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₹200 की दिहाड़ी से ₹10,000 महीना तक: IAS के एक आइडिया ने बदल दी 1000 महिलाओं की किस्मत

Baran News: राजस्थान के बारां में मिशन समर्थ्या ने 1000 से अधिक सहरिया आदिवासी महिलाओं को रोजगार और कारोबार से जोड़ा है. कभी जंगल से लकड़ी-महुआ बीनने वाली महिलाएं अब 3.08 करोड़ रुपये के सरकारी ऑर्डर संभाल रही हैं. प्रशासन का लक्ष्य उन्हें लखपति दीदी बनाना है.

₹200 की दिहाड़ी से ₹10,000 महीना तक: IAS के एक आइडिया ने बदल दी 1000 महिलाओं की किस्मत
Image Credit: सरकारी मांग को बनाया रोजगार का जरिया.

Baran News: कभी जंगल से लकड़ी और महुआ इकट्ठा कर रोजाना 200 रुपये कमाने वाली सहरिया आदिवासी महिलाएं अब आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रही हैं. जिला प्रशासन के ‘मिशन समर्थ्या’ ने बारां के शाहबाद-किशनगंज क्षेत्र की 1000 से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उनकी कमाई और काम के अवसर बढ़ाए हैं. अब ये महिलाएं 3.08 करोड़ रुपये के सरकारी ऑर्डर संभाल रही हैं.

जंगल से निकलकर कारोबार तक पहुंचीं रामकन्या
खुशालपुरा गांव की रामकन्या सहरिया इस बदलाव की एक प्रमुख उदाहरण हैं. दो साल पहले तक उनकी आजीविका जंगल से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर थी, लेकिन अब उनके हाथों से पैक की गई हल्दी जिले में परोसी जाने वाली 24 लाख थालियों तक पहुंच रही है. इस काम से रामकन्या हर महीने 8 से 10 हजार रुपये कमा रही हैं.

दरअसल, सहरिया राजस्थान की एकमात्र आदिम जनजाति है. बारां में पहले से वन धन केंद्र मौजूद थे, लेकिन कारोबार का व्यवस्थित मॉडल नहीं होने के कारण महिलाएं अपना कच्चा माल कम कीमत पर बेचने को मजबूर थीं. इससे पूरे साल का कारोबार करीब 68 लाख रुपये तक ही सीमित था.

सरकारी मांग को बनाया रोजगार का जरिया
करीब छह महीने पहले जिला कलेक्टर आईएएस बालमुकुंद असावा ने इस समस्या का समाधान तलाशते हुए सरकारी जरूरतों को महिलाओं की आजीविका से जोड़ने की योजना बनाई. गणना में सामने आया कि मिड-डे मील, मां-बाड़ी केंद्र, सहरिया छात्रावास, अन्नपूर्णा रसोई, जिला जेल और पुलिस मेस में हर महीने 24 लाख थालियां परोसी जाती हैं. प्रति थाली 15 ग्राम मसालों की जरूरत के हिसाब से हर महीने 36 क्विंटल मसालों की मांग बनती है. इसी निश्चित मांग को आधार बनाकर मिशन समर्थ्या शुरू किया गया.

कलेक्टर बालमुकुंद असावा के मुताबिक, शाहबाद की महिलाओं के पास मेहनत और हुनर था, लेकिन स्थायी बाजार नहीं था. सरकारी मांग को उनके कौशल से जोड़ने के बाद अब 3.08 करोड़ रुपये के एडवांस ऑर्डर मिले हैं.

तीन विभागों ने मिलकर तैयार किया मॉडल
मिशन के तहत तीन स्तरों पर काम किया गया. जनजाति विभाग ने मशीनरी और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया. केवीके अंता ने तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्ता बनाए रखने और एफएसएसएआई के अनुरूप पैकेजिंग की जानकारी दी. वहीं, राजीविका ने 1000 से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) में संगठित किया.

कुल 33 वन धन केंद्रों का सत्यापन किया गया, जिनमें से 18 केंद्रों पर पैकेजिंग मशीनें लगाई गईं. खुशालपुरा में चिरौंजी, केवीके में शहद प्रसंस्करण इकाई और जिला मुख्यालय पर ‘ग्राम श्री मार्ट’ स्थापित किया गया.

बिक्री बढ़ाने और महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य
इस पहल के तहत अब तक 76.07 लाख रुपये की बिक्री हो चुकी है और 80 केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. महिलाओं को हर महीने 71.88 लाख रुपये यानी सालाना 8.63 करोड़ रुपये के स्थायी बाजार से जोड़ने का दावा किया गया है.

प्रशासन ने वित्त वर्ष 2026-27 में बिक्री को 2 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए एक करोड़ रुपये की नई मशीनरी, 217 स्वयं सहायता समूहों को 10 करोड़ रुपये का रियायती ऋण और 957 महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने के लिए 8 करोड़ रुपये की सहायता प्रस्तावित है.

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Sandhya Yadav

Sandhya Yadav

लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली संध्या ने Zee News से पहले Newstrack और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. जमीनी खबरों की गहरी समझ रखने वाली संध्या ने राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट राजनीतिक संकट और कोविड-19 महामारी समेत कई बड़े और जटिल घटनाक्रमों की बेहतरीन कवरेज की है.आप संध्या यादव से सीधे SANDHYA.YADAV@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान की खबरों के रियल-टाइम अपडेट्स के लिए आप उनसे लिंक्डइन (https://in.linkedin.com/in/sandhya-yadav-5734ba144) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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