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अंग्रेजों के जमाने की अनकही कहानी: जानिए कैसे एक ब्रिटिश अधिकारी ने बाबा को भेंट की थी आक के पेड़ की जड़!

Bikaner News: बीकानेर में सफेद आक की एकल जड़ से बनी अनोखी गणपति प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है. करीब 19 साल में तैयार हुई प्रतिमा के मस्तक पर सूर्य-चंद्रमा के निशान हैं और इसका इतिहास करीब 135 साल पुराना बताया जाता है.

Written By Sandhya Yadav
Published: Sep 25, 2026, 11:17 AM IST | Updated: Sep 25, 2026, 11:20 AM IST
Image Credit: सफेद आक के एकल तने की जड़ से बनी है गणपति प्रतिमा.
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Bikaner News: बीकानेर में विराजमान सफेद आक से बनी गणपति की अनोखी प्रतिमा इन दिनों गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. करीब तीन फीट सात इंच लंबी बताई जाने वाली इस प्रतिमा की खासियत यह है कि इसे सफेद आक के एकल तने की जड़ से बनाया गया है. मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, प्रतिमा को तैयार करने में करीब 19 साल का समय लगा. गणपति के मस्तक पर सूर्य और चंद्रमा के निशान भी बने हुए हैं, जिन्हें लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष मान्यता है.

गणेश चतुर्थी पर उमड़ रहे श्रद्धालु
बीकानेर के एक घर में स्थित यह गणेश मंदिर गणेश चतुर्थी के चलते विशेष रूप से सजाया गया है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान गणेश के दर्शन करने और अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंच रहे हैं. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, लगातार 21 दिन तक मंदिर की फेरी लगाने से मनोकामना पूरी होती है.

पुरोहित परिवार का कहना है कि वह 100 साल से भी अधिक समय से इस प्रतिमा की पूजा-अर्चना करता आ रहा है. हालांकि मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित सफेद आक से निर्मित गणपति की प्रतिमा है.

19 साल में तैयार हुई प्रतिमा
मंदिर के पुजारी के मुताबिक, सफेद आक की जड़ से गणपति की इस प्रतिमा को तैयार करने में करीब 19 साल लगे थे. प्रतिमा को लेकर बताया जाता है कि इसका इतिहास करीब 135 साल पुराना है. इस प्रतिमा की खास बात केवल इसका निर्माण ही नहीं, बल्कि इसके साथ जुड़ी मान्यताएं भी हैं. गणपति के मस्तक पर सूर्य और चंद्रमा के निशान मौजूद हैं, जिन्हें मंदिर से जुड़े लोग विशेष धार्मिक महत्व वाला मानते हैं.

अंग्रेजी शासन के दौर से जुड़ी कहानी
प्रतिमा के इतिहास को लेकर एक कथा भी प्रचलित है. मान्यता के अनुसार, अंग्रेजी शासन के समय बाबा बालक नाथ नाम के एक साधु इस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे. बताया जाता है कि उन्होंने एक अंग्रेज वन अधिकारी का उपचार किया था. अधिकारी के स्वस्थ होने के बाद उसने बाबा बालक नाथ को सफेद आक के पेड़ की जड़ भेंट की. इसी जड़ से बाद में गणपति की प्रतिमा का निर्माण करवाया गया. बताया जाता है कि बाबा बालक नाथ ने अपने अंतिम समय में यह प्रतिमा अपने भक्त रहे पुरोहित परिवार को सौंप दी थी. इसके बाद से परिवार लगातार प्रतिमा की पूजा करता आ रहा है.

गणपति के मस्तक पर सूर्य और चंद्रमा
करीब तीन फीट सात इंच लंबी बताई जाने वाली इस प्रतिमा के मस्तक पर सूर्य और चंद्रमा के निशान बने हैं. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, इन्हें तंत्र सिद्धि से तैयार किया गया है. सूर्य और चंद्रमा धारण करने वाले इन गणपति को सर्वसिद्धि गणेश माना जाता है. बताया जाता है कि प्रतिमा का निर्माण पुष्य नक्षत्र में हुआ था. खास बात यह भी है कि गणपति के साथ रिद्धि-सिद्धि की प्रतिमाएं भी इसी एकल तने से तैयार की गई हैं.

यहां भक्त खुद करते हैं भजन और आरती
इस गणेश मंदिर में पूजा और आरती की परंपरा भी अलग है. आमतौर पर कई गणेश मंदिरों में आरती के दौरान ढोल-नगाड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यहां श्रद्धालु स्वयं पारंपरिक तरीके से भजन और आरती करते हैं. भक्तों की मान्यता है कि अपने हाथों से भजन और आरती करने से भगवान गणेश के साथ उनका सीधा जुड़ाव महसूस होता है. गणेश चतुर्थी से लेकर विसर्जन तक मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है.

सफेद आक के गणपति बने विशेष आकर्षण
सफेद आक की जड़ से बनी गणपति की यह प्रतिमा बीकानेर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है. करीब 19 साल में तैयार हुई प्रतिमा, इसके मस्तक पर बने सूर्य और चंद्रमा के निशान, रिद्धि-सिद्धि की प्रतिमाओं का उसी एकल तने से निर्माण और इससे जुड़ी पुरानी मान्यताएं इसे अन्य गणेश प्रतिमाओं से अलग बनाती हैं. गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में पहुंच रहे श्रद्धालु इस अनोखी प्रतिमा के दर्शन कर रहे हैं. मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, सफेद आक से बनी इस प्रतिमा का इतिहास करीब 135 साल पुराना बताया जाता है, जबकि पुरोहित परिवार लंबे समय से इसकी पूजा-अर्चना करता आ रहा है.

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लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली संध्या ने Zee News से पहले Newstrack और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. जमीनी खबरों की गहरी समझ रखने वाली संध्या ने राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट राजनीतिक संकट और कोविड-19 महामारी समेत कई बड़े और जटिल घटनाक्रमों की बेहतरीन कवरेज की है.आप संध्या यादव से सीधे SANDHYA.YADAV@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान की खबरों के रियल-टाइम अपडेट्स के लिए आप उनसे लिंक्डइन (https://in.linkedin.com/in/sandhya-yadav-5734ba144) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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