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एक ही क्लास, अलग-अलग किताबें: NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों के बाद छात्रों की पढ़ाई कैसे बदलेगी?

NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों के बाद 9वीं कक्षा के छात्रों की पढ़ाई में क्या बदलाव आएगा? जानें नई और पुरानी किताब का अंतर, समस्या समाधान, गणितीय तर्क, परीक्षा, शिक्षकों की भूमिका और छात्रों पर असर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलू.

Written By Shivam Tiwari
Published: Sep 25, 2026, 11:01 AM IST | Updated: Sep 25, 2026, 11:14 AM IST
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स्कूल की पढ़ाई में पाठ्यपुस्तक की भूमिका केवल अध्याय पूरा करने या परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं होती. किताब यह भी तय करती है कि छात्र किसी विषय को किस तरह समझेंगे, सवालों पर कैसे विचार करेंगे और सीखी गई जानकारी का इस्तेमाल कहां करेंगे. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की नई पाठ्यपुस्तकों से जुड़े बदलाव इसी व्यापक शैक्षिक संदर्भ में समझे जा सकते हैं.

कक्षा 9 की गणित की नई किताब को लेकर सामने आई जानकारी में समस्या समाधान, गणितीय तर्क, कंप्यूटेशनल थिंकिंग और वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों पर ध्यान देने की बात कही गई है. ऐसे में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या किताब में बदलाव के साथ छात्रों के पढ़ने, शिक्षकों के पढ़ाने और स्कूलों के मूल्यांकन के तरीकों में भी बदलाव आएगा?

इस एक्सप्लेनर में नई पाठ्यपुस्तक, सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा की तैयारी, शिक्षक की भूमिका, अभिभावकों की चिंता और आगे की पढ़ाई के संबंध को समझेंगे. पुस्तक के वास्तविक अध्यायों और आधिकारिक दस्तावेजों में सत्यापित बदलावों को ही अंतिम तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए.

नई और पुरानी किताब में क्या बदलाव हुआ?

नई पाठ्यपुस्तक के बदलाव को समझने के लिए सबसे पहले पुरानी और नई किताब की विषयवस्तु की तुलना करना जरूरी है. केवल किताब का नाम बदलने, अध्यायों की संख्या बढ़ने या विषयों के क्रम में बदलाव होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि छात्रों की सीखने की पूरी प्रक्रिया बदल गई है. इसके लिए पाठ्यपुस्तक के अध्याय, उदाहरण, अभ्यास प्रश्न और शिक्षकों के लिए दिए गए निर्देशों का अध्ययन करना होगा.

कक्षा 9 की गणित की नई किताब के संबंध में उपलब्ध कॉपी में 14 इकाइयों वाले पुराने ढांचे और 15 थीम वाले नए पाठ्यक्रम का उल्लेख है. इस अंतर की पुष्टि संबंधित NCERT दस्तावेजों से की जानी चाहिए. साथ ही, यह देखना जरूरी होगा कि नई थीम में कौन-से विषय शामिल किए गए हैं, किस तरह पुनर्गठन हुआ है और छात्रों को विषयों के बीच संबंध समझाने के लिए क्या सामग्री दी गई है.

अध्यायों का क्रम क्यों बदला गया?

पाठ्यक्रम में अध्यायों का क्रम बदलने के पीछे कई शैक्षिक उद्देश्य हो सकते हैं, जैसे किसी अवधारणा को पहले समझाना और उससे जुड़ी अगली अवधारणाओं को बाद में प्रस्तुत करना. लेकिन किसी विशेष अध्याय के क्रम में बदलाव का वास्तविक कारण तभी बताया जा सकता है, जब संबंधित पाठ्यक्रम दस्तावेज या NCERT की व्याख्या उपलब्ध हो.

नई और पुरानी किताब की तुलना करते समय इन बातों को जांचा जा सकता है:

अध्यायों और विषयों का क्रम.

अवधारणाओं को प्रस्तुत करने की शैली.

अभ्यास प्रश्नों के प्रकार.

गतिविधियों और चर्चा आधारित सवालों की मौजूदगी.

वास्तविक जीवन के उदाहरण.

गणितीय तर्क और समस्या समाधान से जुड़े अभ्यास.

इस तुलना से पाठकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलाव केवल पाठ्यक्रम की संरचना में है या सीखने के तरीकों को भी प्रभावित करता है.

रटने के बजाय समझने पर जोर कैसे आएगा?

गणित सीखने में किसी सूत्र को याद करना और उसका अर्थ समझना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. उदाहरण के लिए, कोई छात्र किसी सूत्र का इस्तेमाल करके सही उत्तर निकाल सकता है, लेकिन उसे यह समझने में कठिनाई हो सकती है कि वह सूत्र किस परिस्थिति में लागू होगा. समझ आधारित शिक्षण का उद्देश्य ऐसी अवधारणात्मक समझ विकसित करना हो सकता है.

यदि नई किताब में समस्या समाधान और गणितीय तर्क से जुड़े अभ्यास दिए गए हैं, तो छात्रों को सवाल पढ़कर जानकारी पहचानने, उपयुक्त तरीका चुनने और उत्तर की जांच करने का अवसर मिल सकता है. हालांकि, यह दावा कि सभी प्रश्न अब इसी पद्धति से होंगे, पुस्तक की वास्तविक सामग्री की जांच के बिना नहीं किया जाना चाहिए.

गणितीय तर्क क्या होता है?

गणितीय तर्क का संबंध किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के पीछे के कारणों को समझने से है. इसमें छात्र किसी कथन की सत्यता पर विचार कर सकते हैं, उदाहरणों के आधार पर पैटर्न पहचान सकते हैं और अपने समाधान को स्पष्ट कर सकते हैं.

कक्षा में शिक्षक छात्रों से ऐसे प्रश्न पूछ सकते हैं:

आपने इस तरीके का इस्तेमाल क्यों किया?

क्या इस सवाल को किसी दूसरे तरीके से हल किया जा सकता है?

अगर सवाल की एक शर्त बदल दी जाए तो उत्तर पर क्या असर पड़ेगा?

आपका उत्तर सही होने की पुष्टि कैसे होगी?

ये प्रश्न समझ आधारित सीखने के उदाहरण हैं. लेकिन किसी खास गतिविधि या प्रश्न के नई किताब में मौजूद होने का दावा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी होगी.

कंप्यूटेशनल थिंकिंग क्या है?

कंप्यूटेशनल थिंकिंग का अर्थ किसी समस्या को व्यवस्थित तरीके से समझना और उसे छोटे चरणों में बांटकर समाधान खोजने की प्रक्रिया से है. यह केवल कंप्यूटर चलाने तक सीमित नहीं है. समस्या को विभाजित करना, पैटर्न पहचानना और चरणबद्ध तरीके से समाधान तैयार करना इसके कुछ पहलू हैं.

गणित में ऐसी सोच का इस्तेमाल संख्याओं, पैटर्न, डेटा और तार्किक समस्याओं को समझने में किया जा सकता है. नई पाठ्यपुस्तक में इसके कौन-से विशेष उदाहरण दिए गए हैं, यह पुस्तक के अध्यायों और गतिविधियों से स्पष्ट होगा.

परीक्षा में क्या बदलेगा?

यह छात्रों और अभिभावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक है. पाठ्यपुस्तक में बदलाव और परीक्षा प्रणाली में बदलाव दो अलग-अलग विषय हैं. नई किताब में समस्या समाधान और तर्क पर जोर होने का अर्थ अपने-आप यह नहीं है कि स्कूल या बोर्ड की परीक्षा में नए प्रकार के प्रश्न अनिवार्य रूप से लागू हो गए हैं.

परीक्षा से जुड़े बदलावों की पुष्टि संबंधित बोर्ड, स्कूल या परीक्षा प्राधिकरण की आधिकारिक सूचना से करनी होगी. कक्षा 9 की स्कूल परीक्षा के नियम भी स्कूल और संबंधित शिक्षा बोर्ड के अनुसार अलग हो सकते हैं.

क्या छात्रों को समाधान की प्रक्रिया पर ध्यान देना चाहिए?

गणित की तैयारी में केवल अंतिम उत्तर याद करने के बजाय अवधारणा समझना उपयोगी हो सकता है. छात्र किसी प्रश्न को हल करते समय दिए गए तथ्यों, इस्तेमाल किए गए सूत्र और समाधान के चरणों पर ध्यान दे सकते हैं.

उदाहरण के लिए, यदि किसी सवाल में प्रतिशत की गणना करनी है, तो छात्र यह समझने का प्रयास कर सकते हैं कि प्रतिशत किस आधार पर निकाला जा रहा है और परिणाम का अर्थ क्या है. इस तरह का अभ्यास प्रश्नों को अलग परिस्थितियों में समझने में मदद कर सकता है.

हालांकि, परीक्षा में समाधान के चरणों को कितने अंक मिलेंगे, यह संबंधित मूल्यांकन नियमों पर निर्भर करेगा. इसलिए बिना आधिकारिक दिशानिर्देश के यह नहीं कहा जाना चाहिए कि अब हर परीक्षा में उत्तर से अधिक प्रक्रिया को अंक दिए जाएंगे.

क्या पुराने प्रश्नपत्र उपयोगी रहेंगे?

पुराने प्रश्नपत्र छात्रों को परीक्षा के प्रश्नों, समय प्रबंधन और विषयों की पुनरावृत्ति का अभ्यास कराने में मदद कर सकते हैं. लेकिन यदि पाठ्यक्रम या मूल्यांकन नियमों में बदलाव हुआ है, तो पुराने प्रश्नपत्रों को वर्तमान पाठ्यक्रम से मिलाना जरूरी होगा.

छात्रों को तैयारी करते समय वर्तमान सिलेबस, स्कूल की ओर से दिए गए निर्देश और उपलब्ध नई पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नों को प्राथमिकता देनी चाहिए.

 शिक्षक की भूमिका कैसे बदलेगी?

पाठ्यपुस्तक में अवधारणा, तर्क और समस्या समाधान पर जोर होने पर शिक्षक की भूमिका केवल सवाल का समाधान बताने तक सीमित नहीं रह सकती. कक्षा में छात्रों से सवाल पूछना, उनकी सोच समझना और अलग-अलग समाधान विधियों पर चर्चा कराना शिक्षण का हिस्सा हो सकता है.

हालांकि, किसी नई किताब के लागू होने से सभी स्कूलों में शिक्षण पद्धति एक जैसी हो जाएगी, ऐसा मानना उचित नहीं है. कक्षा का आकार, समय, शिक्षक का प्रशिक्षण और उपलब्ध संसाधन पढ़ाई के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं.

क्या शिक्षकों को प्रशिक्षण की जरूरत होगी?

नई पाठ्यपुस्तक का प्रभावी उपयोग करने के लिए शिक्षक को किताब की संरचना, अध्यायों के उद्देश्यों और गतिविधियों को समझना जरूरी हो सकता है. यदि किसी पाठ्यक्रम में शिक्षण पद्धति से जुड़े नए निर्देश दिए गए हैं, तो उनके अनुरूप प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपयोगी हो सकते हैं.

क्या शिक्षकों को पाठ्यक्रम के बदलावों की जानकारी दी गई है?

शिक्षक से बातचीत के माध्यम से यह समझा जा सकता है कि किताब के निर्देशों को वास्तविक कक्षा में लागू करने में क्या व्यावहारिक चुनौतियां हैं.

क्या छात्रों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ेगा या सीखना आसान होगा?

नई किताब छात्रों के लिए नए प्रकार के अभ्यास और प्रश्न प्रस्तुत कर सकती है. कुछ छात्रों को अवधारणाओं को समझने में अधिक अभ्यास की आवश्यकता हो सकती है, जबकि अन्य छात्र नई गतिविधियों या उदाहरणों के माध्यम से विषय को समझ सकते हैं.

लेकिन सभी छात्रों पर एक जैसा प्रभाव पड़ेगा, यह पहले से तय नहीं किया जा सकता. छात्र की पिछली सीख, भाषा, शिक्षक का सहयोग, घर पर उपलब्ध संसाधन और किताब की वास्तविक सामग्री जैसे कई कारक महत्वपूर्ण हो सकते हैं.

क्या माता-पिता बच्चों की मदद कर सकते हैं?

अभिभावक बच्चों को सवाल का उत्तर सीधे बताने के बजाय समस्या को समझने और समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, वे पूछ सकते हैं कि बच्चे ने कौन-सा तरीका अपनाया और उसे उस तरीके का चुनाव क्यों उचित लगा.

यदि छात्र किसी अवधारणा को समझने में कठिनाई महसूस करता है, तो शिक्षक से सहायता लेना या अतिरिक्त अभ्यास कराना उपयोगी हो सकता है. महंगी गाइड या कोचिंग सामग्री खरीदना हर छात्र के लिए अनिवार्य है, ऐसा निष्कर्ष केवल नई पाठ्यपुस्तक के आधार पर नहीं निकाला जाना चाहिए.

भारतीय गणितीय परंपरा को कैसे शामिल किया गया है?

उपलब्ध कॉपी में नई गणित की किताब में भारतीय गणितीय परंपरा को स्थान दिए जाने का उल्लेख है. इस विषय को समझने के लिए पुस्तक के वास्तविक अध्यायों और उदाहरणों की जांच करना जरूरी होगा.

भारतीय गणितीय परंपरा से जुड़े विषयों में ऐतिहासिक गणितज्ञ, गणितीय विधियां, संख्याओं का विकास और गणितीय विचारों का इतिहास शामिल हो सकता है. लेकिन कौन-सा गणितज्ञ, कौन-सी विधि या कौन-सा ऐतिहासिक योगदान पुस्तक में मौजूद है, इसका उल्लेख तभी किया जाना चाहिए जब किताब या विश्वसनीय ऐतिहासिक स्रोत से इसकी पुष्टि हो.

इतिहास और गणितीय अवधारणा का संबंध क्या है?

गणित के इतिहास को पढ़ाते समय ऐतिहासिक जानकारी के साथ गणितीय अवधारणा भी समझाई जा सकती है. इससे छात्रों को यह जानने का अवसर मिल सकता है कि किसी विचार या विधि का विकास किस संदर्भ में हुआ था.

इस विषय पर विशेषज्ञ से पूछा जा सकता है कि ऐतिहासिक उदाहरणों को आधुनिक गणितीय अवधारणाओं के साथ किस तरह पढ़ाया जाना चाहिए. साथ ही, इतिहास से जुड़े दावों के लिए प्राथमिक या विश्वसनीय शैक्षिक स्रोतों का इस्तेमाल करना जरूरी है.

क्या नई किताब वास्तविक जीवन से गणित जोड़ती है?

गणितीय अवधारणाओं को वास्तविक जीवन से जोड़ने का उद्देश्य छात्रों को यह समझने में मदद करना हो सकता है कि गणित का उपयोग रोजमर्रा की परिस्थितियों में कहां किया जाता है. उदाहरण के तौर पर प्रतिशत, माप, समय, दूरी, डेटा और बजट से जुड़े सवालों को अलग-अलग संदर्भों में समझाया जा सकता है.

लेकिन किसी विशेष उदाहरण के नई NCERT किताब में शामिल होने का दावा करने के लिए पुस्तक की सामग्री देखना जरूरी है. इस एंगल पर रिपोर्टिंग करते समय यह जांचें कि किताब में किस प्रकार के वास्तविक जीवन आधारित प्रश्न दिए गए हैं और क्या वे गतिविधि या अभ्यास के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं.

क्या छात्रों को डेटा और ग्राफ समझने का अभ्यास मिलेगा?

यदि पाठ्यपुस्तक में तालिकाओं, ग्राफ या डेटा से जुड़े अभ्यास हैं, तो छात्र जानकारी को पढ़ने, तुलना करने और उसकी व्याख्या करने का अभ्यास कर सकते हैं. इस तरह की गतिविधियां गणितीय समझ के साथ डेटा पढ़ने की क्षमता विकसित करने में भी मदद कर सकती हैं.

इस विषय पर स्टोरी बनाते समय किताब से वास्तविक प्रश्नों के उदाहरण लिए जा सकते हैं. उदाहरण को प्रकाशित करने से पहले कॉपीराइट और पाठ्यपुस्तक के उपयोग संबंधी नियमों का ध्यान रखना चाहिए.

क्या सभी छात्रों को एक जैसी सीखने की सुविधा मिलेगी?

एक ही पाठ्यपुस्तक अलग-अलग स्कूलों में अलग परिस्थितियों में पढ़ाई जा सकती है. स्कूल में उपलब्ध शिक्षक, कक्षा का आकार, पुस्तक की उपलब्धता, भाषा संबंधी सहायता और डिजिटल संसाधन छात्रों के सीखने के अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं.

यह कहना कि किसी एक क्षेत्र के सभी स्कूलों में संसाधनों की कमी है या किसी दूसरे क्षेत्र के सभी स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं हैं, उचित नहीं होगा. इसके लिए विश्वसनीय आंकड़े और स्कूलों से प्राप्त सत्यापित जानकारी आवश्यक है.

क्या समावेशी शिक्षा का ध्यान रखा गया है?

पाठ्यपुस्तक की उपलब्धता के साथ यह भी देखना जरूरी है कि अलग-अलग जरूरतों वाले छात्रों को सीखने में कैसी सहायता मिलती है. सुलभ पाठ्य सामग्री, उपयुक्त शिक्षण सहायता और शिक्षक का मार्गदर्शन इस चर्चा के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं.

इस एंगल पर रिपोर्टिंग करते समय संबंधित समावेशी शिक्षा दिशानिर्देशों, आधिकारिक संसाधनों और शिक्षकों के अनुभवों को शामिल किया जा सकता है. किसी किताब को सभी छात्रों के लिए पूरी तरह सुलभ या अनुपयुक्त बताने से पहले पर्याप्त साक्ष्य की जरूरत होगी.

नई किताब और डिजिटल लर्निंग का क्या संबंध है?

नई पाठ्यपुस्तक और डिजिटल शिक्षा के बीच संबंध की जांच करते समय आधिकारिक डिजिटल संस्करण, QR कोड, ई-सामग्री या अन्य शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता देखी जा सकती है. लेकिन केवल पाठ्यपुस्तक में बदलाव होने से यह मानना सही नहीं होगा कि उसमें डिजिटल गतिविधियां या विशेष ऑनलाइन मॉड्यूल जरूर दिए गए हैं.

यदि पुस्तक में QR कोड या डिजिटल सामग्री उपलब्ध है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उसमें किस प्रकार की जानकारी है, क्या उसका इस्तेमाल वैकल्पिक है और क्या बिना इंटरनेट के छात्रों के लिए कोई अन्य विकल्प मौजूद है.

क्या डिजिटल संसाधनों की पहुंच सभी छात्रों तक है?

डिजिटल संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद सभी छात्रों के पास इंटरनेट, स्मार्टफोन या कंप्यूटर की समान सुविधा हो, यह जरूरी नहीं है. इसलिए डिजिटल लर्निंग के एंगल में पहुंच, उपयोगिता और ऑफलाइन सहायता की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया जा सकता है.

इस विषय पर आधिकारिक डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म, स्कूलों के अनुभव और शिक्षकों की राय उपयोगी स्रोत हो सकते हैं.

कक्षा 9 की गणित और आगे की पढ़ाई का संबंध

कक्षा 9 में गणितीय अवधारणाओं की समझ आगे की कक्षाओं में पढ़ाए जाने वाले विषयों के लिए आधार प्रदान कर सकती है. बीजगणित, ज्यामिति, संख्या संबंधी अवधारणाएं और समस्या समाधान जैसे कौशल उच्च स्तर के गणितीय अध्ययन में काम आ सकते हैं.

हालांकि, नई किताब को किसी विशेष प्रतियोगी परीक्षा या करियर में सफलता की गारंटी के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए. छात्रों के सीखने के परिणाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं, जिनमें शिक्षण की गुणवत्ता, अभ्यास, समझ और आगे की पढ़ाई शामिल हैं.

क्या समस्या समाधान दूसरे विषयों में भी उपयोगी है?

समस्या को समझना, जानकारी को व्यवस्थित करना और समाधान की जांच करना जैसे कौशल गणित के अतिरिक्त दूसरे विषयों में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं. उदाहरण के लिए, विज्ञान में किसी समस्या के कारणों को समझने या डेटा का विश्लेषण करने में व्यवस्थित सोच उपयोगी हो सकती है.

इस संबंध को प्रस्तुत करते समय यह स्पष्ट करना चाहिए कि किसी कौशल की संभावित उपयोगिता और किसी विशेष शैक्षिक परिणाम के बीच अंतर होता है. विशेषज्ञ से बातचीत इस अंतर को समझाने में मदद कर सकती है.

 पाठ्यपुस्तक में बदलाव के पीछे शिक्षा नीति का उद्देश्य

पाठ्यपुस्तक में बदलाव को शिक्षा नीति और पाठ्यचर्या ढांचे के संदर्भ में समझा जा सकता है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और संबंधित पाठ्यचर्या दस्तावेजों में सीखने की प्रक्रिया, समझ और कौशल विकास से जुड़े उद्देश्यों का अध्ययन किया जा सकता है.

लेकिन किसी खास पाठ्यपुस्तक के प्रत्येक बदलाव का कारण सीधे नीति के किसी एक प्रावधान को बताने से पहले संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी है. पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया, विशेषज्ञ योगदान और कार्यान्वयन संबंधी निर्देशों के बारे में उपलब्ध दस्तावेजों को देखा जाना चाहिए.

बदलाव की सफलता कैसे मापी जाएगी?

किसी नई किताब की उपयोगिता समझने के लिए केवल किताब जारी होने की सूचना पर्याप्त नहीं होती. छात्रों की समझ, शिक्षकों के अनुभव, अभ्यास की उपयोगिता और सीखने के परिणामों से जुड़े अध्ययन इस चर्चा को अधिक ठोस बना सकते हैं.

यदि नई पाठ्यपुस्तक के प्रभाव का कोई आधिकारिक अध्ययन या मूल्यांकन उपलब्ध है, तो उसके निष्कर्षों को स्रोत और अध्ययन की सीमा के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है.

अभिभावकों को नई किताब के बाद क्या समझना चाहिए?

नई पाठ्यपुस्तक के अनुसार घर पर पढ़ाई करते समय अभिभावक बच्चों को प्रश्न समझने, अपने समाधान का कारण बताने और गलती से सीखने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सवाल के लिए बच्चे को बिना सहायता के काम करना होगा.

माता-पिता रोजमर्रा के उदाहरणों से भी गणित पर चर्चा कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, खरीदारी में छूट, समय की गणना या वस्तुओं का माप जैसे संदर्भों में सवाल पूछे जा सकते हैं. लेकिन इन्हें नई किताब में दिए गए उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने से पहले पुस्तक की पुष्टि करनी होगी.

क्या नई गाइड खरीदना जरूरी है?

अतिरिक्त गाइड, कोचिंग या अभ्यास सामग्री की आवश्यकता छात्र की स्थिति, स्कूल की पढ़ाई और पाठ्यपुस्तक की सामग्री पर निर्भर कर सकती है. नई किताब जारी होने मात्र से सभी परिवारों को अतिरिक्त किताब खरीदने की सलाह नहीं दी जानी चाहिए.

अभिभावक स्कूल से वर्तमान सिलेबस, होमवर्क, परीक्षा संबंधी निर्देश और शिक्षक की सलाह के बारे में जानकारी ले सकते हैं. इससे वे बच्चे की पढ़ाई में जरूरत के अनुसार सहायता कर सकेंगे.

पुरानी और नई किताब की तुलना कैसे करें?

नई पाठ्यपुस्तक पर आधारित एक्सप्लेनर को विश्वसनीय बनाने के लिए पुरानी और नई किताब की अध्याय-दर-अध्याय तुलना की जा सकती है. नीचे दिया गया प्रारूप रिपोर्ट तैयार करते समय इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें वास्तविक पुस्तक से सत्यापित जानकारी ही भरी जानी चाहिए.

 

 

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About the Author

शिवम तिवारी, जी न्यूज में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं और पत्रकारिता में करीब 2 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं. यूपी के प्रयागराज के रहने वाले शिवम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. खबरों की नब्ज पकड़कर उन्हें आसान और साफ भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. शिवम शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर खास फोकस रखते हैं. इनमें स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षाएं, प्रवेश परीक्षाएं, सरकारी नौकरियां, रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स, करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.इसके अलावा शिवम, टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स और करियर काउंसलर्स की सलाह के आधार पर कंटेंट तैयार करते हैं. ये IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT और CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर गहराई से काम करते हैं और छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. शिवम तिवारीर से संपर्क करने के लिए आप उन्हें shivam.tiwari@india.com पर ईमेल कर सकते हैं.
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