दीपावली जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, वैसे ही बाजार में कुम्हारों के हाथों से बने मिट्टी के दीयों की डिमांड बढ़ने लगी है. गिरिडीह के पचम्बा की कुम्हार टोली में इन दिनों हर घर से चाक घूमने की आवाज आ रही है.
पचम्बा की कुम्हार टोली का पूरा इलाका ही मिट्टी की सोंधी महक से भरा है. आंगन-आंगन में हजारों दीये कतार में सूख रहे हैं. दीपावली नजदीक है और इसी दीपावली के लिए पूरा इलाका दिन-रात मेहनत में जुटा है.
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मिट्टी की कहानी के सबसे पुराने गवाह
इसी टोली के 62 साल के नुनूलाल प्रजापति इस मिट्टी की कहानी के सबसे पुराने गवाह हैं. दादा कुम्हार, पिता कुम्हार और अब वे खुद. 15 साल की उम्र में जब हाथों में किताब होनी चाहिए थी, तब नुनूलाल के हाथों ने मिट्टी गूंथना सीख लिया था. तब से आज तक उनके हाथों ने लाखों दीये, चुकड़ी, खिलौने और कपटी बनाए हैं.
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20 हजार दीये अकेले किए तैयार
इस बार भी उन्होंने अकेले 20 हजार दीये तैयार किए हैं. गिरिडीह के टावर चौक पर उनकी खुद की दुकान लगती है, जहां एक दीया 70-80 पैसे और खिलौना 45-50 रुपये में बिकता है, लेकिन इस कहानी में एक ऐसा मोड़ भी आया जब लगा सब खत्म हो जाएगा.
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70 पैसे के दीये को लोग भूले
नुनूलाल बताते हैं कि जब चाइनीज लाइट आई तो हमारे दीये कोई पूछता ही नहीं था. रंग-बिरंगी झालर के सामने हमारे 70 पैसे के दीये को लोग भूल गए. 4-5 साल तक बहुत बुरा हाल रहा. दुकान पर ग्राहक नहीं आता था. लगता था दादा-पिता की विरासत अब खत्म हो जाएगी.
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टोली के बाकी कुम्हारों का भी यही हाल
राजकिशोर प्रजापति कहते हैं कि हम भी बचपन से यही काम कर रहे हैं. चाइनीज लाइट के कारण सोचा था अब दूसरा काम करना पड़ेगा, लेकिन मिट्टी ने हमें छोड़ने नहीं दिया.
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झालर के चक्कर में लोग मिट्टी भूल गए
अशोक प्रजापति कहते हैं कि बीच में बाजार एकदम बैठ गया था. सस्ती झालर के चक्कर में लोग मिट्टी भूल गए थे, लेकिन अब लोग समझ गए हैं कि पूजा मिट्टी के दीये के बिना नहीं होती.
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चाइनीज लाइट ने हमारी रोटी पर मार की
धन्नू प्रजापति कहते हैं कि हम मिट्टी के लोग हैं. चाइनीज लाइट ने हमारी रोटी पर मार की थी, पर हमारी कला को खत्म नहीं कर पाई. अब ग्राहक खुद आकर मिट्टी का दीया मांगता है तो लगता है हमारी मेहनत रंग लाई.
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मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ गई
दीपावली असल में मिट्टी के दीये का ही त्योहार है. शास्त्रों में कहा गया है कि मिट्टी का दीया पांच तत्वों से बना होता है और उसकी रोशनी घर में सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता लाती है.
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मिट्टी के दीये में संस्कार और आशीर्वाद
चाइनीज लाइट में चमक है, लेकिन मिट्टी के दीये में संस्कार और आशीर्वाद है. लक्ष्मी पूजन मिट्टी के दीये के बिना अधूरा है. इसलिए गिरिडीह बाजार में फिर से मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ गई है. लोग टोली तक आकर ऑर्डर दे रहे हैं.
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मिट्टी के दीये की जगह कोई नहीं ले सकता
पचम्बा की यह टोली आज एक बात साबित कर रही है-बाजार में चाहे कितनी भी चाइनीज लाइटें क्यों न आ जाएं, कुम्हारों के हाथों से बने मिट्टी के दीये की जगह कोई नहीं ले सकता. चाइनीज लाइटों के सामने आज भी वही भारी हैं.
रिपोर्ट: मृणाल सिन्हा