US ने भेजे तेजस के 3 इंजन... अपने फाइटर जेट के लिए अमेरिका पर क्यों निर्भर भारत? समझिए कहानी
अमेरिकी कंपनी GE ने तेजस के लिए भारत को 3 इंजन भेज दिए हैं. हालांकि ये बहुत देरी से मिले हैं. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि विमान स्वदेशी होते हुए भी भारत को अमेरिका पर क्यों निर्भर रहना पड़ता है.
अमेरिकी कंपनी GE Aerospace ने भारत को तेजस लड़ाकू विमान के लिए 3 नए इंजन भेजे हैं. ये इंजन अगस्त 2026 में HAL को मिले हैं. इन इंजनों का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना के Tejas Mk1A लड़ाकू विमानों में किया जाएगा. तेजस भारत में बनाया गया स्वदेशी लड़ाकू विमान है, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाला F404 इंजन अमेरिकी कंपनी GE Aerospace से आता है.
पिछले कुछ समय से GE से इंजन की सप्लाई में देरी हो रही थी. जिसके चलते HAL को तेजस Mk1A विमान बनाने और उन्हें भारतीय वायुसेना को सौंपने में परेशानी हो रही थी. HAL के पूर्व चेयरमैन डीके सुनील ने अप्रैल में बताया था कि GE ने 2026 के दूसरे हिस्से में 20 इंजन देने का भरोसा दिया है. उन्होंने यह भी कहा था कि GE को इससे भी बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए.
HAL ने बताया है कि उसकी तेजस बनाने की प्रोडक्शन लाइन तैयार है, लेकिन विमानों की डिलीवरी काफी हद तक इंजन मिलने पर निर्भर करती है. इंजन की सप्लाई में देरी को लेकर HAL ने GE पर जुर्माना भी लगाया है, क्योंकि दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते में देरी के लिए प्रावधान है.
क्या है इंजन और फाइटर जैट मिलने की टाइमिंग
एक जानकारी के मुताबिक भारत ने फरवरी 2021 में 83 Tejas Mk1A विमानों का करीब 36400 करोड़ रुपया का ऑर्डर HAL को दिया था. योजना के मुताबिक पहला तेजस फरवरी/मार्च 2024 तक भारतीय वायुसेना को मिल जाना था, लेकिन यह समयसीमा पूरी नहीं हुई. मई 2026 तक पहली डिलीवरी दो साल से ज्यादा पीछे चल रही थी. इन 83 तेजस के लिए GE Aerospace से 99 F404-IN20 इंजन खरीदे गए थे. इस सौदे की कीमत करीब $716 मिलियन थी. इंजन की सप्लाई 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन GE की सप्लाई तय रफ्तार से नहीं हो सकी.
वित्त वर्ष 2023-24 में GE को 6 इंजन देने थे, लेकिन समय पर सप्लाई नहीं हो पाई. अप्रैल 2026 तक HAL को सिर्फ 6 इंजन मिले थे, जबकि संशोधित योजना के तहत उस समय तक 11 इंजन मिलने की उम्मीद थी, यानी करीब 5 इंजन कम. मार्च 2025 में जाकर 99 नए इंजनों में से पहला F404-IN20 HAL को मिला. यानी तेजस Mk1A की डिलीवरी शुरू होने की मूल समयसीमा से लगभग एक साल बाद इंजन सप्लाई वास्तव में शुरू हुई.
GE ने HAL को 2026 के दूसरे हिस्से में 20 इंजन देने का वादा किया था. यह अवधि जून से दिसंबर 2026 बताई गई थी. HAL के उस समय के प्रमुख डीके सुनील ने अप्रैल में कहा था कि 20 इंजन का आंकड़ा भी उन्हें काफी मायूसीभरा लगता है यानी कम अनुमान लगता है और GE को इससे बेहतर करना चाहिए.
अमेरिकी कंपनी का तर्क क्या है
GE ने यह भी कहा है कि F404 की प्रोडक्शन लाइन को दोबारा शुरू करना आसान नहीं था. कंपनी ने 2016 तक पुराने तेजस के लिए 65 इंजन देने के बाद प्रोडक्शन लाइन बंद कर दी थी. 2021 में 99 नए इंजनों का ऑर्डर मिलने के बाद उसे करीब 5 साल बंद रहने के बाद फिर शुरू करना पड़ा. कोविड के दौरान सप्लाई चेन की दिक्कतों ने इसे और मुश्किल बनाया.
भारत अपना इंजन क्यों नहीं बना लेता?
भले ही भारत ने विमान खुद बना लिया हो, लेकिन विमान को उड़ाने के लिए सबसे जरूरी चीज इंजन अमेरिका से आता है. अब अगर आपके जहन में यह सवाल आ रहा है कि भारत इंजन भी खुद क्यों नहीं बना लेता तो हम इसका जवाब भी आपको बताते हैं. दरअसल जंग में फाइटर जैट में लगे इंजन जांचे-परखे होने आवश्यक हैं. उसके लिए बेहद ताकतवर और भरोसेमंद जेट इंजन चाहिए. तेजस Mk1 और Mk1A में GE Aerospace का F404-IN20 इंजन इस्तेमाल किया जाता है. यानी विमान का डिजाइन और निर्माण भारत में हो रहा है, लेकिन उसकी प्रोपल्शन सिस्टम की मुख्य ताकत फिलहाल अमेरिका से आती है.
कहानी असली यही है, लड़ाकू विमान का इंजन बनाना विमान बनाने से कहीं ज्यादा मुश्किल और ज्यादा तकनीकी भरा काम है. क्योंकि फाइटर जैट का इंजन हजारों डिग्री सेल्सियस तापमान, बहुत ज्यादा दबाव और तेज रफ्तार पर काम करता है. इन सब चीजों को बर्दाश्त करने करने के लिए हाई-टेम्परेचर मटेरियल, टर्बाइन ब्लेड, कंप्रेसर ,कूलिंग टेक्नोलॉजी, कोटिंग, सटीक मैन्युफैक्चरिंग, इंजन कंट्रोल सिस्टम की जरूरत होती है.
भारत ने बनाया कावेरी इंजन
हालांकि ऐसा भी नहीं है कि भारत ने खुद इंजन बनाने की कोशिश नहीं की. भारत ने अपना फाइटर-जेट इंजन 'कावेरी' बनाया है. कावेरी इंजन भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन बनाने का सबसे बड़ी कोशिशों में से एक है. इसे DRDO की Gas Turbine Research Establishment (GTRE) ने तैयार किया है. हालांकि यह इंजन तेजस में इस्तेमाल नहीं हो सकता है. इसकी कई वजहें हैं. जैसे कि तेजस के लिए इंजन को काफी ज्यादा थ्रस्ट चाहिए था. कावेरी उस समय जरूरी प्रदर्शन हासिल नहीं कर पाया. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, कावेरी की मौजूदा संरचना तेजस की जरूरत पूरी नहीं कर सकी, इसलिए उसे तेजस से अलग करना पड़ा.