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सिर्फ 30 रुपये में एंटीबायोटिक की जांच और पसीने से डिहाइड्रेशन का अलर्ट, जानिए 15 वर्षीय ध्रुव के दो शानदार प्रोटोटाइप

जयपुर के 15 साल के ध्रुव शर्मा ने छोटी उम्र में बड़ी सोच दिखाते हुए हेल्थ सेक्टर में दो नए इनोवेशन्स के शुरुआती मॉडल यानी प्रोटोटाइप तैयार किए हैं. ध्रुव ने एक ऐसी स्ट्रिप बनाने पर काम किया है, जिसका मकसद एंटीबायोटिक दवाओं के असली या नकली होने की शुरुआती जांच करना है

Reported By Ashutosh Sharma
Published: Oct 17, 2026, 08:51 AM IST | Updated: Oct 17, 2026, 09:28 AM IST
Image Credit: जयपुर के 15 वर्षीय ध्रुव के दो शानदार प्रोटोटाइप
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ध्रुव शर्मा के इस इनोवेशन में दूसरी स्ट्रिप से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट के लेवल और पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) का पता लगाने की योजना है. ध्रुव कम खर्च में ऐसी तकनीक बनाना चाहते हैं, जिसका फायदा आम लोगों तक पहुंच सके. ध्रुव को इन इनोवेशन्स की प्रेरणा अपने पिता डॉ. ऋषि शर्मा से मिली, जो इम्यूनोलॉजी और कैंसर के इलाज के क्षेत्र से जुड़े हैं. घर में दवाओं के बेअसर होने और सेहत से जुड़ी समस्याओं पर होने वाली बातचीत ने ध्रुव को नए उपाय ढूंढने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने ऐसी तकनीक पर काम करने का सोचा, जिसे इस्तेमाल करना आसान हो और जिसकी कीमत भी कम रखी जा सके.

30 से 35 रुपये में एंटीबायोटिक की जांच का लक्ष्य
ध्रुव एंटीबायोटिक जांच स्ट्रिप को लगभग 30 से 35 रुपये की लागत में तैयार करने का लक्ष्य रखकर चल रहे हैं. इस तरीके के मुताबिक, दवा के थोड़े से हिस्से को पानी में मिलाकर स्ट्रिप पर डालने से उसके असली होने का इशारा मिल सकेगा. इस नई खोज का अधिकार अपने नाम सुरक्षित कराने (पेटेंट) के लिए अर्जी भी दी गई है.

नकली और खराब क्वालिटी की दवाओं की पहचान करना हेल्थ के क्षेत्र में एक बड़ी चुनौती है. हालांकि, इस तकनीक के सही इस्तेमाल के लिए इसकी सटीकता, भरोसेमंदी और अलग-अलग दवाओं पर इसके असर का वैज्ञानिक टेस्ट होना जरूरी होगा.

दूसरी स्ट्रिप से इलेक्ट्रोलाइट और पानी की कमी का संकेत
ध्रुव की दूसरी खोज शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी का इशारा देने से जुड़ी है. इसे खिलाड़ियों, जिम जाने वालों और मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों के लिए काम का बनाने की सोच है. इसके साथ एक मोबाइल ऐप का आइडिया भी तैयार किया गया है, ताकि जांच से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जा सकें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर को दिखाते समय उनका इस्तेमाल किया जा सके.

पेटेंट से बड़े पैमाने पर बनाने तक का सपना
ध्रुव अपने पिता और स्कूल के टीचरों की मदद से इन मॉडल्स पर काम कर रहे हैं. उनकी योजना अलग-अलग प्रतियोगिताओं में इन्हें दिखाने और आने वाले 5 सालों में बड़े स्तर पर इनके निर्माण की तरफ आगे बढ़ने की है. ध्रुव की ये कोशिश दिखाती है कि वैज्ञानिक सोच और नई समस्याओं के समाधान की तलाश कम उम्र में भी शुरू हो सकती है. अब इन तकनीकों की सफलता इनके वैज्ञानिक टेस्ट, जरूरी सरकारी मंजूरियों और सही इस्तेमाल पर निर्भर करेगी. अगर ये सभी कदम सफल रहते हैं, तो कम खर्च वाली जांच तकनीक बनाने की दिशा में यह कदम बहुत जरूरी साबित हो सकता है.

 

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About the Author

आशुतोष शर्मा वर्ष 2011 से मुख्यधारा की मीडिया में सक्रिय एक वरिष्ठ पत्रकार हैं. डेढ़ दशक से अधिक के अपने समृद्ध पत्रकारिता करियर में उन्होंने इंडिया न्यूज़,ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ नेशन जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों के साथ काम किया है. वर्तमान में वे ज़ी राजस्थान न्यूज़ में सीनियर स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में कार्यरत हैं और राजधानी जयपुर से राज्य के महत्वपूर्ण विषयों को कवर कर रहे हैं.उनकी मुख्य विशेषज्ञता राजस्थान की राजनीति,प्रशासनिक फैसलों,चुनाव और जनहित के मुद्दों के साथ-साथ अपराध और कानून-व्यवस्था की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग में है. पुलिस मुख्यालय (PHQ), जयपुर पुलिस कमिश्नरेट और विभिन्न जांच एजेंसियों से जुड़े बड़े व चर्चित मामलों की एक्सक्लूसिव कवरेज उनकी पत्रकारिता की प्रमुख पहचान रही है. ब्रेकअप न्यूज़,गहन राजनीतिक विश्लेषण और एक्सक्लूसिव क्राइम स्टोरीज़ के ज़रिए आशुतोष शर्मा ने राजस्थान मीडिया जगत में अपनी एक विश्वसनीय और प्रभावशाली पहचान बनाई है.
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