Vande Bharat Express: भारतीय रेलवे की सबसे तेज रफ्तार ट्रेन वंदे भारत जब घने जंगलों के बीच से गुजरती, तो सफर खूबसूरत तो था, लेकिन सबसे खतरनाक भी रहा.
Vande Bharat Express Facts: रेल नेटवर्क के मामले भारत दुनिया में चौथे नंबर पर है. कोयले और भाप इंजन से होते हुए अब भारतीय रेलवे वंदे भारत की रफ्तार से दौड़ रही है और जल्द ही बुलेट की स्पीड पकड़ लेगी.
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ऑटो इमरजेंसी ब्रेक सिस्टम
पहाड़ी ढलानों और तीखे मोड़ों को देखते हुए इस रूट पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में ऑटो इमरजेंसी ब्रेक (AEB) सिस्टम लगाया गया है. सीधी ढलान पर स्व-चालित (Self-Propelled) ट्रेनसेट को संभालना आसान नहीं होता, इसलिए इस ट्रेन में AEB ब्रेक सिस्टम लगाया गया है.
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93.5 करोड़ रुपये का खर्च
इस रूट को बनाने में 2 साल की कड़ी मेहनत और करीब 93.5 करोड़ रुपये का खर्च किया गया. पूरे सेक्शन का इलेक्ट्रिफिकेशन किया गया है. घने जंगलों, भूस्खलन वाले इलाकों में ओवरहेड वायर लगाए गए हैं. सबसे चुनौतीपूर्ण टास्क यही था.
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रोलर-कोस्टर जैसी ट्रेन जर्नी
वेस्टर्न घाट के पहाड़ी ढलाओं पर बने मोड़ ट्रेन की राइड को रोलर-कोस्टर जैसा रोमांच देते हैं. इस रास्ते 1:50 की सीधी खड़ी ढलान (Gradient) का बैलेंस बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है.
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55KM के रास्ते में क्या-क्या
बेंगलुरु-मंगलुरु रेल मार्ग के इस हिस्से को 'शिराडी घाट सेक्शन' कहते हैं. इस रूट पर वंदे भारत का ट्रायल किया जा रहा है. पहले राउंड को पूरपा कर लिया गया है. अगर सारे ट्रायल सफल रहे, तो बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस को चलाने का रास्ता साफ हो सकता है. ये रेल मार्ग देखने में जितना खूबसूरत हैं, उतना ही खतरनाक. सकलेशपुर से सुब्रह्मण्य रोड के बीच का यह 55 किलोमीटर लंबा पैच बेहद खतरनाक है. इस रूट पर पहाड़ों को काटकर 57 सुरंगें बनाई गई है. 226 पुल, 108 तीखे मोड़ हैं.
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ऑरेंज स्नैक ऑफ इंडिया
दक्षिण पश्चिम रेलवे ने बेंगलुरु-मंगलुरु रेल मार्ग पर सबसे चुनौतीपूर्ण सकलेशपुर-सुब्रहमण्य रोड घाट पर वंदे भारत एक्सप्रेस की टेस्टिंग की गई है. वेस्टर्स घाट का यह इलाका घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और हरियाली के लिए जाना जाता है. हरी-भरी पहाड़ियों और घने कोहरे के बीच दौड़ती वंदे भारत एक्सप्रेस का शानदार एरियल वीडियो खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शेयर किया.
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देश में 79 वंदे भारत
2019 में पहली बार पटरी पर दौड़ने वंदे भारत ने अब तक 79 का आंकड़ा पार कर लिया है. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी ये ट्रेन दौड़ती है. पहली बार जब ये ट्रेन वेस्टर्न घाट पहुंची, तो नजारा देखने वाला था. घने जंगलों के बीच से जब वंदे भारत को चलाने का पहला ट्रायल पूरा किया गया. ये नजारा ऐसा था, मानो कोई 'नारंगी सांप' जंगल के बीच से गुजर रहा है.