4 दिनों तक बुखार से तपता रहा शरीर: Scrub Typhus से हुई Anna University के छात्र की मौत, कितनी खतरनाक है ये बीमारी?
अन्ना यूनिवर्सिटी के एक छात्र की बुखार से मौत के बाद स्क्रब टाइफस चर्चा में है. जानिए क्या है स्क्रब Typhus, यह कैसे फैलता है? इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं? और इससे बचाव के असरदार तरीके क्या हैं?
चेन्नई की अन्ना यूनिवर्सिटी के 20 वर्षीय छात्र की स्क्रब टाइफस बुखार की वजह से 4 दिनों तक शरीर तपता रहा. उसके बाद इस छात्र की मौत हो गई. इस हादसे के बाद स्क्रब टाइफस के संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है. यह बीमारी शुरुआत में सामान्य बुखार जैसी लग सकती है, लेकिन सही समय पर इलाज न मिलने पर शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती लक्षणों को पहचानना और सही समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है. अन्ना यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहने वाले छात्र को करीब चार दिन तक तेज बुखार रहा.
चार दिनों तक तेज बुखार के बाद उस छात्र को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालत गंभीर होने पर उसे सरकारी किलपॉक मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया. अस्पताल पहुंचने तक छात्र की मानसिक स्थिति बदल चुकी थी. वह भ्रमित था, ठीक से बोल नहीं पा रहा था और उसे काफी नींद आ रही थी. जांच में डेंगू की रिपोर्ट निगेटिव आई, जबकि स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई. अस्पताल के मुताबिक, छात्र को सांस लेने में परेशानी और कई अंगों के काम करना बंद करने जैसी जटिलताएं हुईं. कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई.
सामान्य बुखार से गंभीर संक्रमण तक
स्क्रब टाइफस की शुरुआत अक्सर तेज बुखार से होती है. यही वजह है कि इसे डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों से अलग पहचानना मुश्किल हो सकता है. दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. जतिन आहूजा ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि समय पर पहचान होने पर स्क्रब टाइफस का इलाज संभव है, लेकिन इसकी जटिलताएं गंभीर हो सकती हैं. डॉक्टर के मुताबिक, बुखार से पीड़ित मरीज की जांच के दौरान यह देखना जरूरी है कि उसकी हालत में सुधार हो रहा है या वह लगातार बिगड़ रहा है. इसके अलावा, मरीज घास, झाड़ियों या पेड़-पौधों वाले इलाकों में गया था या नहीं, और उस क्षेत्र में स्क्रब टाइफस के मामले सामने आ रहे हैं या नहीं, इसकी जानकारी भी महत्वपूर्ण है. केवल एक लक्षण के आधार पर बीमारी की पहचान नहीं की जा सकती.
क्या है स्क्रब टाइफस?
स्क्रब टाइफस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी (Orientia tsutsugamushi) नामक बैक्टीरिया से होता है. यह संक्रमित लार्वा माइट्स यानी छोटे परजीवी कीड़ों के काटने से इंसानों में फैलता है. इन्हें आम तौर पर चिगर्स कहा जाता है. ये परजीवी कीड़े घास, झाड़ियों और जमीन पर मौजूद घास-फूस और छोटे पौधे वाले इलाकों में पाए जाते हैं. भारत समेत एशिया के कई हिस्सों में स्क्रब टाइफस के मामले सामने आते हैं. बीमारी का असर सिर्फ बुखार तक सीमित नहीं रहता. गंभीर स्थिति में यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है. राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के अनुसार, इसके कारण सांस लेने में गंभीर परेशानी, दिमाग में सूजन, ब्लड प्रेशर का गिरना और किडनी फेलियोर जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
स्क्रब टाइफस के लक्षण क्या हैं?
तेज बुखार स्क्रब टाइफस का सबसे आम लक्षण है. इसके अलावा मरीज में ये परेशानियां हो सकती हैं:
- सिरदर्द और ठंड लगना
- मांसपेशियों और शरीर में दर्द
- कमजोरी और थकान
- त्वचा पर लाल चकत्ते
- लिम्फ नोड्स में सूजन
- गंभीर मामलों में भ्रम और चेतना में बदलाव
- काटने की जगह पर काला निशान
स्क्रब टाइफस का एक खास संकेत एस्चर (Eschar) हो सकता है. यह मच्छर के काटने की जगह पर बनने वाला काले रंग का पपड़ी जैसा घाव होता है. हालांकि, हर मरीज में यह निशान दिखाई नहीं देता. इसलिए त्वचा पर ऐसा निशान न होने का मतलब यह नहीं है कि मरीज को स्क्रब टाइफस नहीं है. बीमारी की पहचान के लिए मरीज की यात्रा, आसपास के वातावरण और अन्य लक्षणों की जानकारी लेना जरूरी है.
डेंगू से कैसे अलग है स्क्रब टाइफस?
भारत में बुखार के साथ प्लेटलेट्स कम होने पर अक्सर डेंगू का संदेह किया जाता है. लेकिन स्क्रब टाइफस में भी प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं. इसके अलावा, लिवर से जुड़ी समस्याएं भी दोनों संक्रमणों में देखने को मिल सकती हैं. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, स्क्रब टाइफस के लक्षण डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस से मिल सकते हैं. ऐसे में किसी एक बीमारी की निगेटिव रिपोर्ट आने से बुखार का सही कारण अपने आप स्पष्ट नहीं हो जाता. डॉक्टर को मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और जांच रिपोर्ट को एक साथ देखकर आगे का फैसला करना होता है.
कैसे होता है स्क्रब टाइफस की जांच और इलाज?
ICMR के अनुसार, स्क्रब टाइफस की जांच के लिए आईजीएम एलिसा (IgM ELISA) एक प्रमुख टेस्ट है. NCDC ने भी ELISA और PCR जैसी आणविक जांचों को डायग्नोसिस के तरीके के तौर पर बताया है. इलाज में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जाता है. ICMR के मुताबिक, यदि मरीज में स्क्रब टाइफस का पर्याप्त संदेह हो, तो गंभीर जटिलताओं वाले मामलों में उच्च स्तर के अस्पताल रेफर करने से पहले डॉक्सीसाइक्लिन शुरू करने की सलाह दी जाती है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर बुखार के मरीज को स्क्रब टाइफस की दवा दे दी जाए. डॉक्टर को मरीज की स्थिति और संक्रमण की संभावना के आधार पर इलाज का निर्णय लेना होता है. कुछ मामलों में जांच की रिपोर्ट आने का इंतजार करना बीमारी को गंभीर बना सकता है.
कब खतरनाक हो जाता है स्क्रब टाइफस?
ICMR ने स्क्रब टाइफस से जुड़ी कई गंभीर जटिलताओं का उल्लेख किया है. इनमें शामिल हैं:
- एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS)
- किडनी का अचानक काम करना बंद करना
- मेनिंगो-एन्सेफलाइटिस यानी दिमाग और उसकी झिल्लियों में सूजन
- शरीर के कई अंगों का काम प्रभावित होना
बुखार के साथ यदि मरीज को सांस लेने में परेशानी, भ्रम, बेहोशी, ब्लड प्रेशर में गिरावट, पेशाब कम आना या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है, तो उसे तुरंत चिकित्सकीय जांच की जरूरत है. ऐसी स्थिति में अस्पताल में इलाज का स्तर बढ़ाने या विशेषज्ञ केंद्र में रेफर करने की आवश्यकता हो सकती है.
किन लोगों को संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है?
स्क्रब टाइफस उन इलाकों में रहने या वहां जाने वाले किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, जहां संक्रमित माइट्स मौजूद हैं. घास, झाड़ियों और पेड़-पौधों वाले क्षेत्रों में समय बिताने से इनके संपर्क में आने की संभावना बढ़ सकती है.
इन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए:
- खेतों में काम करने वाले लोग
- माली और बागवानी से जुड़े कर्मचारी
- वन क्षेत्रों में काम करने वाले लोग
- जंगल या खुले इलाकों में गतिविधियां करने वाले लोग
स्क्रब टाइफस की शुरुआत सामान्य बुखार से हो सकती है, लेकिन कुछ मरीजों में यह तेजी से गंभीर रूप ले सकता है. लगातार बुखार, बिगड़ती हालत और शरीर के अंगों से जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर चिकित्सकीय जांच और उचित इलाज गंभीर जटिलताओं का खतरा कम करने में मदद कर सकता है.