Indian Military Lethal Weapons: बदलते वैश्विक हालात में किसी मुल्क का सिर्फ शक्तिशाली होना ही ज़रूरी नहीं है. बल्कि अपनी पराक्रम को समय पर परखना भी ज़रूरी है. जिससे दुश्मनों में हर पल ये भय रहे कि आंखें उठाई तो अंत निश्चित है. मॉडर्न वॉयफेयर और बदलती वैश्विक चुनौतियों को भारत बहुत अच्छी तरह से समझ रहा है. यही वजह है कि वह अपने शस्त्रागार को घातक बनाने के साथ ही मित्र देशों के बीच युद्धाभ्यासों की संख्या भी बढ़ा रहा है. जोधपुर में जारी युद्धाभ्यास तरंग शक्ति में भारत समेत 8 शक्तिशाली देशों ने हिस्सा लिया.
अब बात भारत के असलहों की करें तो देश अब सिर्फ विदेशी हथियारों पर निर्भर नहीं है. मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत बना तेजस आज दुनिया के सबसे महंगे विमानों को टक्कर दे रहा है. इस विमान ने युद्धाभ्यास में भी भाग लिया. हाल ही में एक LCA तेजस मार्क-1A की कमीशनिंग की गई.
इसकी खूबियों की अगर बात करें तो ये 4.5 जनरेशन का मल्टीरोल फाइटर जेट है. जिसकी रफ्तार करीब 2200 किमी/घंटा तक है. इसके विंग में करीब 9 मिसाइलें फिट हो सकती है. LCA तेजस मार्क-1A में AESA रडार भी लगा है. इसमें अपग्रेडड रडार वॉर्निंग सिस्टम भी लगा हुआ है.
तेजस सीधा ऊपर जाता है, हवा में अपनी गति को शून्य के करीब लाता है और अचानक एक 'कोबरा' की तरह अपना फन उठा लेता है. इसे एविएशन की भाषा में 'कोबरा मैनुवर' कहते हैं.
इस युद्धाभ्यास में भारत के हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर हिंद की शक्ति पूजा में ध्रुव ने भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया. ध्रुव दरअसल भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है. इस हेलिकॉप्टर में 12 सैनिकों के बैठने की जगह होती है और इसे दो पायलट उड़ाते हैं. इस हेलीकॉप्टर की लंबाई 52.1 फीट और ऊंचाई 16.4 फीट है. ध्रुव हेलीकॉप्टर 600 किमी से ज्यादा उड़ान भर सकता है और इसकी अधिकतम गति करीब 290 किलोमीटर प्रतिघंटा है.
जब आसमान में पराक्रम का प्रदर्शन हो और सुखोई-30 MKI अपनी श्रेष्ठता साबित न करे. ऐसा तो हो ही नहीं सकता. तरंग शक्ति वायुअभ्यास में मित्र देशों की वायुसेना भी इसके शौर्य को देखकर अचंभित रह गई. ऐसा हो भी क्यों ना. भले ही ये राफेल जैसा एडवांस नहीं है. इसके बावजूद इसकी ताकत की कोई सानी नहीं है.
सुखोई 30MKI की लंबाई 72 फीट और वजन 18,400 किलो है. ये 2120 किमी प्रतिघंटा की स्पीड से उड़ता है. महज एक मिनट में 59 हजार फीट की ऊंचाई हासिल कर लेता है. सुखोई एक मिनट में 150 राउंड फायर करती है. सुखोई फाइटर जेट में ब्रह्मोस मिसाइलें भी तैनात हो सकती हैं. सुखोई की सबसे बड़ी खासियत है कि ये 8130 KG वजन का हथियार उठा सकता है.
भारत की पराक्रमी सेना की तरकश में कई और भी ऐसी शक्तियां हैं, जिससे दुश्मन खौफ खाता है. इनमें से एक है ब्रह्मोस, जिसका पूरी दुनिया में डंका बजता है. ब्रह्मोस का नाम सुनते ही पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान आज भी ऑपरेशन सिंदूर को याद करके सिहर जाता है.
ब्रह्मोस भारत का एक ऐसा ब्रह्मास्त्र है. जिसे देखकर दुनिया इसे हिंदुस्तान से हासिल करना चाहती है. इस सुपरसोनिक मिसाइल की रफ्तार 3700 किलोमीटर प्रति घंटा है. ब्रह्मोस मिसाइल बिना पायलट वाले लड़ाकू विमान की तरह होती है.
जो दुश्मन के हर रडार को चकमा देकर पिन प्वाइंट अटैक करती है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल का वजन करीब 3 टन तक होता है. वहीं ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता करीब 400 किलोमीटर की है. यानी स्वदेशी शक्ति का डंका दुश्मनों के होश उड़ा रहा है.
वैसे पाकिस्तान अब तक ऑपरेशन सिंदूर में भारत के आकाशतीर की शक्ति को भी अब तक नहीं भूल पाया है. आकाशतीर दरअसल एयर डिफेंस कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है. जिसे भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने मिलकर विकसित किया है. पूर्ण रूप से स्वदेशी, AI-सक्षम और ऑटोमेटिक एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग सिस्टम को Sky Arrow भी कहा जाता है.
ये रियल-टाइम में हवाई खतरों का पता लगाता है और खतरे को ट्रैक कर उन्हें नष्ट करने के लिए सटीक हथियार चुनता है. इसे किसी भी जगह पर तेजी से तैनात किया जा सकता है. वायुसेना के इंट्रीग्रेटेड सिस्टम से जुड़कर तीनों सेनाओं में समन्वय बनाता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने पाकिस्तानी ड्रोन, मिसाइल, माइक्रो-UAV और लॉइटरिंग म्यूनिशन को 100% किल रेट के साथ तबाह किया.
शक्ति की पूजा हो और भगवान शिव के धनुष पिनाका की बात न हो, ये कैसे हो सकता है. पिनाका एक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है. जिसे भारतीय सेना की तोपखाने की रीढ़ कहा जाता है. ये अकेले दुश्मन के खेमे में तबाही मचाने के लिए काफी है. पिनाका को देखकर चीन से लेकर पाकिस्तान तक थर-थर कांपते हैं. भारत के इस बाहुबली की शक्ति का लोहा पूरी दुनिया मानती है.
पिनाका के एक बैटरी में 6 लॉन्चर होते हैं. एक पूरी बैटरी लॉन्चर से 44 सेकंड में 72 रॉकेट दागे जा सकते हैं. पिनाका मार्क-1 की रेंज करीब 40 किलोमीटर है जबकि इसके अपडेटेड वर्जन की रेंज 75 किलोमीटर है. वहीं गाइडेड लॉन्ग रेंज पिनाका की क्षमता 120 किलोमीटर तक है. ये शूट एंड स्कूट तकनीक से लैस है यानी दुश्मन पर हमला करने के बाद ये अपना लोकेशन तुरंत बदल लेता है.
इस स्वदेशी हथियार का डंका यूं ही नहीं पूरी दुनिया में बज रहा है. ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी पिनाका ने पलक झपकते ही मुनीर के बंकरों को नष्ट कर दिया था.
हिंदुस्तान के ब्रह्मास्त्र की चर्चा अग्नि-4 मिसाइल के बिना अधूरी है. अग्नि-4 परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है. इसे मोबाइल लॉन्चर से कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है और आसानी से एक जगह से दूसरे जगह पर ले जाया जा सकता है.
अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल को DRDO ने तैयार किया है. ये एडवांस्ड नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम से लैस है. इसकी लंबाई लगभग 20 मीटर और वजन 17,000 किलोग्राम है. इसकी मारक क्षमता 4,000 किलोमीटर की है. ये मिसाइल 1,000 किलोग्राम पेलोड ले जा सकती है. ध्वनि की गति से 20 गुना ज्यादा स्पीड से दुश्मन पर वार करती है. ये 24 हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवा में उड़ती है. अग्नि -4 के रेंज में चीन और पाकिस्तान के सभी शहर हैं.
सोचिए, ऑपरेशन सिंदूर में जब ब्रह्मोस मिसाइल को पाकिस्तान नहीं रोक पाया था तो फिर अग्नि-4 के सामने उसकी क्या बिसात होती. अग्नि-4 तो पाकिस्तान के बॉस चीन की हर साज़िश को फेल करने का दम रखता है. ये वो हथियार हैं जिसका भारत ने शक्ति प्रदर्शन किया है. लेकिन भारत की कमान में अभी ऐसे ऐसे हथियार है जो किसी दिव्यास्त्र से कम नहीं और जब भारत इसका इस्तेमाल करेगा को दुनिया बस देखती रह जाएगी.
(ज़ी मीडिया के लिए जोधपुर से शिखा ठाकुर के साथ ब्यूरो रिपोर्ट)