Dholpur News: शहर के एसीजेएम कोर्ट संख्या एक में बुधवार को बाइक चोरी के मामले में पुलिस द्वारा पेश किए गए एक आरोपी को लेकर देर रात तक सुनवाई चली. आरोपी ने कोर्ट में पुलिस पर उसे तीन दिन तक थाने में रखने और मारपीट करने का आरोप लगाया. उसने यह भी बताया कि चोरी की बाइक बरामद होने और घटना स्वीकार करने के बावजूद उसे समय पर न्यायालय में पेश नहीं किया गया. आरोपी के पिता को भी कथित तौर पर एक रात थाने में रखा गया.
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीजेएम डॉ. सिद्धार्थ शंकर शर्मा ने बाइक चोरी मामले के जांच अधिकारी एएसआई सुरेश चंद्र से पूछताछ की. कोर्ट में पूछे गए सवालों का मौके पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ी और कोर्ट बुधवार रात करीब 10 बजे तक खुला रहा.
कोर्ट में आरोपी ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
बाइक चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया 19 वर्षीय आकाश पुत्र रामेश्वर दयाल जाटव, निवासी सोनारा गांव, कोतवाली थाना पुलिस ने कोर्ट में पेश किया था. पेशी के दौरान एसीजेएम ने आरोपी से पूछताछ की. आरोपी ने बताया कि पुलिस ने उसे करीब तीन दिन तक थाने में रखा. उसके साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया.
आरोपी ने कोर्ट को बताया कि उसने बाइक चोरी की घटना स्वीकार कर ली थी और पुलिस चोरी की बाइक भी बरामद कर चुकी थी. इसके बावजूद उसे निर्धारित समय पर न्यायालय में पेश नहीं किया गया. आरोपी के सहायक अधिवक्ता श्रीराम मंगल के अनुसार, पुलिस ने आकाश की गिरफ्तारी से पहले उसके पिता रामेश्वर दयाल को भी घर से पकड़ा था और उन्हें पूरी रात थाने में रखा गया. अधिवक्ता के मुताबिक, जब आकाश थाने पहुंचा तो उसके पिता को छोड़ा गया.
नाबालिग को भी थाने में रखने का आरोप
मामले में एक नाबालिग का नाम भी सामने आया. अधिवक्ता के अनुसार, बाइक चोरी के इसी मामले में एक नाबालिग को भी पुलिस थाने में रखा गया था और वह करीब तीन दिन तक वहां रहा. मामले की जानकारी मिलने के बाद एसीजेएम ने नाबालिग के परिजनों और आकाश के परिजनों से प्रार्थना पत्र एवं शपथ पत्र लिए. इसके बाद पुलिस की कार्रवाई और आरोपों को लेकर कोर्ट में विस्तार से सुनवाई हुई.
दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे तक चली बहस
मामले में बुधवार दोपहर करीब 3 बजे से बहस शुरू हुई, जो रात करीब 10 बजे तक चली. इस दौरान कोतवाली थाने में भी हलचल रही. रात करीब 10 बजे थाना अधिकारी महेंद्र शर्मा न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए और उन्होंने मामले को लेकर अपना पक्ष रखा. कोर्ट के बाहर अधिवक्ता भी मौजूद रहे. कोर्ट की इस लंबी कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग में भी हड़कंप की स्थिति देखी गई.
कोर्ट ने आदेश में पुलिस कार्रवाई पर जताई गंभीर आपत्ति
अधिवक्ता श्रीराम मंगल के अनुसार, एसीजेएम कोर्ट की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि बाइक चोरी के मामले में गिरफ्तार आरोपी के साथ पुलिस द्वारा अमानवीय यातना दिए जाने की बात सामने आई है. आदेश में इसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 53 के प्रावधानों के उल्लंघन से जोड़ते हुए टिप्पणी की गई है. आदेश में आरोपी के पिता को कथित तौर पर एक रात थाने में रखे जाने और मारपीट के आरोप को भी मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना गया है. इसके अलावा नाबालिग को थाने में रखे जाने को लेकर भी कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया.
पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच के निर्देश
एसीजेएम ने मामले की जांच के लिए धौलपुर जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिदेशक, एडीजी क्राइम, एडीजी विजिलेंस और भरतपुर रेंज आईजी को निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने मामले में विशेष जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच कराने और उसकी रिपोर्ट एसीजेएम न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए हैं.
कोर्ट के आदेश के मुताबिक, मामले के जांच अधिकारी सुरेश चंद्र और थाना अधिकारी महेंद्र शर्मा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के आदेशों एवं संवैधानिक प्रावधानों की कथित अवहेलना तथा कर्तव्य के प्रति लापरवाही के आरोपों की भी जांच की जानी है. इसके अलावा आदेश में प्रथम दृष्टया मिथ्या साक्ष्य तैयार करने, कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग और मिथ्या दस्तावेज लगाए जाने से संबंधित अपराध प्रतीत होने पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
आरोपी को किया गया रिहा, नाबालिग परिजनों को सौंपा
एसीजेएम डॉ. सिद्धार्थ शंकर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए आरोपी आकाश को तीन दिन तक थाने में रखे जाने और मारपीट के आरोपों को गंभीरता से लिया. कोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए आकाश को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया. वहीं, मामले में थाने पर रखे गए नाबालिग को भी उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया. अब कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर विशेष जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.