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आमतौर पर श्मशान घाट का नाम सुनते ही लोगों के मन में भय, उदासी और मृत्यु का विचार आने लगता है. सामाजिक मान्यताओं के चलते लोग यहां जाने से भी कतराते हैं, लेकिन राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर शहर में तस्वीर कुछ अलग है. यहां का सार्वजनिक श्मशान घाट सिर्फ अंतिम संस्कार का स्थान नहीं, बल्कि स्वच्छता, हरियाली और सकारात्मक जीवनशैली की एक खूबसूरत मिसाल बनकर उभरा है.
दीपावली पर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाया श्मशान घाट
इस दीपावली पर श्मशान घाट का नजारा और भी आकर्षक हो गया है. पूरे परिसर को आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया-संवारा गया है. रंग-बिरंगी लाइट्स के बीच पेड़-पौधों की हरियाली और व्यवस्थित परिसर इसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं. शाम ढलते ही रोशनी से नहाया यह परिसर शहर के दूसरे सार्वजनिक स्थलों से कम खूबसूरत नजर नहीं आता.
पार्क और वॉकिंग ट्रैक बना लोगों के आकर्षण का केंद्र
इस परिसर की सबसे खास बात यहां विकसित किया गया पार्क और भ्रमण के लिए बना ट्रैक है. सुबह और शाम बड़ी संख्या में लोग यहां टहलने, व्यायाम करने और कुछ समय प्रकृति के बीच बिताने पहुंचते हैं. बुजुर्गों से लेकर युवा वर्ग तक के लिए यह स्थान सुकून और शारीरिक गतिविधियों का माध्यम बना हुआ है.
अंतिम विदाई की जगह से मिल रहा जिंदगी का संदेश
बाड़मेर का यह सार्वजनिक श्मशान घाट समाज को एक अलग संदेश भी देता है. जीवन और मृत्यु एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविकता के दो पहलू हैं, जहां अंतिम विदाई दी जाती है, उसी परिसर में लोग स्वस्थ रहने के लिए सुबह की शुरुआत करते हैं.
सकारात्मक सोच ने बदल दी श्मशान घाट की पहचान
दीपावली पर यहां की रोशनी सिर्फ विद्युत सजावट नहीं, बल्कि उस सकारात्मक सोच का प्रतीक है, जो किसी भी सार्वजनिक स्थान की पहचान बदल सकती है. जरूरत बस इतनी है कि इस स्वच्छता, हरियाली और सुंदरता को बनाए रखा जाए क्योंकि शहर की पहचान सिर्फ उसके बाजारों और चौराहों से नहीं, बल्कि ऐसे सार्वजनिक स्थलों से भी बनती है, जहां जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश दिखाई देती है.