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बांसवाड़ा मां त्रिपुरा सुंदरी का दिव्य दरबार: इस मंदिर में राजयोग के लिए हवन करवाते हैं नेता!

बांसवाड़ा के उमराई गांव स्थित प्रसिद्ध मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में शारदीय नवरात्रि को लेकर खास उत्साह है. मंदिर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया है और श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं. 18 भुजाओं वाली मां भगवती के दर्शन के लिए राजस्थान सहित गुजरात और मध्यप्रदेश से भक्त पहुंच रहे हैं. मान्यता है कि यहां कई नेता राजयोग की कामना से राजनीति हवन करवाते हैं.

Written By Sneha Aggarwal
Published: Oct 15, 2026, 06:59 PM IST | Updated: Oct 15, 2026, 07:06 PM IST
Image Credit: मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर
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Banswara News: शारदीय नवरात्रि के अवसर पर बांसवाड़ा जिले के प्रसिद्ध मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में भक्तिमय माहौल है. मंदिर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया है, जिससे मां का दरबार जगमगा उठा है. नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं.

बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर तलवाड़ा के समीप उमराई गांव में स्थित मां त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर अपनी धार्मिक महत्ता और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर के मुख्य द्वार के किवाड़ चांदी से निर्मित हैं. गर्भगृह में विराजित मां भगवती की प्रतिमा अष्टदश यानी 18 भुजाओं वाली है. प्रतिमा में माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की प्रतिकृतियां अंकित हैं. मां सिंह, मयूर और कमल के आसन पर विराजमान हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है.

सुबह, दोपहर और शाम को अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन की मान्यता 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां त्रिपुरा सुंदरी प्रातःकाल में कुमारिका, मध्याह्न में यौवना और सायंकाल में प्रौढ़ स्वरूप में दर्शन देती हैं. इसी मान्यता के चलते देवी को त्रिपुरा सुंदरी कहा जाता है. एक अन्य मान्यता के अनुसार, मंदिर के आसपास शक्तिपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी नामक तीन पुरियों की उपस्थिति के कारण देवी का नाम त्रिपुरा सुंदरी पड़ा.

पीएम मोदी से लेकर कई दिग्गज नेता कर चुके हैं दर्शन
मां त्रिपुरा सुंदरी के दरबार की देशभर में विशेष आस्था है. मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना देवी पूरी करती हैं. मंदिर की धार्मिक प्रतिष्ठा के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, हरिदेव जोशी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां यहां दर्शन कर चुकी हैं.

देश के कई राज्यों से आते हैं भक्त
नवरात्रि के दौरान बांसवाड़ा, तलवाड़ा, परतापुर और डूंगरपुर सहित गुजरात, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. नौ दिनों तक मंदिर में भक्तों की आवाजाही बनी रहती है. पंचाल समाज सहित विभिन्न समुदायों के श्रद्धालुओं में नवरात्रि पर्व को लेकर विशेष उत्साह है.

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गरबा रास के लिए तैयार किया विशेष डोम पांडाल
मंदिर श्री त्रिपुरा सुंदरी व्यवस्थापक मंडल की और से इस बार गरबा रास के आयोजन के लिए विशेष डोम पांडाल तैयार किया गया है. मंदिर परिसर में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है। नवरात्र के दौरान धार्मिक आयोजनों और मां के दर्शन के साथ गरबा रास श्रद्धालुओं के उत्साह को और बढ़ा रहा है.

सात दिन अलग-अलग श्रृंगार 
मां त्रिपुरा सुंदरी का श्रंगार सप्ताह में रोजाना अलग अलग होता है, सातों दिन मां त्रिपुरा की विशेष सजावत की जाती है और अलग-अलग पकवानों का भोग लगाया जाता है.

मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर राजनीति हवन भी होता है, यहां पर देश के कई राज्यों के नेता यहां राजनीति हवन भी कराते हैं. मान्यता के अनुसार, माता के मंदिर में राजयोग पाने के लिए कई नेता यहां हवन करवाते हैं.

तरताई माता के नाम से जानी जाती है मां 
त्रिपुरा सुंदरी मां को तरताई माता के नाम से भी जाना जाता है, यहां मान्यता है कि यहां भक्त जो भी मां से मनोकामना मांगता है तो मां तुरंत उसे पूरा करती है, जिस वजह से मां को तरताई माता भी कहते हैं.

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मंदिर का इतिहास 
राजराजेश्वरी मां श्री त्रिपुरा सुन्दरी का यह मन्दिर सम्राट कनिष्क काल से पूर्व का है. इस क्षेत्र में गढपोली नायक महानगर था,जिसके तीन दुर्गो सीतापुरी, शिवपुरी, और विष्णुपुरी के मध्य स्थित यह एक शक्ति पीठ है. पुष्ट प्रमाण के अनुसार, विक्रम संवत् 1157 में इस क्षेत्र के पाताभाई लुहार (पंचाल) द्वारा इस मन्दिर का प्रथम बार जीणोद्वार करवाया गया था.

सन् 1930     और दोबारा सन् 1992 में पुराने मन्दिर पर पत्थर का शिखर और स्वर्ण शिखर की प्रतिष्ठा की गई. सन् 1981 में 109 कुण्डीय महायज्ञ सम्पन्न हुआ. 5 अप्रेल 2006 को मंदिर के ईशानकोण में स्वर्णकिर्ति स्तम्भ की प्रतिष्ठा की गई. साल 2006-2007 में राजस्थान सरकार द्वारा मंदिर के बाहरी परिसर का सौन्दर्योंकरण कार्य करवाकर मंदिर ट्रस्ट को समर्पित कर दिया गया. आधुनिक युग में यह भारत का पहला मंदिर है, जिसमें लगी प्रत्येक शिला (पत्थर) को हवनात्मक पूजन कर प्राण प्रतिष्ठित किया गया है.

हर साल 5 किलोमीटर लंबी चुनरी जाती है चढ़ाई 
नवरात्रि के अवसर पर मां त्रिपुरा सुंदरी को एमपी के इंदौर और उसके आसपास रहने वाले पंचाल समाज के लोग 5 किलोमीटर लंबी चुनरी चढ़ाते हैं. 

Report- Ajay Ojha

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मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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