जयपुर के मानसरोवर में नगर निगम की कार्रवाई के बावजूद अवैध निर्माण पर रोक लगाने और सीज संपत्तियों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. यहां बिना भवन निर्माण स्वीकृति के बनाई गईं दो बहुमंजिला इमारतों को नगर निगम ने फरवरी 2026 में सीज किया था. लेकिन नवंबर में शिकायत मिलने के बाद जब मौके पर जांच करवाई गई तो दोनों इमारतों की सील टूटी हुई मिली. इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने भवन मालिकों के खिलाफ मानसरोवर थाने में FIR दर्ज करवाई है.
मामला मानसरोवर मध्यम मार्ग के भूखंड संख्या 54/214 और 54/197 का है. नगर निगम के अनुसार, इन दोनों भूखंडों पर बिना भवन निर्माण स्वीकृति के बहुमंजिला निर्माण किया गया था. अब सील टूटने के मामले में पुलिस जांच कर रही है. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. फरवरी में सीज की गई इमारतों की सील नवंबर तक टूटने की जानकारी निगम को क्यों नहीं मिली? क्या इस दौरान भवनों का नियमित निरीक्षण किया गया था?
बिना स्वीकृति बनाया गया था बहुमंजिला भवन
नगर निगम के अनुसार, मानसरोवर मध्यम मार्ग स्थित भूखंड संख्या 54/214 और 54/197 पर बिना भवन निर्माण स्वीकृति के निर्माण करवाया गया था. दोनों इमारतों में बेसमेंट, स्टिल्ट फ्लोर, भूतल और तीन मंजिलों का निर्माण किया गया था. इसे लेकर नगर निगम ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 194(7)(एफ) के तहत कार्रवाई की थी. नगर निगम प्रशासन ने 12 फरवरी 2026 को दोनों भवनों को सीज कर दिया था. सीज करने का उद्देश्य अवैध निर्माण पर रोक लगाना और भवनों में बिना अनुमति गतिविधियां बंद करवाना था. लेकिन अब दोनों इमारतों की सील टूटी मिलने के बाद निगम की कार्रवाई और उसके बाद की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं.
शिकायत के बाद मौके पर पहुंची निगम की टीम
सील तोड़े जाने की शिकायत सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने मामले की जांच करवाई. मानसरोवर जोन के उपायुक्त मुकेश कुमार के अनुसार, शिकायत मिलने पर कनिष्ठ अभियंता को मौके पर भेजकर दोनों भवनों का परीक्षण करवाया गया था. मौके पर जांच के दौरान दोनों इमारतों की सील खुर्द-बुर्द मिली. इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने संबंधित दस्तावेजों के साथ मानसरोवर थाने में शिकायत दी और FIR दर्ज करवाई. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 223(ए) और 331(1) के तहत मामला दर्ज किया है. मामले की जांच सहायक उपनिरीक्षक विक्रम सिंह को सौंपी गई है.
FIR में भवन मालिकों पर सील तोड़ने का आरोप
नगर निगम की ओर से दर्ज करवाई गई FIR में सीज किए गए भवनों की सील तोड़ने का आरोप है. अब पुलिस इस मामले की जांच करेगी कि दोनों इमारतों की सील कब तोड़ी गई और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है. फिलहाल FIR दर्ज होने का मतलब आरोपों की पुष्टि होना नहीं है. इन आरोपों की सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी. नगर निगम प्रशासन विधिक परीक्षण के बाद दोनों इमारतों को दोबारा सील करने की कार्रवाई भी कर सकता है. हालांकि, अभी इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि सील टूटने के बाद भवनों में किसी तरह का निर्माण कार्य किया गया या उनका इस्तेमाल किया गया. इसकी जानकारी भी जांच के दौरान सामने आ सकती है.
नौ महीने तक कहां थी नगर निगम की निगरानी?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की निगरानी व्यवस्था को लेकर है. दोनों इमारतों को 12 फरवरी 2026 को सीज किया गया था, जबकि सील टूटने की शिकायत नवंबर में सामने आई. यानी फरवरी से नवंबर के बीच करीब नौ महीने का अंतर है. ऐसे में सवाल उठता है कि इस अवधि में सीज भवनों का निरीक्षण किया गया था या नहीं. यदि निरीक्षण हुए तो सील टूटने की जानकारी पहले क्यों नहीं मिली? क्या नगर निगम के पास फरवरी से नवंबर तक हुए निरीक्षण का कोई रिकॉर्ड है? और यदि इस दौरान निरीक्षण नहीं हुए तो सीज संपत्तियों की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है.
क्या अधिकारियों की भी तय होगी जवाबदेही?
नगर निगम ने भवन मालिकों के खिलाफ FIR दर्ज करवाकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन सवाल यह भी है कि सीज संपत्तियों की निगरानी में संभावित लापरवाही की जांच होगी या नहीं. जिन अधिकारियों के जिम्मे इन भवनों की निगरानी थी, उनसे जवाब मांगा जाएगा या नहीं, यह भी अहम है. फिलहाल पुलिस सील तोड़ने के आरोपों की जांच कर रही है. लेकिन यह मामला सिर्फ दो इमारतों की सील टूटने तक सीमित नहीं है. सवाल यह है कि जब नगर निगम किसी भवन को सीज करता है तो उसके बाद उसकी निगरानी कैसे होती है. आखिर सील कब टूटी, किसने तोड़ी और निगम को इसकी जानकारी शिकायत मिलने के बाद ही क्यों हुई? इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी.