1991 के समझौते का Article 10 क्या है: भारत-पाक युद्धपोतों की टक्कर के बाद क्यों हो रही चर्चा?
16 जून 2011 को Gulf of Aden में भारतीय युद्धपोत INS गोदावरी और पाकिस्तानी युद्धपोत PNS Babur आमने-सामने आ गए थे. भारत ने आरोप लगाया था कि PNS Babur तेज रफ्तार से बेहद करीब आया, जिससे INS गोदावरी की सुरक्षा खतरे में पड़ गई.
अरब सागर में भारत और पाकिस्तान के जहाज आपस में टकराने के बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया है. बताया जा रहा है कि 15 सितंबर 2026 को पाकिस्तान PNS हुनैन जहाज भारत के एक जहाज से टकरा गया. भारतीय जहाज का नाम अभी सामने नहीं आया है. विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारतीय जहाज अपने रूटीन गश्त पर था, इसी दौरान पाकिस्तानी के PNS हुनैन ने तेज रफ्तार में गलत दिशा मुड़ते हुए भारतीय जहाज को टक्कर मार दी. इस घटना के बाद भारत भी एक्शन में आ गया है और नई दिल्ली में मौजूद पाकिस्तान हाई कमीशन के चार्ज डी'अफेयर्स को तलब कर लिया है.
यह घटना ओमान के तट से करीब 220 किलोमीटर पूर्व, उत्तरी अरब सागर में होने की जानकारी है. भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तानी जहाज का व्यवहार 'अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर' था. साथ ही यह 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते का सीधे तौर पर उल्लंघन भी है. यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की हरकत हुई है.
16 जून 2011 को भी पाकिस्तान की तरफ से ऐसा ही किया गया था. 2011 में Gulf of Aden में भारतीय युद्धपोत INS गोदावरी और पाकिस्तानी युद्धपोत PNS Babur के बीच भिड़ंत हुई थी. उस समय भी भारत ने कहा था कि PNS Babur ने तेज रफ्तार से आईएनएस गोदावरी के नजदीक आकर ऐसी हरकत की, जिससे भारतीय जहाज की सुरक्षा खतरे में आ गई थी. तब भी भारत ने 1991 के समझौते के आर्टिकल 10 का उल्लंघन बताया था.
1991 के समझौते का आर्टिकल 10 क्या है?
भारत और पाकिस्तान के बीच 6 अप्रैल 1991 एक समझौता हुआ था. इसका मकसद दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों को लेकर गलतफहमी और दुर्घटनाओं की आशंका को कम करना था. इस समझौते में कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में आवाजाही के दौरान दोनों देशों के नौसैनिक जहाज और पनडुब्बियां एक-दूसरे से 3 नॉटिकल मील से कम दूरी पर नहीं आएंगी. 3 नॉटिकल मील करीब 5.56 किलोमीटर के बराबर होता है. इसका उद्देश्य किसी दुर्घटना को रोकना है.
पाकिस्तान का PNS हुनैन क्या है?
पीएनएस हुनैन पाकिस्तान नौसेना का यारमूक कैटेगरी का समुद्री गश्ती जहाज है. जिसे रोमानिया के गालाती शहर में मौजूद शिपयार्ड में बनाया गया था. यह जहाज डेमन ओपीवी 2600 डिजाइन पर आधारित है. जुलाई 2024 में इसे पाकिस्तान नौसेना में शामिल किया गया था. जहाज की लंबाई करीब 98 मीटर है और लगभग 2600 टन वजन है. इसे समुद्र में निगरानी और गश्त के लिए बनाया गया है. यह तलाशी और बचाव मुहिम, आपदा राहत कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर इसे सैन्य अभियानों में भी तैनात किया जा सकता है. यह जहाज हेलीकॉप्टर और ड्रोन संचालित करने में सक्षम है. इसमें तेज रफ्तार वाली छोटी नावें भी चलाई की जा सकती हैं, जिससे समुद्र में निगरानी और तत्काल कार्रवाई की क्षमता बढ़ जाती है.