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दशहरे पर भाईचारे की मिसाल: 50 साल से साथ रावण बना रहे हिंदू-मुस्लिम परिवार, भीलवाड़ा में खास तैयारी

भीलवाड़ा में दशहरे पर रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाने का काम करीब 50 साल से हिंदू और मुस्लिम परिवार मिलकर कर रहे हैं. इस बार तेजाजी चौक में 51 फीट ऊंचा रावण और 35-35 फीट के मेघनाथ-कुंभकरण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं. रावण की आंखों से अंगारे निकलने और नाभि में चक्र चलने जैसे खास आकर्षण भी होंगे.

Written By Zee Rajasthan Web Team
Published: Oct 18, 2026, 04:23 PM IST | Updated: Oct 18, 2026, 04:32 PM IST
Image Credit: हिंदू-मुस्लिम भाईचारा
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राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में नगर निगम द्वारा हर साल शहर के 4 स्थानों पर रावण दहन किया जाता है, जिसमें सबसे बड़ा 51 फीट का रावण तेजाजी चौक में तो वहीं लेबर कॉलोनी, पुर और सांगानेर स्थित टंकी के बालाजी में रावण दहन किया जाता है. 

इनके लिए रावण और अन्य पुतले बनाने का काम सालों से 2 परिवारों को दिया जाता है, जिसमें से एक परिवार हिंदू तो दूसरा मुस्लिम परिवार है. यह परिवार रावण, मेघनाथ, कुंभकरण के साथ रावण परिवार का पुतले तैयार करते हैं.

बचपन से रावण बनाने का कर रहे काम 
रावण तैयार करने वाले मुस्लिम परिवार के कारीगर अब्दुल सलाम सोरगर ने कहा कि मैं बचपन से ही अपने दादाजी और फिर पिताजी के साथ रावण बनाने का काम करता आ रहा हूं. ग्यासीलाल गांछा के साथ भी बचपन से काम किया है. अब तीसरी पीढ़ी के रूप में मैं खुद रावण बना रहा हूं. इस बार मैं राजेश गांछा के साथ मिलकर यह काम कर रहे हैं. इस बार तेजाजी चौक में 51 फीट ऊंचा रावण बनाया जा रहा है. इसके साथ 35-35 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाथ भी बनाए जाएंगे. इस बार पुतले में रावण की आंखों से अंगारे निकलने और नाभि में चक्र चलने जैसी विशेष आकर्षक व्यवस्थाएं भी की जाएंगी.

हिंदू-मुस्लिम भाईचारा
अभी तक करीब 50 से 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. मैं छोटा था तब से ही हम एक परिवार की तरह रहते आए है. यह हमारी तीसरी पीढ़ी है और आज तक हमारे बीच कभी हिंदू-मुस्लिम का भेदभाव नहीं रहा. हम हमेशा भाईचारे के साथ मिलकर काम करते हैं. करीब 40 साल से यह रिश्ता बना हुआ है और आज भी हम सब मिल-जुलकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.

यह भी पढ़ेंः जयपुर में इंद्रदेव का रावण पर हमला: जलने से पहले ही गला रावण, दशहरे से पहले रावण मंडी से गायब 'लंकापति'!
  
मुस्लिम परिवार के साथ बना है रिश्ता      
वहीं, हिंदू परिवार के कारीगर राजेश गांछा ने कहा कि मेरे पिताजी ग्यासीलाल गांछा पिछले करीब 50 साल से यहां रावण बनाने का काम करते थे. उनके साथ सुलेमान सोरघर भी रावण बनाते थे. पिताजी के बाद अब मैं अब्दुल समद सोरघर और उनके बेटे सलाम के साथ मिलकर यह काम कर रहा हूं. हमें साथ काम करते हुए करीब 50 साल हो गए हैं. हमारे बीच कभी हिंदू-मुस्लिम जैसा भेदभाव नहीं रहा हमें कभी ऐसा लगा कि हम अलग-अलग धर्मों के हैं और न कभी आपस में लड़ाई हुई. हम हमेशा भाईचारे से रहते आए हैं और आज भी मिल-जुलकर रावण बनाने का काम करते हैं.
 
जमुनी तहजीब का संदेश                      
दशहरे पर भीलवाड़ा में दहन होने वाले रावण का पुतला देश की गंगाजमुनी तहजीब को पेश करता है. यह दोनों परिवार जिस तरह एक साथ होकर काम करते है, वैसे ही देश में भी हो तो नफरत को कहीं कोई जगह ही नहीं मिलेगी.

Report- Ramawatar Isran

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