नाना पाटेकर का पुणे स्थित 27 एकड़ का फार्महाउस उनके लिए सिर्फ एक प्रॉपर्टी नहीं, यह जगह उन्हें शहर और फिल्मी दुनिया की भागदौड़ से दूर ले जाती थी. यहां अभिनेता खेती-किसानी और प्रकृति के बीच समय बिताकर अपने बचपन की यादों को फिर से जीते थे.
नाना पाटेकर के निधन से पूरे देश को गहरा सदमा लगा है. वे न केवल एक बेहतरीन अभिनेता के तौर पर जाने जाते थे, बल्कि एक ऐसे इंसान भी थे जिन्होंने महाराष्ट्र में भीषण सूखे, पानी की किल्लत और किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं के बीच किसानों और उनके परिवारों की जिंदगी को फिर से संवारने में मदद की. देश उनके निधन पर शोक मना रहा है और अभिनेता का अंतिम संस्कार पुणे में सिंहगढ़ रोड के पास डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा. यह वही जगह थी जहां नाना अपना ज़्यादातर समय बिताते थे, खेती-बाड़ी करते थे, कसरत करते थे. गणेश चतुर्थी मनाते थे और कभी-कभी अपने आउटडोर किचन में खाना बनाकर दोस्तों और काम करने वालों को खिलाते थे. उन्होंने इसे बहुत प्यार और जतन से बनाया था और उन्हें वहां सुकून मिलता था. 27 एकड़ में फैले नाना के फार्महाउस में एक सुंदर घर था, जिसके चारों ओर खेती की जमीन थी. वहां वे गेहूं, चावल, दालें और सब्जियां उगाते थे. जब भी उन्हें फुरसत मिलती. तो नाना न सिर्फ़ खेत में काम करते, बल्कि वहां काम करने वाले लोगों के लिए खाना भी बनाते थे.
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फार्महाउस के बारे में क्या बोले थे नाना?
अमिताभ बच्चन के शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में शामिल होने के दौरान नाना ने इस बात को नकार दिया कि वह बॉलीवुड स्टार हैं. उन्होंने कहा कि दिल से वह एक गांव वाले ही हैं. अपने फार्महाउस के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा था, 'मैं गांव का रहने वाला हूं और हमेशा वैसा ही रहूंगा. मुझे वहां रहना पसंद है. मुझे ऐसा लगता है जैसे मेरा बचपन वापस मिल गया हो. हमारे चारों ओर पहाड़ हैं और हम उनके बीच में रहते हैं.'
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स्टारड के बावजूद सादा जीवन जीते थे एक्टर
सादा जीवन अपनाने के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा था, 'सुबह-सुबह 25-30 मोर आते हैं. बहुत मजा आता है. बहुत शांति है, जिंदगी बहुत सादी है. मुझे अपनी उम्मीद से कहीं ज्यादा मिला है. जब जरूरतें कम हों, तो जिंदगी बहुत आसान हो जाती है.' उन्होंने अमिताभ बच्चन को भी अपने व्यस्त शेड्यूल से ब्रेक लेकर उनके साथ गांव में एक हफ्ता बिताने के लिए बुलाया था. आशीष विद्यार्थी के व्लॉग पर बात करते हुए नाना ने खाना पकाने के अपने शौक के बारे में बताया और कहा कि वे अक्सर अपने फ़ार्महाउस पर काम करने वालों के लिए खाना बनाते थे. उन्होंने कहा था, 'अभी मेरा घर बन रहा है, इसलिए हर पंद्रह दिन में मैं कम से कम 110 मजदूरों के लिए खाना बनाता हूं.'
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जमीन से जुड़े रहना नाना को था पसंद
इतनी शोहरत दौलत और जिंदगी के आखिरी दिनों तक चले करियर के बावजूद नाना ने सादा और जमीन से जुड़े जीवन को ही पसंद किया और उनका फार्महाउस शायद इस बात का सबसे बड़ा सबूत था. यह प्रॉपर्टी पत्थर की मोटी दीवारों से सुरक्षित है और इसके बड़े हरे रंग के मुख्य गेट से 27 एकड़ में फैली विशाल एस्टेट में प्रवेश किया जाता है. गेट के अंदर नाना का मुख्य घर, एक अलग गेस्ट हाउस, बरामदे, आंगन और खेती के लिए बड़ी जमीन है.
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यहीं मिलता था मन को सुकून
इस फार्महाउस में पारंपरिक कारीगरी का मेल ग्रामीण घर के सुकून भरे और सहज माहौल के साथ होता है. इसके इंटीरियर में मुख्य रूप से प्राकृतिक पत्थर की दीवारें, लकड़ी के बीम और खंभे, ऊंची लकड़ी की छतें, टेराकोटा टाइल वाली छतें और पत्थर की फर्श का इस्तेमाल किया गया है.
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खुद खाना बनाते थे एक्टर
लकड़ी के बड़े पारंपरिक दरवाजे, नक्काशीदार लकड़ी का फर्नीचर, बेंत की पीठ वाली कुर्सियां, एंटीक स्टाइल की अलमारियां, रॉकिंग चेयर और हाथ से बनी सजावटी चीजें इसके पुराने जमाने के आकर्षण को और बढ़ाती हैं.
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27 एकड़ में बसती थी सादगी
इसके इंटीरियर में पुराने जमाने के भारतीय फर्नीचर, प्राकृतिक मटीरियल, हल्के अर्थी टोन और खुली-खुली जगहें एक साथ देखने को मिलती हैं. साथ ही बीच-बीच में रंगों का इस्तेमाल इसे गर्माहट और एक खास अंदाज देता है. बड़ी खिड़कियों और खुले बरामदों से घर के अंदर हरियाली और प्राकृतिक रोशनी आती थी, जबकि आंगन, पत्थर के रास्ते और बाहर बैठने की जगह ने उसी डिजाइन शैली को आस-पास के बाहरी हिस्से तक भी फैला दिया.
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27 एकड़ का फार्महाउस और सादगी भरी जिंदगी
यह सिर्फ एक फार्महाउस नहीं था. यह एक ऐसी जगह थी जहां नाना खेती करते थे. खाना बनाते थे, त्योहार मनाते थे, दोस्तों का स्वागत करते थे, काम करने वालों के साथ समय बिताते थे और उन लोगों के बीच एक शांत जिंदगी की कल्पना करते थे जिनसे वे प्यार करते थे.