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Zee News Investigation: हिंदुओं के लिए बांग्लादेश में बजी खतरे की घंटी! पुराने नेटवर्क एक्टिव कर रहे उग्रवादी; कब थमेगा जुल्म?

बांग्लादेश में उग्रवादी और चरमपंथी फिर से अपना नेटवर्क एक्टिव करने में जुटे हैं. इस वजह से बांग्लादेश में अब हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए खतरा पैदा हो गया है. इसके अलावा 2024 में जो चरमपंथी जेल से भागे थे, उनको पकड़ना भी चुनौती बन गया है.

Edited By Rachit Kumar
Published: Aug 27, 2026, 11:12 AM IST | Updated: Sep 04, 2026, 10:16 AM IST
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Bangladesh Minorities: बांग्लादेश में जमानत पर रिहा हुए संदिग्ध उग्रवादी और चरमपंथी अब कथित तौर पर अपने पुराने नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं. लिहाजा लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसियों के लिए न सिर्फ नई चुनौती बल्कि अल्पसंख्यकों के लिए बांग्लादेश में बड़ा खतरा पैदा हो गया है.

अब बांग्लादेश की लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसियां उन्हें ढूंढ निकालने का दावा कर रही हैं, ताकि कुख्यात कट्टरपंथियों एवं आतंकियों पर नजर रखी जा सके और उन्हें फिर से संगठित होने और देश में उग्रवादी गतिविधियां करने से रोका जा सके.

कानून-व्यवस्था नई चुनौती

अगस्त 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद कई संदिग्ध उग्रवादियों और चरमपंथियों की जमानत पर रिहाई कानून-व्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बनकर उभर रही है. क्योंकि रिहा हुए कुछ लोग कथित तौर पर उग्रवादी नेटवर्क से फिर से जुड़ गए है और वह लोग चरमपंथी गतिविधियों को दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं.

ढाका और उसके आस-पास हाल ही में बम मिलने, धमाकों और बम बनाने के ठिकानों का पता चलने से यह चिंता और भी ज्यादा बढ़ गई है. अंतरिम सरकार के दौरान रिहा किए गए संदिग्ध उग्रवादी फिर से संगठित होने के बाद अब यह कोशिश कर रहे हैं कि बांग्लादेश आतंकवादी गतिविधियों का गढ़ बन जाए.

इकरामुल के बारे में नहीं मिली कोई जानकारी

सबसे बड़ी चुनौती मौलाना इकरामुल हक है. 30 मई 2023 को ढाका के मदारटेक से गिरफ्तार किए गए इकरामुल की पहचान पुलिस ने 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) के सदस्य के तौर पर की गई थी. अबू तलहा, मौलाना साबित, नूर हुसैन, मंसूर और मिलोन जैसे कम से कम पांच नामों से पहचाने जाने वाले इकरामुल, 10 अक्टूबर 2024 को जमानत पर रिहा होने से पहले काशिमपुर हाई सिक्योरिटी सेंट्रल जेल में बंद थे.

लगभग 22 महीने बाद भी, लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसियों को उसके ठिकाने या उसके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. अल्पसंख्यकों के खिलाफ मोर्चा खोलने और देश में आतंक फैलाने जैसी गतिविधियों में वह शामिल रहा है.

मदरसे में पढ़ा रहा था इकरामुल

बांग्लादेश सूत्रों के मुताबिक, उसके पिता मोहम्मद जैनुल आबेदीन ने पुलिस को बताया है कि रिहाई के बाद से ही इकरामुल नारायणगंज के सनारपार इलाके के एक मदरसे में पढ़ा रहा था. लेकिन उन्हें उस मदरसे का नाम नहीं पता.

मैमनसिंह के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उसने इस संबंध में जानकारी दी थी और अपने सूत्रों से उसने भी पता लगाया था कि इकरामुल एक मदरसे में पढ़ा रहा था और अधिकारी उसे खोजने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन अभी तक उसका कुछ पता नहीं चल पाया है.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि इकरामुल सितंबर 2022 में गैर-कानूनी तरीके से बांग्लादेश में दाखिल हुआ और गिरफ्तारी होने तक उसने मैमनसिंह से AQIS की गतिविधियां चलाईं.

भारत में उस पर 10 मामले दर्ज

काउंटर टेररिज्म एंड ट्रांसनेशनल क्राइम (CTTC) के एक सूत्र ने बताया कि भारत में उसके खिलाफ 10 मामले दर्ज हैं. जांच करने वालों ने यह भी बताया कि वह AQIS की 'दावत' गतिविधियों में शामिल था और सदस्यों के लिए ऑनलाइन क्लास चलाता था.

अधिकारियों को आशंका है कि इकरामुल का मामला अकेला नहीं हो सकता. उसके साथ और भी कई कट्टरपंथी और आतंकी संगठनों के लोग हो सकते हैं जो कि किसी बड़ी योजना को अंजाम देने में लगे हैं.

कई चरमपंथियों को मिली थी जमानत

बांग्लादेश के काउंटर टेररिज्म एंड ट्रांसनेशनल क्राइम (CTTC) के एक सूत्र ने बताया कि सरकार बदलने के बाद फैली अशांति का फायदा उठाकर, 5 अगस्त 2024 के बाद कई संदिग्ध चरमपंथियों को जमानत मिल गई थी. बताया जाता है कि उनमें से कुछ अपने संगठनों के पुराने सदस्यों से गुपचुप तरीके से दोबारा जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं और किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक, एजेंसियां उनके बारे में जानकारी जमा कर रही हैं और साथ ही बताया कि जमानत पर रिहा किए गए लोगों पर नजर रखने की भी पूरी कोशिशें की जा रही हैं.

भारत में दे सकते हैं बड़ी आतंकी घटना को अंजाम

सूत्रों के मुताबिक, हाल की घटनाओं से संकेत मिलता है कि कुछ पूर्व संदिग्ध उग्रवादी अपने नेटवर्क को फिर से खड़ा करने और देश एवं पड़ोसी देश से भारत में भी एक बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं. इनमें नजमुल हसन मामून, जिसे 'बम-मेकर मामून' के नाम से भी जाना जाता है और जिसके बारे में (CTTC) सूत्रों का कहना है कि वह नियो-JMB से जुड़ा था, उसे सितंबर 2024 में जमानत पर रिहा किया गया था.

पुलिस ने मामून पर पंथापथ के होटल ओलियो में 2017 में हुए आत्मघाती धमाके में इस्तेमाल बम बनाने का आरोप लगाया था. इस धमाके में सैफुल इस्लाम की मौत हो गई थी.

13 पाइप बम हुए थे बरामद

इसी साल जनवरी में एक अदालत ने होटल ओलियो मामले में मामून और बाकी सभी आरोपियों को बरी कर दिया था. जांचकर्ताओं का दावा है कि उन्हें ऐसे सबूत मिले हैं, जो दिखाते हैं कि मामून और उसके साथी आरिफ का केरानीगंज, जात्राबाड़ी, कुमिला, सैयदबाद, मोतीझील और अशुलिया में दिसंबर से जुलाई के बीच हुई कई घटनाओं के पीछे हाथ था.

11 अगस्त को आरिफ की गिरफ्तारी के बाद, CTTC ने बताया कि उन्होंने श्यामपुर, सावर में उसके ठिकाने पर छापा मारा और 13 पाइप बम और विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल बरामद किए.

मामून की गिरफ्तारी के लिए चल रहा ऑपरेशन

CTTC मामून को गिरफ्तार करने के लिए ऑपरेशन चला रही है. उनका कहना है कि उसके पकड़े जाने से हाल की बम की घटनाओं के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है. एक और संदिग्ध, ज्वेल भुइयां उर्फ़ 'उस्ताद' को 16 अगस्त को डेमरा में गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस ने इसके पास से बम जैसी दो चीजें बरामद कीं. ये चीजें, जो लगभग छह इंच लंबी थीं और काले टेप से लिपटी हुई थीं. बाद में इनको डिएक्टिवेट कर दिया गया.

जेल से हो गया था फरार

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ज्वेल को 2023 में एंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था और बाद में 2024 में जेल से भागने की घटना के दौरान वह फरार हो गया था. दोबारा गिरफ्तारी के बाद उसे काशिमपुर जेल भेजा गया, जहां अधिकारियों को शक है कि वह मामून के संपर्क में आया था. ज्वेल को पिछले साल सितंबर में जमानत पर रिहा किया गया था. इन मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सत्ता परिवर्तन के बाद रिहा किए गए संदिग्ध उग्रवादियों पर ठीक से नजर रखी जा रही है या नहीं.

यह चिंता एक नई अंतरराष्ट्रीय चेतावनी के बीच सामने आई है. 10 अगस्त को UN सुरक्षा परिषद की 'एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम' की एक रिपोर्ट में कहा गया कि अल-कायदा सक्रिय सेल बनाकर बांग्लादेश में अपना नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और इस रिपोर्ट के बाद बांग्लादेश एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि अल्पसंख्यकों को इससे काफी खतरा हो सकता है.

कमजोर प्रणाली का उग्रवादी उठाते रहे हैं फायदा

हालांकि, अगस्त 2024 के बाद अलग-अलग अदालतों से जमानत पर रिहा किए गए उग्रवादियों की सही संख्या के बारे में कोई भी एजेंसी जानकारी नहीं दे पाई है. उनके ठिकाने और गतिविधियों का पता तभी चलता है जब उन्हें घटनाएं होने बाद अलग-अलग घटनाओं के सिलसिले में गिरफ्तार किया जाता है या जांच के दौरान उनके नाम सामने आते हैं.

बांग्लादेश में किसी भी सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की बिगड़ी हुई स्थिति का कई लोगों ने फायदा उठाया था और उग्रवादियों से अलग तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती थी. वो अपने मकसद के लिए बांग्लादेश की सभी सरकारों की कमजोर प्रणाली का फायदा उठाते रहे हैं.

690 कैदी अभी भी फरार हैं

इन घटनाओं के बाद चरमपंथी खतरे को लेकर बरती गई लापरवाही की आलोचना भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी हुई है. ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के पूर्व कमिश्नर शेख मोहम्मद सज्जाद अली ने 1 जुलाई 2025 को कहा था, 'बांग्लादेश में कोई चरमपंथी नहीं हैं'. उन्होंने बताया था कि उस समय पुलिस के लिए मुख्य समस्या लूटपाट थी. लेकिन हालात बिल्कुल विपरीत है.

जेलों के इंस्पेक्टर जनरल ब्रिगेडियर जनरल सैयद मोहम्मद मोताहेर हुसैन ने बताया कि जुलाई 2024 के बड़े विद्रोह के दौरान भागे 690 कैदी अभी भी फरार हैं. कुल 2,247 भागे हुए कैदियों में से 1,557 को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी बचे कैदियों में से 166 का कोई सुराग या रिकॉर्ड अधिकारियों के पास नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें चिंता है क्योंकि हाल ही में उनमें से एक को गिरफ्तार किया गया है जो बम बनाने में शामिल था। वह एक उग्रवादी संगठन का सदस्य था.

फिर से नेटवर्क एक्टिव करने की कोशिश

सूत्रों के मुताबिक, जमानत पर रिहा हुए संदिग्ध उग्रवादी और चरमपंथी अब कथित तौर पर अपने पुराने नेटवर्क को फिर से एक्टिव करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए चुनौती यह है कि वे उनका पता लगाएं, उन पर नजर रखें. उन्हें फिर से संगठित होकर देश में उग्रवादी गतिविधियां करने से रोकें. ताकि  इस बार टारगेट अल्पसंख्यकों को ना बनाया जाए.

 

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About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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