RCA चुनाव से पहले 363 पन्नों का राज! 160 करोड़ के स्टेडियम से 6.70 करोड़ के भुगतान तक उठे सवाल
RCA Election 2026: राजस्थान क्रिकेट संघ यानी RCA के 2026-29 चुनाव से पहले अगस्त 2024 में दर्ज एक FIR फिर चर्चा में है. 363 पन्नों की रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर दर्ज शिकायत में पूर्व पदाधिकारियों और अन्य लोगों पर करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं, धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज, रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे.
Rajasthan Cricket Association: राजस्थान क्रिकेट संघ यानी RCA के 2026-29 चुनाव से पहले करीब दो साल पुरानी एक FIR फिर चर्चा में आ गई है. यह मामला RCA की पूर्व कार्यकारिणी के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है. इसमें करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं, धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे. 8 अगस्त 2024 को जयपुर के ज्योति नगर थाने में दर्ज FIR में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 419, 420, 467, 468, 201 और 120-B के तहत मामला दर्ज किया गया था.
यह शिकायत RCA की तत्कालीन Ad-hoc Committee की ओर से पुलिस को दी गई थी. समिति के कन्वीनर एवं भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी के साथ विमल शर्मा, धर्मवीर सिंह और रतन सिंह ने संयुक्त रूप से रिपोर्ट दी थी. शिकायत में RCA के पूर्व पदाधिकारियों भवानी शंकर सामोता, रामपाल शर्मा, राजेश भड़ाना समेत अन्य लोगों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए. शिकायत में तत्कालीन अध्यक्ष वैभव गहलोत सहित अन्य पूर्व पदाधिकारियों का भी उल्लेख किया गया था.
363 पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर हुई शिकायत
शिकायतकर्ताओं के अनुसार RCA की पूर्व कार्यकारिणी को लेकर रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव के 28 मार्च 2024 के आदेश के बाद एडहॉक कमेटी का गठन किया गया था. कमेटी की ओर से पूर्व पदाधिकारियों से RCA से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया. शिकायत में आरोप लगाया गया कि रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में टालमटोल की गई. इसी दौरान रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने के प्रयास का भी आरोप लगाया गया.
इसके बाद एडहॉक कमेटी ने उपलब्ध Physical और Electronic रिकॉर्ड की जांच कराई. वित्तीय विशेषज्ञों से भी संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण करवाया गया. इसी प्रक्रिया से तैयार ऑडिट और ऑब्जर्वेशन रिपोर्ट को पुलिस शिकायत का आधार बनाया गया था. शिकायत के साथ करीब 363 पन्नों की रिपोर्ट और दस्तावेजी सामग्री होने का उल्लेख किया गया है. यही 363 पन्नों की रिपोर्ट अब RCA चुनाव से पहले एक बार फिर चर्चा में है.
चकदे एंटरप्राइजेज को 1.41 करोड़ के भुगतान पर सवाल
FIR में चकदे एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े भुगतान पर भी सवाल उठाए गए हैं. शिकायत के अनुसार 7 दिसंबर 2022 के कथित कूटरचित बिल के आधार पर कंपनी को बिजनेस कंसल्टेंसी सर्विस के नाम पर 1.41 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित कंपनी कपड़े के कारोबार से जुड़ी थी. ऐसे में उसे बिजनेस कंसल्टेंसी का काम दिए जाने की प्रक्रिया की जांच की जरूरत बताई गई.
इस भुगतान को लेकर शिकायत में बिल, काम और भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के दौरान संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों के परीक्षण से होनी है.
भारत-न्यूजीलैंड मैच से जुड़े भुगतान भी FIR में
FIR में भारत-न्यूजीलैंड मैच के दौरान सवाई मानसिंह स्टेडियम में हुए रिनोवेशन, रिपेयर और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े कामों का भी उल्लेख है. शिकायत के अनुसार हरदयाल कंस्ट्रक्शन एंड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को इन कामों से संबंधित जिम्मेदारी दी गई थी. आरोप लगाया गया कि निविदा प्रक्रिया के बाद कंपनी को दरकिनार कर पसंदीदा कंपनी को काम दिया गया और करीब 4 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया.
इसके अलावा कैटरिंग, टेंट और अन्य व्यवस्थाओं के लिए महज 10 दिनों में करीब 5.30 करोड़ रुपये के भुगतान का भी उल्लेख FIR में किया गया है. शिकायतकर्ताओं ने इन भुगतानों और उनसे जुड़े कामों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं.
RPL पर करीब 25 करोड़ रुपये के खर्च का दावा
राजस्थान प्रीमियर लीग यानी RPL से जुड़े खर्च भी FIR में महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. शिकायत के अनुसार छह कंपनियों से करीब 1.75 करोड़ रुपये की स्पॉन्सरशिप राशि अपेक्षित थी, लेकिन पूरी राशि संस्था को प्राप्त नहीं होने का आरोप लगाया गया. इसके बावजूद RPL पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा शिकायत में किया गया है.
Sports Excel को लेकर भी FIR में गंभीर आरोपों का उल्लेख है. शिकायत के अनुसार कंपनी को 17 अगस्त 2023 को वर्क ऑर्डर जारी किया गया, जबकि उस तारीख को कंपनी GST में पंजीकृत नहीं थी. आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद कंपनी को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया और पुराने तारीखों के दस्तावेज तैयार किए गए. शिकायत में उठाए गए इन आरोपों की पुष्टि जांच के दौरान दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के परीक्षण से होनी है.
अतुल पब्लिसिटी को 6.70 करोड़ के भुगतान का उल्लेख
FIR में अन्य कंपनियों से जुड़े भुगतान और काम भी जांच के दायरे में बताए गए हैं. विनायक इन्फोटेक को LED वर्क के नाम पर कथित फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया. वहीं अतुल पब्लिसिटी को लाइव OTT ब्रॉडकास्ट और प्रोडक्शन सर्विसेज के नाम पर करीब 6.70 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का उल्लेख है.
शिकायतकर्ताओं ने इन मामलों में वर्क ऑर्डर जारी करने और भुगतान के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. इसके अलावा जयपुर कंस्ट्रक्शन, मेहता एंड एसोसिएट्स और संचार इंफ्राटेक से जुड़े भुगतान और ठेकों की भी जांच की मांग की गई.
शिकायत में मेहता एंड एसोसिएट्स को करीब 3.65 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का उल्लेख है. वहीं संचार इंफ्राटेक को क्रिकेट पिच निर्माण का काम दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. इन सभी मामलों में संबंधित दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग शिकायत में की गई थी.
चौंप स्टेडियम के करीब 160 करोड़ के प्रोजेक्ट पर भी सवाल
FIR में सबसे बड़े वित्तीय मामलों में चौंप, जयपुर स्थित नए क्रिकेट स्टेडियम का प्रोजेक्ट भी शामिल है. शिकायत के अनुसार इस प्रोजेक्ट के लिए 21 जुलाई 2021 को टेंडर जारी किया गया था और अंतिम तारीख 28 अगस्त 2021 तय की गई थी. आरोप है कि अंतिम तारीख के बाद टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किया गया और DB Projects Ltd. को ठेका दिया गया.
शिकायत में कहा गया कि L&T और TATA Projects जैसी बड़ी कंपनियों ने टेंडर दस्तावेज खरीदे थे. इसके बावजूद प्रक्रिया में बदलाव किए जाने पर सवाल उठाए गए. DB Projects को करीब 160 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का उल्लेख शिकायत में है. वहीं रिकॉर्ड में कंपनी की ओर से करीब 153 करोड़ रुपये के बिल प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है.
शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले में किए गए भुगतानों के भौतिक सत्यापन और संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग की. यानी स्टेडियम प्रोजेक्ट में टेंडर प्रक्रिया से लेकर भुगतान और बिलों तक की जांच की मांग शिकायत का हिस्सा रही.
दो साल बाद भी जांच की स्थिति पर सवाल
RCA में चुनावी प्रक्रिया के बीच इस FIR के फिर चर्चा में आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल जांच की स्थिति को लेकर है. FIR दर्ज हुए करीब दो साल हो चुके हैं. पुलिस दस्तावेज के अनुसार मामले का अनुसंधान SI ओमप्रकाश वाल्मीकि को सौंपा गया था.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 363 पन्नों की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की जांच अब तक किस स्तर तक पहुंची है. कितने दस्तावेजों का सत्यापन किया गया, संबंधित कंपनियों और पूर्व पदाधिकारियों से क्या पूछताछ हुई और क्या किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई, इन सवालों का जवाब जांच की प्रगति से ही सामने आएगा.
RCA चुनाव 2026-29 से पहले पुराने मामले का दोबारा चर्चा में आना संघ के वित्तीय प्रबंधन, टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है. हालांकि FIR और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और दस्तावेजी परीक्षण के आधार पर ही होनी है. फिलहाल 363 पन्नों की रिपोर्ट में दर्ज आरोप और उनसे जुड़े भुगतान, टेंडर और कामों की प्रक्रिया एक बार फिर RCA चुनाव के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.