चीन की मदद से PAK ने बनाई ‘हंगोर’ पनडुब्बी! समंदर के नीचे पहली दागी मिसाइल, भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती
पाकिस्तान ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 'हंगोर' पनडुब्बी का सफल परीक्षण कर लिया है. पाकिस्तान ने यह पनडुब्बी चीन के साथ हुए अरबों रुपये समझौते के तहत एक साथ मिलकर बनाई है.
पाकिस्तान की नौसेना ने रविवार को 'हंगोर' पनडुब्बी से उत्तर अरब सागर में पहली बार असल हथियार का टेस्ट किया है. पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के मुताबिक, हंगोर ने पानी के अंदर से लंबी दूरी तक हमला करने वाली एंटी-शिप क्रूज मिसाइल दागी. पाकिस्तानी सेना ने इस टेस्ट के जरिए हंगोर पनडुब्बी के हथियार सिस्टम और उसकी युद्ध क्षमता की जांच की. पाकिस्तानी नौसेना ने इसे अपनी अंडरवॉटर वॉरफेयर यानी पानी के नीचे जंग करने की ताकत में एक अहम कामयाबी बताया है.
हंगोर क्लास पाकिस्तान की नई पनडुब्बियों की एक श्रेणी है. जो चीन और पाकिस्तान मिलकर बना रहे हैं. पाकिस्तान ने चीन के साथ ऐसी 8 पनडुब्बियों का समझौता किया है. यह पनडुब्बी डीजल और इलेक्ट्रिक दोनों सिस्टम को सपोर्ट करती है. इस पनडुब्बी का काम समुद्र के अंदर छिपकर दुश्मन के युद्धपोतों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर हमला करने के लिए बनाई गई है. खास बात यह है कि इसकी मदद से एंटी शिप क्रूज मिसाइल जैसे हथियार दागे जा सकते हैं.
पनडुब्बी में AIP सिस्टम क्या होता है
इसके अंदर एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक भी मौजूद है. इस तकनीक की मदद से पनडुब्बी लंबे समय तक पानी में रह सकती है. जिसकी अवधि लगभग तीन से चार सप्ताह बताई जाती है. इस पनडुब्बी में चीन का बनाया हुआ AIP सिस्टम इस्तेमाल किया गया है. माना जाता है कि यह स्टर्लिंग साइकिल तकनीक पर आधारित है. यह सिस्टम बिना हवा से ऑक्सीजन लिए पानी के अंदर बिजली पैदा कर सकता है.
4 चीन में, तो 4 कराची में बनेंगे हंगोर पनडुब्बियां
चीन के साथ हुए इस समझौते के तहत 8 में से 4 पनडुब्बी चीन में बनेंगे, जबकि 4 पनडुब्बियां पाकिस्तान के कराची में शिपयार्ड में तकनीकी सहयोग के साथ बनेंगी. पहली बार यह पनडुब्बी 30 अप्रैल 2026 को पाकिस्तानी नौसेना में शामिल किया गया था. हेंगोर क्लास की 3 पनडुब्बियां चीन में बनकर पहले ही लॉन्च हो चुकी हैं, लेकिन अभी सर्विस में नहीं हैं.
- वजन: पानी की सतह पर करीब 2300 से 2400 टन और पानी के अंदर करीब 2800 टन.
- लंबाई: करीब 76 मीटर.
- चौड़ाई: 8.4 मीटर.
- गहराई: यह 300 मीटर से ज्यादा गहराई तक जा सकती है.
- क्रू: इसमें करीब 38 से 45 लोग तैनात रह सकते हैं.
पाकिस्तान के पास और कौन-कौन सी पनडुब्बियां हैं?
भारत के लिए कितनी चिंता की बात?
पाकिस्तान की हंगोर क्लास पनडुब्बी नई तकनीक पर आधारित है, लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत के पास इसका तोड़ नहीं है. भारतीय नौसेना के पास इस तरह की पनडुब्बियों को रोकने और तबाह करने की पूरी क्षमता पहले से ही मौजूद है.
- 12 Boeing P-8I Neptune विमान: लंबी दूरी तक समुद्र की निगरानी और पनडुब्बियों का पता लगा सकता है.
- MH-60R Seahawk हेलिकॉप्टर: पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है.
- SWAC: उथले पानी में पनडुब्बियों का पता लगाने और निगरानी के लिए.
इनके अलावा भारत के पास इस तरह की पनडुब्बियों को तबाह करने के लिए भी काफी कुछ है.
- कलवरी-क्लास पनडुब्बियां: यह पनडुब्बियां समुद्र के अंदर छिपकर निगरानी करती हैं. साथ ही दुश्मन की पनडुब्बियों और जहाजों पर हमला करने की ताकत रखती हैं. इनमें सोनार, टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलें हैं.
- INS वाग्शीर: कलवरी-क्लास की छठी पनडुब्बी है, इसमें एडवांस सोनार, टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलें हैं और यह समुद्र के अंदर निगरानी के साथ-साथ हमले कर सकती है.
- INS अरिहंत और INS अरिघात: भारत की परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां हैं. इनका मुख्य काम समुद्र में छिपकर रणनीतिक परमाणु प्रतिरोध क्षमता बनाए रखना है. INS अरिहंत में स्वदेशी सोनार सिस्टम भी लगा है.