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Tonk News: टोंक जिले के हाड़ी खुर्द गांव के रहने वाले एथलीट धर्मवीर चौधरी एशियन गेम्स में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर अपने गांव लौटे तो ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया. गांव पहुंचते ही साथी खिलाड़ियों और ग्रामीणों ने धर्मवीर को कंधों पर उठा लिया. महिलाओं ने नृत्य कर खुशी जताई और मिठाई खिलाकर धर्मवीर का सम्मान किया. धर्मवीर ने बताया कि उनकी टीम ने स्वर्ण पदक के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन मामूली अंतर से गोल्ड से चूक गए. वहीं, धर्मवीर के पिता ने भावुक होकर बताया कि बेटे ने जापान से उनके लिए मेडल लाने का वादा किया था और वह वादा पूरा कर दिया.
गांव पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत
जापान में आयोजित एशियन गेम्स में पुरुषों की 4×400 मीटर रिले में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाली टीम के सदस्य धर्मवीर चौधरी का उनके पैतृक गांव हाड़ी खुर्द पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया. जयपुर से टोंक तक रास्ते में जगह-जगह सम्मान के बाद धर्मवीर गांव पहुंचे तो ग्रामीणों और स्थानीय एथलीट्स ने उन्हें कंधों पर उठा लिया और स्वागत मंच तक लेकर पहुंचे.
सेना में हवलदार हैं धर्मवीर
सेना में हवलदार के पद पर तैनात धर्मवीर का सफर गांव की सड़कों और टोंक के खेल स्टेडियम से शुरू हुआ था. सेना में भर्ती होने के सपने के साथ दौड़ शुरू करने वाले धर्मवीर ने वर्ष 2022 में स्पोर्ट्स कोटे से सेना में नौकरी हासिल की. इसके बाद लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अपनी पहचान बनाई.

एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी जीता सिल्वर
धर्मवीर इससे पहले कोरिया में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी 4×400 रिले में सिल्वर मेडल जीत चुके हैं. एशियन गेम्स में उनकी टीम ने गोल्ड मेडल के लिए पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन बेहद मामूली अंतर से स्वर्ण पदक हाथ से निकल गया.
धर्मवीर ने बताया कि मेडल सेरेमनी के बाद कोच और एथलेटिक्स एसोसिएशन के अधिकारियों ने भी उन्हें और उनके साथियों को जमकर डांट लगाई. सभी को उम्मीद थी कि टीम देश के लिए गोल्ड मेडल जीतेगी. हालांकि, कांस्य पदक मिलने की खुशी भी रही.
विथ्या रामराज की दौड़ से मिली प्रेरणा
धर्मवीर ने बताया कि उनके इवेंट से एक दिन पहले भारतीय महिला रिले टीम के शानदार प्रदर्शन और खासकर विथ्या रामराज की दौड़ ने उन्हें काफी प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि विथ्या रामराज आने वाले समय में देश के लिए कई और पदक जीत सकती हैं.
मां की खुशी
धर्मवीर की मां उस वक्त खेत में ज्वार काट रही थीं, जब उन्हें बेटे के मेडल जीतने की खबर मिली. धर्मवीर के बचपन के दोस्त नंदू ने मोबाइल पर उन्हें यह खुशखबरी दी. मां ने बताया कि बेटे के पदक जीतने की खबर सुनकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने खेत में ज्वार भी ज्यादा काटी.
पिता से किया वादा निभाया
धर्मवीर के पिता ने बताया कि प्रतियोगिता से एक दिन पहले बेटे ने जापान से फोन कर पूछा था कि पापाजी, आपके लिए जापान से क्या लेकर आऊं. पिता ने कहा कि वहां के कपड़े या दूसरी चीजें उनके काम की नहीं हैं, इसलिए उनके लिए मेडल लेकर आना. धर्मवीर ने गोल्ड तो नहीं, लेकिन कांस्य पदक जीतकर पिता से किया वादा पूरा कर दिया.
अब ओलंपिक पर नजर
धर्मवीर ने कहा कि अब उनकी नजर आगामी अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप और ओलंपिक पर है. उन्होंने कहा कि 4×400 रिले में चंद सेकंड का अंतर ही पदक का फैसला करता है. टीम अब और कड़ी मेहनत करेगी और अगली प्रतियोगिताओं में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य रहेगा.