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Explainer: पायलट की एंट्री, बघेल की छुट्टी! पंजाब कांग्रेस में क्यों जरूरी थी ये ‘सियासी सर्जरी’?

पंजाब के चुनावी रण से पहले कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी बनाकर भूपेश बघेल की छुट्टी कर दी है. बघेल की विदाई के बाद क्या पंजाब कांग्रेस में अंदरखाने बने गुटों की नाराजगी दूर होगी या बगावत की चिंगारी ज्वाला बनकर धधकेगी?

Explainer: पायलट की एंट्री, बघेल की छुट्टी! पंजाब कांग्रेस में क्यों जरूरी थी ये ‘सियासी सर्जरी’?
Image Credit: पंजाब कांग्रेस में अंदरखाने खटपट के सुर तेज हुए हैं.

Punjab Congress Crisis: कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया है. पायलट ने भूपेश बघेल की जगह ली है. पार्टी के इस फैसले को पंजाब कांग्रेस में चल रही खींचतान और गुटबाजी को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. जानकारी के मुताबिक पंजाब में सियासी 'कप्तान' यानी प्रभारी बदलने की वजह ये मानी जा रही है कि बघेल, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी में जारी किचकिच खत्म करने में नाकाम होते नजर आ रहे थे. 

इस बदलाव को भले ही कांग्रेस के नेता सामान्य संगठनात्मक फेरबदल बता रहे हों, लेकिन बघेल के इस ट्रांसफर ने पार्टी में अंदरखाने चल रही नेतृत्व की लड़ाई की अटकलों को और हवा दे दी है. क्योंकि बघेल को असम भेजा गया है, जहां कांग्रेस लगातार तीन विधानसभा चुनावों में हार का मुंह देख चुकी है और फिलहाल अगले लोकसभा चुनावों में भी अभी पूरे तीन साल का वक्त बाकी है. 

राजस्थान के पायलट के सामने पंजाब में चुनौतियों का पहाड़!

पांच नदियों और सिख गुरुओं के पावन सानिध्य वाले पंजाब की सियासी तासीर शुरुआत से ही उत्तर की राजनीति से अलग रही है. बाकी राज्यों के उलट, पंजाब कांग्रेस के लिए भी कभी बहुत आसान राज्य नहीं रहा. 2027 का सियासी रण भी इससे कुछ अलग नहीं दिख रहा है.  

कहीं प्लस, तो कहीं माइनस यानी पीसीसी के पॉलिटिकल कैलकुलेशन को देखा जाए तो, पंजाब में पायलट के सामने एक-दो नहीं कई चुनौतिया मुंह बाए खड़ी हैं. पंजाब कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी मतभेदों से जूझ रही है. लिहाजा पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग खेमों में बंटे नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने की होगी. इसके साथ ही पायलट को संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर भी जोर देना होगा.

वर्चस्व और नेतृत्व की इस अंदरूनी रस्साकसी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का नाम सबसे ऊपर है. पीपीसीसी के कई नेता वड़िंग को हटाने की मांग कर रहे हैं. इन नेताओं की अगुवाई पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कर रहे हैं.

ऐसे में सियासी नफानुकसान का अंदाजा लगाने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने जुलाई में फैसला सुनाया था कि राजा वड़िंग प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे. वहीं चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई. सूत्रों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक चन्नी उस फैसले से दो महीने बाद तक संतुष्ट नहीं हुए. पंजाब विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा भी इससे नाखुश नजर आए. 

क्यों जरूरी थी ये इंटरनल सर्जरी?

सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला भी राजा वड़िंग के साथ खड़े नहीं दिखे. सिंगला को चुनाव प्रबंधन समिति का प्रमुख बनाया गया था.

आरोप यह लगा कि भूपेश बघेल इन नेताओं के बीच समझौता कराने में सफल नहीं रहे और वह राजा वड़िंग के पक्ष में खड़े नजर आए. वड़िंग के विरोधी गुट ने पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व बदलने की मांग जारी रखी. यहां तक कि पंजाब के कुछ हिस्सों में बघेल के खिलाफ भी पोस्टर लगाए गए. इससे भी पार्टी में फूट की खबरों को बल मिला और जमकर भद्द पिटी. माना गया कि प्रदेश कांग्रेस की आपसी खींचतान ने पार्टी की निगेटिव कैंपेनिंग में बड़ी भूमिका निभाई.

टीस पुरानी है

पंजाब कांग्रेस की मौजूदा खींचतान को समझने के लिए पुराना बैकग्राउंड समझाना भी जरूरी है, जिससे ये पता चलेगा कि कौन सा नेता किस वोट बैंक की दम पर खुद को पंजाब कांग्रेस का शहंशाह समझता है. चन्नी दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं. वो पंजाब के इतिहास में पहले दलित मुख्यमंत्री बने थे. वड़िंग जट सिख समुदाय के नेता हैं. 

बीते पांच सालों के घटनाक्रम को प्लेबैक करके देखें तो 2021 से शुरू हुई अदावत पर सबसे पहले नजर जाएगी कि सितंबर 2021 में नवजोत सिंह सिद्धू के साथ बढ़ते विवाद के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उनकी जगह चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया और सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली. इसके बाद पार्टी में नेतृत्व को लेकर मतभेद और तेज हुए. नवंबर 2021 में अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी और अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बनाई, जिसका बाद में बीजेपी में विलय कर दिया. 

2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका बड़ा सियासी नुकसान उठाना पड़ा. आम आदमी पार्टी की सूनामी ने तमाम अन्य पार्टियों का सूपड़ा साफ कर दिया. तब आम आदमी पार्टी ने पंजाब की 117 सीटों में से 92 पर जीत दर्ज की थी. जिसके बाद भगवंत सिंह मान पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे.

आम आदमी पार्टी के शासन वाले पंजाब में विधानसभा चुनाव अब करीब छह महीने दूर हैं, ऐसे में कांग्रेस के पास संगठन को चुनावी मोड में लाने के लिए ज्यादा समय नहीं है. बीजेपी सालों बाद अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ रही है. माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी की फ्रीबीज़ पॉलिसी और बीजेपी की आक्रामक जमीनी तैयारियों का काउंटर करने के साथ पंजाब में 'पंजे' के फेवर में माहौल बनाने के लिए पार्टी का चुनावी प्रभारी बदलने वाली इंटरनल सर्जरी की बड़ी जरूरत महसूस की जा रही थी.

इस तरह देखा जाए तो कांग्रेस ने पायलट को इन और बघेल को आउट करके पंजाब में एक बड़ा सियासी दांव खेला है. अब देखना होगा कि ये फैसला कितना कामयाब होगा.

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About the Author

Shwetank Ratnamber

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श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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