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हवा में ही चीर देगा हूती का 'प्रहार': तरकश के किन हथियारों से सऊदी करता है अचूक वार?

मक्का शहर पर हूतियों के ड्रोन अटैक के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर कौन सऊदी अरब के सबसे पवित्र शहरों के आसमान की रखवाली करता है. चलिए आज आपको बताते हैं कि सऊदी ने किस डिफेंस सिस्टम्स से खुद को लैस किया हुआ है.

Written ByRachit Kumar
Published: Sep 17, 2026, 09:08 AM IST|Updated: Sep 17, 2026, 09:27 AM IST
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 हवा में ही चीर देगा हूती का 'प्रहार': तरकश के किन हथियारों से सऊदी करता है अचूक वार?

About the Author

Rachit Kumar

Rachit Kumar

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को सऊदी अरब की एयर डिफेंस फोर्स ने मक्का के एयरस्पेस में घुसने से पहले ही हूतियों की तरफ से छोड़े गए एक ड्रोन को तबाह कर दिया.

हालांकि, यमन के हूतियों ने इस दावे को खारिज किया है. मगर, जब से यह खबर सामने आई है, तब से न केवल सऊदी अरब की डिफेंस क्षमताओं पर चर्चा हो रही है, बल्कि इस बारे में भी बात हो रही है कि सऊदी अरब हवाई खतरों से बचने के लिए मक्का और अन्य शहरों में कौन सा एयर डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल कर रहा है.

अब तक, सऊदी अरब ने यह नहीं बताया कि ड्रोन को बर्बाद करने के लिए उसने किस डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया, लेकिन इस साल मई में, देश के रक्षा मंत्रालय ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें कुछ मिसाइल लॉन्चर, रडार और बड़ी एंटी-एयरक्राफ्ट गन दिखाई गई थीं.

सऊदी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन हथियारों से लैस एयर डिफेंस फोर्स को 'पवित्र जगहों की रखवाली करने और उन्हें हवाई खतरों से बचाने' की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

बीबीसी उर्दू से बातचीत में स्ट्रैटजिक विजन इंस्टिट्यूट में मिलिट्री अफेयर्स और वेपन्स पर रिसर्च करने वाले हम्माद वलीद ने कहा कि पिछले साल मई में सऊदी अरब ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें अमेरिका में बनी पैट्रियट बैटरी, मिसाइल लॉन्चर्स और रडार को देखा जा सकता है.

कौन करता है मक्का-मदीना की रखवाली

सऊदी अरब के बयान के मुताबिक, मक्का-मदीना जैसे पवित्र शहरों की हिफाजत के लिए पैट्रियट सिस्टम लगाए गए हैं. हम्माद वलीद ने बताया कि वीडियो में दिख रही एंटी-एयरक्राफ्ट गन असल में 'ओर्लिकॉन 35mm' है, जिसे एक स्विस कंपनी बनाती है.

इसके अलावा, पिछले साल मई में सऊदी अरब ने एयर डिफेंस के लिए अमेरिकन टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एयर डिफेंस (THAAD) भी खरीदा था. सऊदी अरब की ऑफिशियल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस डिफेंस सिस्टम का उद्घाटन समारोह जेद्दा में एयर डिफेंस फोर्सेज इंस्टीट्यूट में हुआ.

पैट्रियट मिसाइल सिस्टम क्या है?

वलीद ने बताया कि ड्रोन, एयरक्राफ्ट या फिर क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने के लिए सऊदी अरब पैट्रियट मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करता है. इस मिसाइल और एंटी-एयरक्राफ्ट डिफेंस सिस्टम को अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने बनाया है.

लॉकहीड मार्टिन के मुताबिक, सऊदी अरब के पास खुद का पैट्रियट एडवांस कैपेबिलिटी 3 (PAC 3) डिफेंस सिस्टम है, जो बैलिस्टिक क्रूज और फाइटर जेट्स को मार गिराने में सक्षम है.

यह अपने एडवांस्ड रडार सिस्टम के लिए जाना जाता है, जिसमें एक साथ कई टारगेट को ट्रैक करने और उन्हें तबाह करने की काबिलियत है. यह मिसाइल सिस्टम कम समय में ऑपरेशनल हो सकता है और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का भी सामना कर सकता है.

लाखों डॉलर में है मिसाइलों की कीमत

हालांकि, हम्माद वलीद का कहना है कि PAC-2 और PAC-3 में लगी मिसाइलों की कीमत लाखों डॉलर है, इसलिए सऊदी अरब दूसरी एंटी-एयरक्राफ्ट गन का इस्तेमाल करता है, जिन्हें सऊदी रक्षा मंत्रालय के एक वीडियो में भी देखा जा सकता है. रिसर्चर के मुताबिक, इन एंटी-एयरक्राफ्ट गन में इस्तेमाल होने वाले 35 mm के गोले, पैट्रियट सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली मिसाइलों की तुलना में सस्ते होते हैं.

उन्होंने कहा, 'इसका मतलब है कि पैट्रियट डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल मिसाइल या बड़े ड्रोन जैसे बड़े खतरों से निपटने के लिए किया जाता है, जबकि ओरलिकॉन 35mm एंटी-एयरक्राफ्ट गन का इस्तेमाल छोटे ड्रोन को मार गिराने के लिए किया जाता है.' हम्माद वलीद ने आगे कहा कि ओरलिकॉन 35mm एंटी-एयरक्राफ्ट गन का इस्तेमाल पाकिस्तान में भी होता है और पिछले साल मई में भारतीय ड्रोन के खिलाफ इनका असरदार तरीके से इस्तेमाल किया गया था.

THAAD एयर डिफेंस सिस्टम

इसी साल सऊदी अरब ने लॉकहीड मार्टिन की तरफ से बनाए गए THAAD एयर डिफेंस सिस्टम को भी खरीदा था. इस साल जुलाई में, सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि THAAD डिफेंस सिस्टम की पहली बैटरी की तैनाती एक बड़े डिफेंस प्लान का हिस्सा है, जिसका मकसद देश की एयर डिफेंस क्षमताओं को मजबूत करना और अहम रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा करना है. 

अमेरिकी कंपनी के मुताबिक, THAAD दुनिया का सबसे एडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, जो कम और मध्यम दूरी की मिसाइलों को रोकने में सक्षम है. लॉकहीड मार्टिन के मुताबिक, THAAD को किसी भी जगह पर बहुत तेजी से तैनात किया जा सकता है और इसे पैट्रियट III डिफेंस सिस्टम जैसे अन्य बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

 रिसर्चर हम्माद वलीद का कहना है कि सऊदी अरब ने इस साल THAAD एयर डिफेंस सिस्टम हासिल किया, जिसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए किया जाता है. हूथी हमलों से पहले, ईरान ने भी सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया था. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि THAAD को ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि यह बहुत खर्चीला एयर डिफेंस सिस्टम है.

डिफेंस सिस्टम है, फिर क्या हैं सऊदी के सामने चुनौतियां?

जियोपॉलिटिकल अफेयर्स पब्लिकेशन के एनालिस्ट और मिडिल ईस्ट में तैनात रहे पूर्व अमेरिकी मिलिट्री ऑफिसर एंड्रयू डेविडसन का मानना ​​है कि सऊदी अरब में संभावित खतरों को रोकने की क्षमता तो है, लेकिन लगातार या बड़े पैमाने पर होने वाले हमलों से उसे और नुकसान हो सकता है.' 2025 में IISS के जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के पास 108 पैट्रियट लॉन्चर हैं, लेकिन ईरान के खिलाफ जंग से पता चला कि अहम ठिकानों पर अभी भी हमला किया जा सकता है.' उनका कहना है कि हालिया तनाव के दौरान, सऊदी अरब को अपने डिफेंस रिसोर्स को धार्मिक स्थलों, दूसरे शहरों, मिलिट्री बेस और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच बांटना पड़ रहा है.

इंटरसेप्टर की कमी से पड़ेगा असर

एंड्रयू डेविडसन कहते हैं कि कुछ खास जगहों की सिक्योरिटी पर ज्यादा ध्यान देने का मतलब है कि दूसरे इलाकों के लिए कम रिसोर्स उपलब्ध होंगे. ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल होता है. वहीं, लगातार हमलों से इंटरसेप्टर रिजर्व पर दबाव पड़ता है.' हालांकि सऊदी अरब के मौजूदा गोला-बारूद के भंडार की स्थिति मालूम नहीं है. लेकिन उन्हें आशंका है कि सऊदी इंटरसेप्टर की वैश्विक कमी से भी प्रभावित हो सकता है.

 

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