जिनपिंग नहीं छोड़ेंगे इस बार: अरबपतियों के विदेशों में जमा हर डॉलर पर नजर, दौलत पर टूटेगा कहर
चीन के अरबपति टेंशन में हैं. उनकी विदेशों में रखी दौलत जिनपिंग सरकार की रडार पर आ गई है. यानी चीन अरबपतियों, ऑफशोर ट्रस्ट और विदेशी निवेश पर टैक्स का दायरा बढ़ा रहा है. चीन रेवेन्यू के ज्यादा भरोसेमंद जरिए ढूंढ रहा है और उन नियमों को सख्ती से लागू कर रहा है जिन्हें पहले ढिलाई से लागू किया जाता था.
चीन के अरबपति टेंशन में हैं. उनकी विदेशों में रखी दौलत जिनपिंग सरकार की रडार पर आ गई है. यानी चीन अरबपतियों, ऑफशोर ट्रस्ट और विदेशी निवेश पर टैक्स का दायरा बढ़ा रहा है. चीन रेवेन्यू के ज्यादा भरोसेमंद जरिए ढूंढ रहा है और उन नियमों को सख्ती से लागू कर रहा है जिन्हें पहले ढिलाई से लागू किया जाता था.
2026 में इस मुहिम ने तेजी पकड़ी है. टैक्स अधिकारियों ने अमीर टैक्सपेयर्स की जांच-पड़ताल बढ़ा दी है. कंपनियों और लोगों से बकाया टैक्स की मांग की है और ऑफशोर ट्रस्ट से जुड़े साफ नियम लागू किए हैं. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब चीन को पब्लिक फाइनेंस, खासकर लोकल सरकार के स्तर पर लंबे समय से दबाव का सामना करना पड़ रहा है.
क्या बदला है?
जुलाई में एक बड़ा बदलाव आया, जब चीनी अधिकारियों ने चीन में टैक्स देने वाले लोगों (टैक्स रेजिडेंट्स) के ऑफशोर ट्रस्ट पर टैक्स से जुड़े नियम लागू किए. नए नियमों के तहत, ऑफशोर ट्रस्ट में शेयर, प्रॉपर्टी और दूसरी संपत्तियों के ट्रांसफर से होने वाले मुनाफे पर 20% टैक्स लग सकता है. ट्रस्ट और उनके कंट्रोल वाली ऑफशोर संस्थाओं से होने वाली इनकम पर भी 20% टैक्स लग सकता है.
इन नियमों में जनवरी 2023 से बकाया कुछ टैक्स भी शामिल हैं. टैक्सपेयर्स को बिना किसी एक्स्ट्रा लेट-पेमेंट चार्ज के अपनी देनदारियों की जानकारी देने और उन्हें चुकाने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है. इसकी डेडलाइन 22 अक्टूबर है.
चीन के अमीर परिवारों ने मेनलैंड के बाहर अपनी संपत्ति, उत्तराधिकार और निवेश को मैनेज करने के लिए बड़े पैमाने पर 'ऑफशोर ट्रस्ट' का इस्तेमाल किया है. रॉयटर्स ने अगस्त में रिपोर्ट दी थी कि नए नियमों की वजह से कुछ अमीर निवेशक ऐसे स्ट्रक्चर पर फिर से विचार कर रहे हैं या उन्हें खत्म कर रहे हैं.
क्यों चीन ने उठाया यह कदम?
एक वजह है वित्तीय दबाव. चीन में प्रॉपर्टी मार्केट में आई गिरावट की वजह से जमीन बेचकर स्थानीय सरकारों को मिलने वाली कमाई में भारी कमी आई है. इस वजह से कई स्थानीय प्रशासन पैसे के दूसरे जरिए तलाश रहे हैं.
इसलिए, टैक्स से जुड़ा यह अभियान ऐसे समय में चलाया जा रहा है जब चीन टैक्स कलेक्शन को बेहतर बनाने और कमाई को ज्यादा भरोसेमंद बनाने की कोशिश कर रहा है.
रॉयटर्स के हवाले से जानकारों का कहना है कि चीन के अधिकारियों ने विदेशों में मौजूद संपत्ति का पता लगाने की अपनी क्षमता भी बढ़ा ली है. 'कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड' के तहत जानकारी साझा करने की व्यवस्था और देश के टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम की वजह से अधिकारियों को विदेशों में मौजूद फाइनेंशियल होल्डिंग्स के बारे में बेहतर जानकारी मिल पा रही है.
इसका नतीजा यह हुआ है कि अब सिस्टम बदल गया है; पहले विदेश से होने वाली कुछ आय पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन अब टैक्स अधिकारी निवासियों से उस आय का हिसाब-किताब देने के लिए लगातार कह रहे हैं.
अरबपति क्यों परेशान हैं?
अमीर लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या लिक्विडिटी (नकद की उपलब्धता) की है. किसी शख्स के पास शेयर, प्रॉपर्टी या दूसरी संपत्तियों के रूप में करोड़ों डॉलर हो सकते हैं, लेकिन हो सकता है कि उसके पास भारी-भरकम टैक्स बिल चुकाने के लिए तुरंत जरूरी नकद न हो.
इस वजह से कुछ निवेशकों को शेयर बेचने या अपनी संपत्ति के बदले कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
इस मामले ने फाइनेंशियल मार्केट में पहले ही ध्यान खींचना शुरू कर दिया है. सितंबर में, चीनी हॉटपॉट चेन 'हाइडीलाओ' के मुख्य शेयरधारक ने लगभग 33,60,21,70,000 रुपये के 259 मिलियन शेयर बेचे. यह बिक्री ऑफशोर ट्रस्ट टैक्स के नए नियमों के बाद हुई, हालांकि इस बिक्री का कोई सार्वजनिक कारण नहीं बताया गया.
बैंक ऑफ अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर मुख्य शेयरधारकों को टैक्स देनदारियों को पूरा करने के लिए कैश जुटाने की जरूरत पड़ती है, तो टैक्स से जुड़ी यह मुहिम हांगकांग में लिस्टेड अलग-अलग चीनी शेयरों के लिए शॉर्ट-टर्म जोखिम पैदा कर सकती है.
हालांकि, बैंक को यह उम्मीद नहीं है कि यह सख्ती हांगकांग के व्यापक बाजार पर हावी हो जाएगी.
क्या यह मामला सिर्फ अरबपतियों तक सीमित है?
जरूरी नहीं. यह सख्ती अब विदेशों में मौजूद अलग-अलग तरह की संपत्ति तक भी पहुंच रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग और हांगझोऊ जैसे शहरों में टैक्स अधिकारियों ने ऑफशोर इंश्योरेंस पॉलिसी से होने वाली आय पर भी टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है. जानकारों का कहना है कि यह मुहिम आगे चलकर विदेशों से होने वाली अन्य तरह की आय तक भी फैल सकती है.
इसलिए यह मामला अरबपतियों के एक छोटे समूह से कहीं ज्यादा अहम है.
अमीर चीनी निवेशकों के लिए, ऑफशोर ट्रस्ट सिर्फ निवेश का जरिया नहीं थे. इनका इस्तेमाल एस्टेट प्लानिंग, उत्तराधिकार और विदेशों में लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी रखने के लिए भी किया जाता था. इसलिए, टैक्स से जुड़ी सख्ती बढ़ने से चीनी लोगों की निजी संपत्ति के स्ट्रक्चर और उसके निवेश की जगह में बदलाव आ सकता है.
चीन के लिए इसके क्या हैं मायने?
बीजिंग अपने टैक्स सिस्टम को और असरदार बनाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में जब स्थानीय सरकारों की कमाई के पारंपरिक स्रोत कमजोर पड़ गए हैं.
सालों तक तेजी से हुई आर्थिक तरक्की ने भारी निजी संपत्ति बनाई, जबकि विदेशों में टैक्स देनदारियों को लागू करने का काम सीमित रहा. इस नए तरीके का मकसद उस संपत्ति के एक बड़े हिस्से को टैक्स सिस्टम के दायरे में लाना है.
इसका तुरंत असर यह हो सकता है कि और ज्यादा संपत्तियां बेची जाएं, टैक्स से जुड़ी सलाह की मांग बढ़े और ऑफशोर संपत्ति के स्ट्रक्चर में बदलाव आए.
कई दिग्गज छोड़ चुके हैं चीन
वहीं, इस साल मार्च में आई Hurun Global Rich List के मुताबिक, दुनिया में अरबपतियों की लिस्ट में तेजी आई है. अमेरिका ने अरबपतियों के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. सिर्फ चीन में ही 1,110 अरबपति हो चुके हैं. लेकिन कई अरबपति ऐसे भी थे, जिन्होंने चीनी सरकार की नीतियों और व्यवहार के कारण चीन छोड़ दिया था. इसमें एक बड़ा नाम है जैक मा का.
जैक मा को भुगतना पड़ा था खामियाजा
हालांकि, अब जैक मा वापस चीन आ चुके हैं. साल 2020 में जिनपिंग सरकार की जैक मा ने खुलेआम आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि चीन के बैंकों की मानसिकता साहूकारों जैसी है, जो तभी लोन लेते हैं, जब बदले में कुछ गिरवी रखा जाए. इससे चीन की सरकार नाराज हो गई थी. इसके बाद वह काफी वक्त तक नजर नहीं आए थे.
वहीं चीन के बड़े रियल एस्टेट कारोबारी और सोहो चाइना के सह-संस्थापक पैन शियी ने चीन के रियल एस्टेट मार्केट के विकास मॉडल को पोंजी स्कील कहा था. फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब पैन शियी न्यूयॉर्क शहर में बस चुके हैं. साल 2020 में वह सोहो चाइना के मैनेजमेंट से हट गए थे. बाद में उन्होंने अमेरिका में काफी संपत्तियां खरीदीं और इन्वेस्टमेंट किए. अब वह न्यूयॉर्क में ही रहते हैं.
वहीं Bytedance के संस्थापक झांग यिमिंग भी चीन छोड़ चुके हैं और अब सिंगापुर में रहते हैं. हालांकि, वह अभी भी चीन के ही नागरिक हैं. साल 2021 के दौरान चीनी रेग्युलेटर्स ने बाइटडांस, अलीबाबा और टेनसेंट जैसी दिग्गज इंटरनेट कंपनियों डेटा सिक्योरिटी लॉ और एकाधिकार विरोधी कार्रवाई की थी. इनमें बाइटडांस की 13 कंपनियां शामिल थीं, जो सरकार की रडार पर थीं. सरकारी प्रेशर और सख्ती से बचने के लिए झांग यिमिंग समेत कई टेक दिग्गजों ने उस वक्त टॉप पोजिशन से इस्तीफा दे दिया था.