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15 दिन... 15 अर्थियां: राजस्थान के इस जिले में क्यों बन रही है सड़कें 'डेथ जोन'?

Rajasthan News: चूरू के तारानगर-साहवा इलाके में 15 दिन में 15 लोगों की सड़क हादसों में मौत से हड़कंप मच गया है. हादसों के बाद साहवा पुलिस ने नाकाबंदी कर बिना हेलमेट, ओवरस्पीड और यातायात नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है. खतरनाक मोड़, गड्ढे, अधूरे ब्रेकर, ओवरलोडिंग और तेज लाइटें हादसों की बड़ी वजह बन रही हैं.

Written By SAGAR CHAUDHARY
Published: Oct 10, 2026, 06:16 PM IST | Updated: Oct 13, 2026, 04:32 PM IST
Image Credit: Churu News (AI IMAGE)
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Churu News: राजस्थान के चूरू जिले के तारानगर-साहवा इलाके में पिछले 15 दिनों में सड़क हादसों में 15 लोगों की मौत हो चुकी है. लगातार हो रही इन घटनाओं से इलाके में चिंता और डर का माहौल है. हादसों के बाद सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं. लोगों की नाराजगी के बीच साहवा थाना पुलिस ने साहवा-तारानगर मार्ग पर नाकाबंदी कर वाहनों की जांच शुरू कर दी है. बिना हेलमेट वाहन चलाने, तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान किए जा रहे हैं. हालांकि, सवाल यह है कि क्या पुलिस की कार्रवाई से आगे बढ़कर सड़कों की खामियों को दूर करने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे?

हादसों के बाद एक्शन मोड में आई साहवा पुलिस
लगातार हो रहे हादसों और लोगों की नाराजगी के बाद साहवा थाना पुलिस ने सख्ती शुरू की है. एएसआई शिवभगवान और एफसी हंसराम के नेतृत्व में पुलिस टीम साहवा-तारानगर मार्ग पर नाकाबंदी कर वाहनों की जांच कर रही है. इस दौरान बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों, तेज रफ्तार से गाड़ी दौड़ाने वालों और यातायात नियम तोड़ने वालों के चालान काटे जा रहे हैं.

पुलिस वाहन चालकों को रोककर हेलमेट पहनने और नियमों का पालन करने की समझाइश भी दे रही है. साथ ही चेतावनी दी जा रही है कि लापरवाही दोहराने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, सड़क हादसों पर रोक लगाने के लिए नियमित जांच के साथ खतरनाक जगहों पर सुधार करना भी जरूरी है.

सिंगल रोड और खतरनाक मोड़ बढ़ा रहे हादसों का खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसों वाली कई जगहों पर सड़क पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन सिंगल रोड, खतरनाक मोड़ और अचानक आने वाले गड्ढे परेशानी बढ़ाते हैं. तारानगर से साहवा रोड पर एक ऐसा मोड़ है, जहां से लिंक रोड शहर के अंदर जाती है. लोगों के मुताबिक, इस लिंक रोड को मुख्य सड़क से जोड़ने का तरीका ठीक नहीं है. इसके कारण यहां वाहनों के टकराने का खतरा बना रहता है. ऐसी जगहों पर सड़क की बनावट सुधारने और सही संकेतक लगाने की जरूरत है, ताकि वाहन चालकों को मोड़ और सामने आने वाले रास्ते की जानकारी पहले से मिल सके.

अधूरे ब्रेकर और पत्थर भी बन रहे परेशानी
तारानगर मुख्य बस स्टैंड से अंबेडकर सर्किल की ओर जाने वाले रास्ते पर बने ब्रेकर भी सवालों के घेरे में हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क के दोनों किनारों पर ब्रेकर बनाए गए हैं, लेकिन बीच का हिस्सा खाली छोड़ दिया गया है. ऐसे में दोपहिया वाहन और टेम्पो चालक ब्रेकर से बचने के लिए बीच के संकरे रास्ते से निकलते हैं. इससे पीछे से आने वाले वाहनों का संतुलन बिगड़ने और टक्कर होने का खतरा रहता है.

इसके अलावा, कुछ जगहों पर ब्रेकर के किनारों पर बड़े-बड़े पत्थर रखे गए हैं. रात में सामने से आने वाले वाहनों की तेज रोशनी के कारण ये पत्थर साफ दिखाई नहीं देते और चालक अचानक वाहन पर नियंत्रण खो सकते हैं. तारानगर के MJD कॉलेज और चूरू से तारानगर आते समय सेहजुसर स्कूल के सामने के हालात को इसका उदाहरण बताया जा रहा है.

ओवरस्पीडिंग और ओवरलोडिंग से भी जान का खतरा
इलाके में तेज रफ्तार से वाहन चलाना, लापरवाही करना और रात में सामने से आने वाले वाहनों को सही तरीके से डिपर नहीं देना भी चिंता का विषय है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई बार बड़े वाहनों के कारण छोटे वाहन चालकों को परेशानी होती है. वहीं, दोपहिया वाहनों पर बिना हेलमेट दो या दो से ज्यादा सवारियां बैठाकर चलने के मामले भी सामने आते हैं.

पिकअप और जुगाड़ जैसे लोडिंग वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाना भी गंभीर खतरा पैदा करता है. इसके अलावा, शराब पीकर वाहन चलाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है. इन मामलों पर लगातार निगरानी और नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है.

सड़क सुरक्षा के लिए विभागों को उठाने होंगे ठोस कदम
अक्सर बड़े हादसे के बाद पुलिस, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन सक्रिय दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ समय बाद कार्रवाई धीमी पड़ने की शिकायतें सामने आती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि हादसों की आशंका वाले स्थानों की पहचान पहले से क्यों नहीं की जाती और खामियों को दूर करने में देरी क्यों होती है?

परिवहन विभाग और सड़क निर्माण एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करें. इन जगहों पर चेतावनी बोर्ड लगाना, खतरनाक मोड़ों और गड्ढों को ठीक करना तथा जरूरत के मुताबिक वैज्ञानिक तरीके से ब्रेकर बनवाना जरूरी है. इससे वाहन चालकों को समय रहते सावधान होने का मौका मिल सकता है.

सड़क सुरक्षा अभियान लगातार चलाने की जरूरत
साल में एक-दो बार सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाने या कुछ दिनों तक चालान करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता. इसके लिए नियमित जांच, सड़क की खामियों में सुधार और लोगों को जागरूक करने की जरूरत है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा को लेकर विभाग गंभीर है और जल्द ही विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.

क्या बोले साहवा थाना के ASI शिवभगवान?
साहवा थाना के ASI शिवभगवान के अनुसार लोकल इन्स्पेक्टर स्पेशल अभियान के तहत अभी जो यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं, उन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है एमवी एक्ट में. हेलमेट नहीं लगाता है तो उनके हेलमेट चालकों के साथ हेलमेट के उल्लंघन का चालान किया जाता है और जो भी एमवी एक्ट का उल्लंघन करता है, उसके अनुसार चालान किया जाता है.  

डीएसपी तारानगर सर्किल रोहित सांखला ने बताया
डीएसपी तारानगर सर्किल रोहित सांखला के अनुसार पुलिस सड़क हादसों को रोकने के लिए जगह-जगह नाकाबंदी कर रही है. शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ हेलमेट, सीट बेल्ट और अन्य ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर चालान किए जा रहे हैं. चाइनीज लाइट लगाने वाले वाहनों के चालान कर लाइटें उतरवाई जा रही हैं. साथ ही, ऐसी लाइटें बेचने वाली दुकानों को भी इन्हें नहीं बेचने के लिए पाबंद किया गया है. पुलिस ने आमजन से अपील की है कि सड़क पर अपनी और दूसरों की जिंदगी खतरे में न डालें और केवल कंपनी की ओर से लगाई गई मानक लाइटों का ही इस्तेमाल करें.

पुलिस ने हेलमेट और सीट बेल्ट को चालान से बचने का नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने का जरिया बताया है. अधिकारियों के मुताबिक, सड़क हादसे में परिवार के कमाने वाले सदस्य की मौत से पूरा परिवार प्रभावित होता है. दोपहिया वाहन पर क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने से भी गंभीर हादसे हो रहे हैं, इसलिए ऐसा करने से बचें. रात में जरूरत के मुताबिक ही हाई बीम का इस्तेमाल करें और सामान्य स्थिति में लो बीम पर वाहन चलाएं. पुलिस ने लोगों से सभी ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की है, ताकि सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों को रोका जा सके.

रिपोर्टर - नरेश

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सागर चौधरी, अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं.सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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