारण हुआ है. इस हिसाब से 10,353 शिकायतें अभी निस्तारित होना बाकी हैं. मुख्य सचिव ने भू-स्वामित्व और पट्टों से जुड़ी शिकायतों के लिए शिविर लगाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए. ऊर्जा विभाग की समीक्षा में जयपुर डिस्कॉम का औसत शिकायत निस्तारण समय 8 दिन और संतुष्टि स्तर 82.41 प्रतिशत बताया गया.
अजमेर-जोधपुर डिस्कॉम में शिकायत निस्तारण की समीक्षा
अजमेर डिस्कॉम में औसत निस्तारण समय 10 दिन और संतुष्टि स्तर 78 प्रतिशत से अधिक है. जोधपुर डिस्कॉम में औसतन 12 दिन में निस्तारण हो रहा है और संतुष्टि स्तर 77 प्रतिशत से अधिक है. मुख्य सचिव ने बिजली आपूर्ति और ट्रांसफार्मर से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण पर संतोष जताया. साथ ही सभी विभागों को साफ संदेश दिया कि 181 पर शिकायत क्लोज होने से काम पूरा नहीं माना जाएगा, असली पैमाना यह होगा कि शिकायतकर्ता समाधान से कितना संतुष्ट है.
बहरहाल, यानी 181 के आंकड़ों में शिकायत का 'क्लोज' होना अब कहानी का आखिरी पन्ना नहीं होगा. असली सवाल ये होगा कि फाइल में समाधान हुआ, तो क्या जमीन पर भी हुआ और अगर जवाब ‘नहीं’ है, तो शिकायत फिर सिस्टम के सामने होगी. मुख्य सचिव का संदेश साफ है. निस्तारण की गिनती नहीं, अब संतुष्टि की कसौटी पर सिस्टम परखा जाएगा.