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Ground Report: हॉस्टल नहीं तो PG ही सहारा, फिर क्यों छात्रों से वसूला जा रहा 30 हजार तक किराया?

सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में महंगे PG के बावजूद छात्रों को छोटी जगह, सीमित सुविधाएं और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जानिए छात्रों ने क्या बताया.

Written By Shivam Tiwari
Published: Sep 08, 2026, 09:50 AM IST | Updated: Sep 08, 2026, 11:37 AM IST
Image Credit: आखिर छात्र यहां रहने को मजबूर क्यों हैं?
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साउथ दिल्ली का सत्य निकेतन और इसके आसपास का इलाका सिर्फ महंगे PG के लिए ही नहीं, बल्कि यहां रहने वाले छात्रों की मजबूरी के लिए भी जाना जाता है. रविवार को PG की बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत और 6 लोगों के घायल होने की घटना ने इस पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

हादसे के बाद जब इलाके में रहने वाले छात्रों से बात की तो सामने आया कि यहां छात्रों को मोटा किराया देने के बावजूद रहने के लिए ऐसी सुविधाएं मिल रही हैं, जिन्हें सामान्य तौर पर सुरक्षित और सुविधाजनक आवास नहीं कहा जा सकता.

आखिर छात्र यहां रहने को मजबूर क्यों हैं?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के आसपास के कई कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल की सीमित व्यवस्था है. दूसरे राज्यों और शहरों से दिल्ली आने वाले छात्रों के सामने ऐसे में PG या किराए के कमरे का विकल्प ही बचता है. इसी मजबूरी के चलते छात्र महंगे किराए पर छोटे-छोटे कमरों में रहने को तैयार हो जाते हैं.

महाराष्ट्र से आए अनिकेत भी दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि चार छात्रों को एक कमरे में रखा जाता है और उनसे करीब 5 हजार रुपये प्रति व्यक्ति किराया लिया जाता है. स्थिति यह है कि 10 लोगों तक के लिए एक ही टॉयलेट का इस्तेमाल करना पड़ता है.

25 से 30 हजार में मिलता है सिर्फ एक बेड?

मैत्रेयी कॉलेज की छात्रा अदिति वर्मा के मुताबिक, सत्य निकेतन और आनंद निकेतन जैसे इलाकों में PG का किराया काफी ज्यादा है. उन्होंने बताया कि करीब 25 हजार रुपये में सिर्फ एक बेड मिलता है और इसके अलावा 66 हजार रुपये तक सिक्योरिटी भी ली जाती है.

इतना पैसा देने के बावजूद कमरे में कई बार सिर्फ पंखा और खाना जैसी बुनियादी सुविधाएं ही मिलती हैं. छात्रों के मुताबिक, कई कमरे बेहद छोटे हैं और उनमें पर्याप्त वेंटिलेशन या खिड़की तक नहीं होती.

कमरे में खिड़की नहीं, फिर भी हजारों का किराया?

बिहार से आए बिट्टू ने बताया कि वह हर महीने करीब 8 हजार रुपये किराया देते हैं. इसके अलावा बिजली के लिए 1 से 1.5 हजार रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है. उनके मुताबिक, जिस कमरे में वह रहते हैं उसमें खिड़की नहीं है. कमरे में एक लाइट और पंखा है और बाकी सुविधाएं बेहद सीमित हैं.

यानी छात्रों को सिर्फ किराया ही नहीं देना पड़ रहा, बल्कि बिजली और दूसरी सुविधाओं के नाम पर अलग से रकम भी चुकानी पड़ती है.

तीन-चार छात्रों के साथ शेयर करना पड़ता है कमरा?

छात्रा पलक के मुताबिक, इस इलाके में 25 से 30 हजार रुपये तक में एक बेड मिलना सामान्य बात है. लेकिन यह बेड किसी सिंगल रूम में नहीं होता. एक कमरे में दो, तीन या चार छात्रों को रखा जाता है.

उनका कहना है कि कमरे छोटे होते हैं, AC जैसी सुविधाएं नहीं होतीं और खाने की गुणवत्ता भी छात्रों की उम्मीद के मुताबिक नहीं होती. इसके बावजूद दूसरे शहरों से आए छात्रों के पास यहां रहने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं.

क्या महंगे PG की चमक के पीछे छिपी है असली तस्वीर?

छात्रों का आरोप है कि PG संचालक कमरा दिखाते समय इलाके को साउथ दिल्ली का सुरक्षित और बेहतर इलाका बताकर किराया तय करते हैं. लेकिन अंदर की स्थिति अलग होती है. कुछ छात्रों ने इलाके की कई इमारतों की हालत पर भी सवाल उठाए हैं.

एक छात्र ने आरोप लगाया कि PG संचालक छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं. उनके मुताबिक, छात्रों से हजारों रुपये किराया लिया जाता है, लेकिन सुरक्षा, वेंटिलेशन, कमरे की क्षमता और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता.

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल क्या है?

सत्य निकेतन हादसे ने सिर्फ एक इमारत की सुरक्षा पर सवाल नहीं उठाया है. इसने दिल्ली में छात्रों के लिए मौजूद PG व्यवस्था की भी पड़ताल जरूरी कर दी है.

सवाल यह है कि जब एक बेड के लिए छात्रों से 25 से 30 हजार रुपये तक लिए जा सकते हैं, तो बदले में उन्हें सुरक्षित इमारत, पर्याप्त जगह, वेंटिलेशन, साफ-सफाई, पर्याप्त टॉयलेट और दूसरी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिलतीं?

दूसरे शहरों से पढ़ने आए छात्रों के लिए PG जरूरत है, विकल्प नहीं. ऐसे में इस मजबूरी को कमाई का जरिया बनाने के बजाय क्या दिल्ली में PG की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए सख्त नियम लागू नहीं होने चाहिए?

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About the Author

शिवम तिवारी, जी न्यूज में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं और पत्रकारिता में करीब 2 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं. यूपी के प्रयागराज के रहने वाले शिवम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. खबरों की नब्ज पकड़कर उन्हें आसान और साफ भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. शिवम शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर खास फोकस रखते हैं. इनमें स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षाएं, प्रवेश परीक्षाएं, सरकारी नौकरियां, रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स, करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.इसके अलावा शिवम, टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स और करियर काउंसलर्स की सलाह के आधार पर कंटेंट तैयार करते हैं. ये IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT और CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर गहराई से काम करते हैं और छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. शिवम तिवारीर से संपर्क करने के लिए आप उन्हें shivam.tiwari@india.com पर ईमेल कर सकते हैं.
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